विद्यार्थियों की संख्या के साथ अभिभावकों की अनुमति कसेगी शिकंजा Aligarh news

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में सभी स्कूल-कालेजों को बंद रखने के अादेश सरकार ने जारी किए थे। संक्रमण की घातकता को देखते हुए इस बार आनलाइन पढ़ाई को भी बंद रखा गया था। अब जब दूसरी लहर पर नियंत्रण पा लिया गया है ।

Anil KushwahaWed, 28 Jul 2021 11:45 AM (IST)
माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध कालेजों में 94 एडेड, 35 राजकीय और करीब 625 वित्तविहीन कालेज जिले में हैं।

अलीगढ़, जेएनएन।  कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में सभी स्कूल-कालेजों को बंद रखने के आदेश सरकार ने जारी किए थे। संक्रमण की घातकता को देखते हुए इस बार आनलाइन पढ़ाई को भी बंद रखा गया था। अब जब दूसरी लहर पर नियंत्रण पा लिया गया है तब भी स्कूल-कालेजों को बंद रखने का फैसला बदस्तूर जारी है। ऐसे में वित्तविहीन कालेजों व निजी विद्यालयों के शिक्षकों ने संस्थानों को खोलने की मांग उठाई है। 26 जुलाई को बीएसए कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर मोटरसाइकिल जुलूस भी निकाला था। अब यूपी बोर्ड ने विद्यालयों को खोलने के संबंध में अभिभावकों की अनुमति मांगने का काम शुरू किया है। मगर इसमें विद्यार्थियों की संख्या का पेंच भी लगा दिया है।

जिले में करीब 625 वित्‍त विहीन कालेज

माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध कालेजों में 94 एडेड, 35 राजकीय और करीब 625 वित्तविहीन कालेज जिले में हैं। डीआइओएस कार्यालय से सभी प्रधानाचार्यों के लिए पत्र जारी किया गया है। वे अपने संस्थान में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों से विद्यालय खोले जाने के बारे में अनुमति मांगे। इसमें देखा जाएगा कि कितने अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय भेजने के पक्ष में हैं और कितने अभिभावक इसके पक्ष में नहीं हैं। पिछले कोरोना काल में जब विद्यालय बंद थे तब भी विद्यालय संचालकों से अभिभावकों की अनुमति मांगी गई थी। तब कुछ वित्तविहीन कालेजों की ओर से ताबड़तोड़ अनुमतियां पेश की गई थीं। इस बार अफसरों ने अभिभावकों की अनुमति के साथ विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या को भी मांगा है। जिससे ये न हो कि जितने विद्यार्थी पढ़ते हैं उससे ज्यादा अभिभावकों की अनुमति न आएं। वित्तविहीन शिक्षकों ने इंटरनेट मीडिया पर साथियों से अपील भी कर दी है कि ज्यादा से ज्यादा अभिभावकों की अनुमति लेकर विद्यालयों को खोलने की दिशा में सहयोग करें।

इनका कहना है

डीआइओएस डा. धर्मेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को अभिभावकों की अनुमति की वास्तविक संख्या देनी है। संस्थान में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या भी देनी है। अगर किसी संस्थान से गलत सूचना दी गई तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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