विश्व कल्याण के लिए गूंजे वैदिक मंत्र, यज्ञ में दी आहुति Aligarh News

ऐसे में इससे निजात पाने के लिए तमाम उपाय ढूंढे जा रहे हैं।

। कोरोना के कहर से पूरा देश सहमा हुआ है। ऐसे में इससे निजात पाने के लिए तमाम उपाय ढूंढे जा रहे हैं। सोमवार को आर्य समाज ने पूरे देश में यज्ञ कार्यक्रम आयोजित किया। वैदिक मंत्रों के साथ आर्य समाज परिवार ने हवन में आहुति दी।

Sandeep Kumar SaxenaMon, 03 May 2021 05:57 PM (IST)

अलीगढ़, जेएनएन। कोरोना के कहर से पूरा देश सहमा हुआ है। ऐसे में इससे निजात पाने के लिए तमाम उपाय ढूंढे जा रहे हैं। सोमवार को आर्य समाज ने पूरे देश में यज्ञ कार्यक्रम आयोजित किया। वैदिक मंत्रों के साथ आर्य समाज परिवार ने हवन में आहुति दी। जिले में 50 से अधिक स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। सभी ने मंत्रों के साथ विश्व कल्याण की कामना की।

 विद्वानों ने मंत्रोच्चार कर हवन में आहुति दी

सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा और आर्य प्रतिनिधि सभा उप्र की ओर से घर-घर हवन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। सोमवार को सुबह नौ बजे कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। अचल ताल स्थित आर्य समाज मंदिर में कार्यालय प्रमुख आशीष शर्मा की ओर से हवन आयोजित किया गया। विद्वानों ने मंत्रोच्चार कर हवन में आहुति दी। चारों ओर वैदिक मंत्र गूंज उठे। आशीष शर्मा ने कहा कि यज्ञ हमारी सनातन संस्कृति की परंपरा है। प्राचीन समय में ऋषि-मुनि यज्ञ किया करते थे, जिससे वातावरण शुद्ध रहता था। तमाम तरह के वैक्टीरिया समाप्त हो जाया करते थे। कोरोना से बचाव के लिए नित्य प्रतिदिन यज्ञ करना होगा। भूदेव शर्मा ने कहा कि एक साल से अधिक समय हो गया, मगर कोरोना से निजात नहीं मिला। डाक्टर और वैज्ञानिक अभी तक शोध में लगे हुए हैं। इससे साफ पता चलता है कि दुनिया को सिर्फ वैदिक परंपरा ही बचा पाएगी। घर-घर यज्ञ करें, मंत्रोच्चार करें। जिससे वातावरण शुद्ध होगा और कोरोना जैसे तमाम रोग समाप्त हो जाएंगे। राधेश्याम शर्मा ने कहा कि पूरा देश इस समय सहमा हुआ है, ऐसे समय में हमारा कर्तव्य होना चाहिए कि हम अधिक से अधिक यज्ञ करें। प्रत्येक परिवार को जागरूक करें। लाकडाउन चल रहा है, लोग घरों में हैं, उन्हें इंटरनेट मीडिया के माध्यम से यज्ञ की परंपरा के बारे में बताएं, जिससे हम इस धरती को बचा पाएंगे। आर्य समाज मंदिर के प्रशासक राजेंद्र पथिक ने अपने घर पर परिवार के साथ यज्ञ किया।

यज्ञ से ही विश्व कल्याण होगा

पथिक ने कहा कि कोरोना का किसी काे कोई उपाय नहीं सूझ रहा है, जबकि पूरी दुनिया इसपर शोध में लगी हुई है। लोगों को वैदिक परंपरा की ओर लौटना हाेगा, यही एक आधार है। क्योंकि भारतीय संस्कृति पूरी तरह से वैज्ञानिकता पर आधारित है। खान-पान, रहन-सहन सबकुछ में वैज्ञानिक सोच निहित है, इसलिए तो हमारे ऋषि-मुनि हजार वर्षों तक जीवित रहते थे। वो किसी रोग-दोष के शिकार नहीं होते थे। क्योंक यज्ञ से तपोबल बढ़ता है, तेजस्विता आती है और निरोगी काया बनती है। राजेंद्र पथिक ने सभी से अपील की कि कोरोना से यदि बचना है तो घर-घर में यज्ञ करें। लक्ष्मी शर्मा ने कहा कि हमारे यहां वीरांगनाएं पूजा-पाठ और यज्ञ के बल पर ही शक्ति को प्रदान करती थीं। झांसी की रानी, रानी दुर्गावती जैसी वीरांगनाएं आदि शक्ति मां जगदंबे की उपासक थी, इससे उनके अंदर आत्मबल प्रबल था। राकेश वशिष्ठ ने कहा कि आर्य समाज की इस पहल को प्रत्येक व्यक्ति को अपनाना पड़ेगा, तभी उसका जीवन बच सकेगा। यज्ञ से ही विश्व कल्याण होगा।

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