DPC के बाद आठ महीने से रुका है एलटी महिला पदस्थापन, अनुमोदन पर शिक्षा निदेशालय में फंसा मामला

एलटी महिला शाखा की आठ विषय की 150 शिक्षिकाएं जरूर कुछ भाग्यशाली रहीं लेकिन इतनी नहीं कि डीपीसी के बाद पदलाभ पा जातीं। आठ माह पहले लोक सेवा आयोग ने इनकी डीपीसी की लेकिन माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से अनुमोदन न मिल पाने के कारण अब तक पदस्थापन नहीं मिल सका।

Ankur TripathiMon, 18 Oct 2021 03:21 PM (IST)
लोक सेवा आयोग आठ महीने पहले कर चुका है प्रवक्ता पदों पर पदोन्नत

प्रयागराज, राज्य ब्यूरो। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में समय पर विभागीय पदोन्नति (डीपीसी) नहीं मिलना गंभीर समस्या के रूप में सामने है। डीपीसी बैठक का कोरम पूरा नहीं हो पाने के कारण पदोन्नति के इंतजार में एलटी एवं प्रवक्ता संवर्ग के तमाम शिक्षक तो हैं ही, लेकिन एलटी महिलाओं के विषय में मामला इसके बिलकुल उलट है। इनकी डीपीसी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग करीब आठ माह पहले कर चुका है, लेकिन माध्यमिक शिक्षा निदेशालय (राजकीय) अब तक इनका पदस्थापन (प्लेसमेंट) नहीं कर पाया। निदेशालय की यही रफ्तार रही तो कई एलटी शिक्षिकाएं पदलाभ पाए बिना ही सेवानिवृत्त हो जाएंगी।

निदेशालय की अधूरी आख्या समस्या बन जाती है

राजकीय शिक्षकों के मामले में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग डीपीसी बैठक की तिथि तो तय करता है, लेकिन शिक्षा निदेशालय की उपेक्षा के कारण या तो कई बार बैठक पूरी नहीं होती या कभी निदेशालय की अधूरी आख्या समस्या बन जाती है। एलटी पुरुष शाखा के 794 शिक्षकों की डीपीसी के लिए पिछले करीब छह माह में चार बार लोक सेवा आयोग तिथि तय कर चुका है, लेकिन निदेशालय की ओर से कोरम पूरा न होने से बैठक बेनतीजा रह जाती है। एलटी महिला शाखा की आठ विषय की 150 शिक्षिकाएं जरूर कुछ भाग्यशाली रहीं, लेकिन इतनी नहीं कि डीपीसी के बाद पदलाभ पा जातीं। करीब आठ माह पहले लोक सेवा आयोग ने इनकी डीपीसी की, लेकिन माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से अनुमोदन न मिल पाने के कारण अब तक पदस्थापन नहीं मिल सका।

पत्रावली निदेशक को भेजी लेकिन अनुमोदन नहीं मिल सका

मामले में अपर निदेशक माध्यमिक राजकीय की ओर से कहा जाता है कि पत्रावली निदेशक को भेजी गई, लेकिन अनुमोदन नहीं मिल सका है। इस मामले से राजकीय मामले पर राजकीय शिक्षक संघ पाण्डेय गुट के प्रांतीय महामंत्री रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय कहते हैैं कि संघ ने 13 सितंबर को विभागीय विशेष सचिव को भी इस विषय से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ। यदि पदस्थापन अटका रहा तो कुछ शिक्षिकाएं सत्र के अंत में बिना पदलाभ पाए ही सेवानिवृत्त हो जाएंगी।

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