अलीगढ़ में नई तारीख लिखकर युवा भर रहे उड़ान, जानिए विस्‍तार से

युवा नई धाारा है, प्रवाह और वेग है।

युवा नई धाारा है प्रवाह और वेग है। जब जिद पर आता है तो एक नई गौरव गाथा लिखता है। इतिहास रच देता है। हमें गर्व है कि भारत दुनिया में युवा शक्ति से सबसे संपन्न देश है। जिले के कुछ युवाओं ने अपने हुनर से नया इतिहास रच दिया।

Publish Date:Tue, 12 Jan 2021 10:03 AM (IST) Author: Sandeep kumar Saxena

अलीगढ़, राजनारायण सिंह। युवा नई धाारा है, प्रवाह और वेग है। जब जिद पर आता है तो एक नई गौरव गाथा लिखता है। इतिहास रच देता है। हमें गर्व है कि भारत दुनिया में युवा शक्ति से सबसे संपन्न देश है। इन्हीं में से जिले के कुछ युवाओं ने अपने हुनर, कला, जिद और जुनून से नया इतिहास रच दिया। उनके रास्ते में तमाम मुश्किलें आईं। परिवार तक ने साथ नहीं दिया। मगर, इन युवाओं के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और एक नई कहानी लिख दी। विश्व युवा दिवस के मौके पर ऐसे ही युवाओं की प्रेरणा स्रोत कहानी... 

 

शिवाषीश ने हाथों के हुनर को दी नई उड़ान 

जिनके दिल में हौसले होते हैं, उन्हीं के पक्ष में फैसले होते हैं, शहर के मशहूर चित्रकार शिवाशीष शर्मा ने इसे चरितार्थ किया है। छह वर्ष की उम्र में उन्होंने छोटे हाथों में कूची थाम ली। 10 वर्ष की उम्र में उन्हाेंने जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर बनाई, जिसकी जमकर तारीफ हुई। उसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। शिवाशीष अबतक 22 पुस्तकाें में चित्राकंन कर चुके हैं। चंपक, फिल्मी दुनिया, गृहलक्ष्मी जैसी ढेरों मैगजीन में उनके द्वारा बनाए गए चित्र प्रकाशित हाे चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने 2007 में नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया। प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास के गाजियाबाद स्थित केवी कुटीर में पेटिंग कर चुके हैं। करतारपुर कारिडोर पर पेटिंग को देखकर पीएम नरेंद्र मोदी मुग्ध हो गए, उन्होंने खूब सहराना की। यहां पर उन्होंने 24 पेटिंग बनाई थी। सब टीवी पर वाह क्या बात है के सेट को भी अपने हाथों से सजाया। शिवाशीष कहते हैं कि वह उनके जीवन का अविस्मरणीय पल था। शिवाशीष अपनी उपलब्धि का श्रेय प्रसिद्ध हास्य कवि व पिता प्रेम किशोर पटाखा को देते हैं। 

ऊषा ने खेती में लिख दी नई इबारत 

इगलास क्षेत्र के गांव नगला अहिवासी निवासी ऊषा शर्मा ने अपने जिद और जुनून से एक नई तारीख लिख दी। ऊषा शर्मा ने एमएमसी 2017 में आगरा विश्वविद्यालय से एमएससी की। इसके बाद इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ( आइसीएमआर) में नौकरी की। डेढ़ साल तक करीब वहां काम किया। फिर हाथरस में मशरूम प्लांट में काम करने लगी। इसी बीच कोरोना का प्रकोप शुरू हो गया और लॉकडाउन लग गया। यहीं से ऊषा ने अपनी जिंदगी को एक नया मोड़ दिया। उन्होंने अपने गांव में खेती करने का निर्णय ले लिया। यह सुनकर परिवार के लोग चौक गए। पिता देवीराम ने कहा कि पढ़ाई-लिखाई करके लोग नौकरी करते हैं और तुम खेती करोगी। गांव के लोग क्या कहेंगे? मगर, ऊषा शर्मा ने खेती करने का इरादा पक्का कर लिया था। उन्होंने कहा कि किसान अंधाधुंध रासायनिक खाद खेतों में डालकर मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म कर दे रहे हैं। इसे मैं रोकूंगी। उन्होंने अपने घर पर मिट्टी की जांच के लिए लैब स्थापित की। जिले में घर पर पहली लैब है। गांव में मशरूम, स्ट्राबेरी, केला, पपीता आदि की खेती नई तकनीकी के साथ शुरू कर दी। ऊषा शर्मा के इस प्रयोग ने गांवों में एक नई शुरुआत की। उनकी नई तकनीकी से खेती को देखने के लिए पूरे देशभर से लोग आते हैं। महिला किसान के रुप में उन्हें जिले में सम्मान भी मिल चुका है। 

