राजा महेंद्र प्रताप सिंह जब कक्षा में जाते थे तब नौकर किताब लेकर चलते थे, गुल्‍ली-डंडा का शौक रखते थे

देश को गुलामी की जंजीरों से आजादी दिलाने वालों की फेहरिस्त बहुत लंबी है जिन्होंने देश की खातिर अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया। आर्यन पेशवा राजा महेंद्र प्रताप सिंह का नाम उन्हीं में शामिल है। वे देश को आजादी दिलाने की खातिर परिवार से 32 साल दूर रहे।

Anil KushwahaWed, 01 Dec 2021 06:32 AM (IST)
राजा महेंद्र प्रताप सिंह का फाइल फोटो।

संतोष शर्मा, अलीगढ़ । देश को गुलामी की जंजीरों से आजादी दिलाने वालों की फेहरिस्त बहुत लंबी है, जिन्होंने देश की खातिर अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया। आर्यन पेशवा राजा महेंद्र प्रताप सिंह का नाम उन्हीं में शामिल है। वे देश को आजादी दिलाने की खातिर परिवार से 32 साल दूर रहे। विदेश में रहने के दौरान जवान बेटे और पत्नी की मौत हो गई। राजा ने अफगानिस्तान में देश की पहली निर्वासित सरकार बनाई तो अंग्रेज तिलमिला गए। राजा को बेदखलकर उनकी रियासत को कब्जे में ले लिया। राजा ने शिक्षा के प्रसार के लिए वृंदावन में प्रेम महाविद्यालय की स्थापना की तो अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी को लीज पर जमीन देकर धर्मनिरपेक्षता का संदेश भी दिया। आज राजा महेंद्र प्रताप की 135वीं जयंती मनाई जा रही है। अच्छी बात ये भी है कि उत्तर प्रदेश सरकार राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर लोधा के पास राजकीय विश्वविद्यालय का निर्माण करा रही है। यूनिवर्सिटी को राजमहल की तरह ही भव्य रूप दिया जाएगा।

हाथरस के राजा हरनारायणसिंह ने रााजा महेंद्र सिंह को गोद लिया था

मुरसान के राजा घनश्याम सिंह के यहां एक दिसंबर 1886 को जन्मे राजा महेंद्र प्रताप को हाथरस के राजा हरनारायण सिंह ने गोद ले लिया था। उन पर कोई संतान नहीं थी। दोनों राजाओं में पारिवारिक रिश्ते थे। राजा हरनारायण सिंह ने महेंद्र प्रताप को शिक्षा दिलाने के लिए वर्ष 1895 में अलीगढ़ के गवर्नमेंट हाईस्कूल (अब नौरंगीलाल इंटर कालेज) भेजा था। राजा हरनारायण सिंह और घनश्याम सिंह की एएमयू संस्थापक सर सैयद अहमद खां से घनिष्ठ मित्रता थी। सर सैयद के अनुरोध पर राजा ने उसी साल महेंद्र प्रताप का दाखिला मोहम्मडन एंग्लो ओरियंटल (एमएओ) कालेज में करा दिया। 1920 में यही कालेज एएमयू के नाम से विख्यात हुआ।

तीसरी में हुए सम्मानित, पांचवीं में खानी पड़ी मार

एमएओ कालेज में महेंद्र प्रताप को चार कमरों का बंगला छात्रावास के रूप में दिया गया। दो कमरों में उनके दस नौकर रहते थे। राजा ने अपनी आत्मकथा 'माई लाइफ स्टोरी' में भी लिखा है कि जब वे क्लास में जाते थे, तब नौकर किताब लेकर चलते थे। कक्षा तीन में दूसरा स्थान हासिल करने पर राजा को सम्मानित किया गया। पांचवीं कक्षा में उन्हें शिक्षक से मार भी खानी पड़ी। कक्षा 8 व 12 में फेल भी हुए। पिता की मौत के कारण राजा को रियासत संभालनी पड़ी और कक्षा 12वीं के बाद 1907 में कालेज छोड़ दिया। बीए की डिग्री न लेने की बात भी उन्होंने लिखी है। उन्हें गुल्ली-डंडा खेल का भी शौक था। सात जनवरी 1977 को एमएओ कालेज का शताब्दी वर्ष मनाया गया था, जिसमें राजा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। एएमयू में राजा का यह अंतिम दौरा था। 29 अप्रैल 1979 में उनका निधन हो गया।

रियासत से कर दिया था बेदखल

राजा के प्रपौत्र चरत प्रताप सिंह ने बताया कि राजा ने अफगानिस्तान में 1915 में भारत की अंतरिम सरकार बनाई थी। इससे नाराज अंग्रेजी हुकूमत ने राजा की हाथरस रियासत की संपत्ति पर अधिकार जमा कर उन्हें बेदखल कर दिया। राजा के बेटे प्रेम प्रताप सिंह ने अंग्रेजों के इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाई। तब अंग्रेजों ने इस शर्त के साथ संपत्ति लौटाई कि राजा का इस पर कोई हक नहीं होगा। देश आजाद होने के बाद इस पर संसद में बहस हुई, तब राजा को अपनी संपत्ति पर पुन: अधिकार मिल सका।

रानी का बलिदान भी कम नहीं

राजा महेंद्र प्रताप का विवाह हरियाणा के जींद रियासत के सिद्धू जाट परिवार के महाराज रंजीत सिंह की पुत्री बलवीर कौर से हुआ था। वर्ष 1909 में पुत्री भक्ति और 1913 में पुत्र प्रेम प्रताप का जन्म हुआ। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ही वर्ष 1914 में राजा महेंद्र प्रताप विदेश चले गए। रानी ने इस दौरान बड़ी मुश्किलें झेलीं। राजा से वह करीब 12 साल दूर रहीं। देश आजाद होने पर राजा जब विदेश से लौटे तो रानी के अलावा जवान बेटेे का भी देहांत हो चुका था।

सादगी से मनाई जाएगी जयंती

जाट महासभा इस बार राजा महेंद्र प्रताप की जयंती सादगीपूर्ण तरीके से मनाएगी। एक दिसंबर को हवन, पूजन होगा और प्रसाद बांटा जाएगा। महासभा के अध्यक्ष चौधरी बिजेंद्र सिंह ने बताया कि तस्वीर महल स्थित पार्क में निर्माण कार्य चल रही है। इस कारण बड़ा कार्यक्रम नहीं हो पाएगा। पार्क में सुबह आठ बजे हवन किया जाएगा।

एएमयू में आयोजन नहीं

राजा महेंद्र प्रताप के जन्म दिवस पर इस बार एएमयू कोई आयोजन नहीं है। यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता प्रो. शाफे किदवई ने बताया के कोरोना के चलते यूनिवर्सिटी में आयोजन नहीं हो रहे हैं। हमें गर्व है कि राजा एमएओ कालेज के छात्र थे। उन्होंने जमीन भी लीज पर दी थी।

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