 

रीनाउंड शूटर कुणाल का अचूक निशाना 

पढ़ाई का क्षेत्र हो या खेल का अगर कड़ी मेहनत व लगन है तो कोई भी अपनी अलग पहचान बना सकता है। ऐसा ही कारनामा जिले के स्टार शूटर में शुमार हो चुके 19 वर्षीय कुणाल सैनी ने कर दिखाया है। 10 मीटर एसर पिस्टल निशानेबाजी में सिर्फ नेशनल में पदक जीतकर ही इन्होंने जिले का नाम नहीं चमकाया। बल्कि 25 मीटर .22 बोर पिस्टल इवेंट के वे जिले के एकमात्र रीनाउंड शूटर भी बन गए हैं। उनके कोच व यूपी शूटिंग टीम मैनेजर वेदप्रकाश शर्मा ने बताया कि शूटिंग के पिछले एक दशक में जिले में 25 मीटर .22 बोर पिस्टल में अभी तक कोई रीनाउंड शूटर नहीं बना है। यह उपलब्धि कुणाल ने अपने नाम की है। 2017 में कुणाल ने आलइंडिया शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। वे अभी तक तीन नेशनल चैंपियनशिप भी खेल चुके हैं। इनकी सफलता की फेहरिस्त यहीं नहीं थमती। कुणाल ने 10 मीटर व 25 मीटर दोनों इवेंट में इंडियन शूटिंग टीम के सेलेक्शन ट्रायल के लिए भी क्वालीफाई किया है। दुबे पड़ाव निवासी व डीपीएस से 12वीं करने वाले कुणाल ने बताया कि अब वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं। शूटिंग खेल में देश के लिए ओलंपिक पदक जीतना उनका सपना है।

शांतनु ने दी नई पहचान

शांतनु नंदन अग्रवाल ने मात्र 26 साल की उम्र में व्यवसाय में एक नया आयाम स्थापित किया है। शांतनु ने अमेरिका से इंडस्ट्रीयल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। साथ ही हवाई जहाज के पायलट की ट्रेनिंग भी की है। मेधावी शांतनु को अमेरिका में नौकरी के तमाम अवसर मिल रहे थे, मगर उन्होंने तय किया कि अपनी माटी से जुड़कर काम करेंगे। इसलिए वो 2016 में अलीगढ़ आ गए। यहां पर पिता रोहित अग्रवाल की अन्नू ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में काम किया। चूंकि अमेरिका से उन्होंने पढ़ाई की थी तो इसका भरपूर फायदा उठाया। कंपनी को अपग्रेड करने के लिए सीएनसी मशीनों का आयात किया। आधुनिक प्लांट तैयार होने के बाद यह कंपनी ओर्जीनल एक्यूमेंट मैन्युफेक्चर ( ओईएम) के कंपोनेंट तैयार करने लगी। इस कंपनी का करार मल्टीनेशनल कंपनियों से हो गया। जिसमें वाशिंग मशीन, वाटर प्योरी फाइ, ऑटो मोबाइल्स कंपनी द्वारा डिजाइन किए गए कंपोनेंट तैयार किए जाते हैं। शांतनु ने जिस समय कंपनी को संभाला, उस दौरान नोटबंदी हो गई थी। नकदी को लेकर देशभर में हाहाकार मचा हुआ था। कुछ लोगों ने शांतनु के निर्णय पर सवाल भी खड़े किए, मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। मंदी के दौर से बाहर आएं और आज उनकी कंपनी दुनिया के तमाम देशों में एक्यूमेंट निर्यात करती है। कोविड-19 में भी शांतुन के कदम नहीं डगमगाए, 

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