UP Assembly Election 2022: ब्राह्मण कार्ड चलकर भाजपा को ललकारेगी बसपा

प्रदेश में विधानभा चुनाव का अधिकारिक बिगुल भले ही नहीं फूंका हो मगर इस सर्द मौसम में सियासी पार चढ़ता जा रहा है। ब्राह्मण कार्ड चलकर बसपा भाजपा को ललकार रही है। बुधवार को पार्टी ने डा. अविन शर्मा को प्रत्याशी घोषित किया है।

Sandeep Kumar SaxenaThu, 25 Nov 2021 12:02 PM (IST)
हाथरस जिले के सादाबाद विधानसभा क्षेत्र से पार्टी ने डा. अविन शर्मा को प्रत्याशी घोषित किया है।

अलीगढ़, जागरण संवाददाता। प्रदेश में विधानभा चुनाव का अधिकारिक बिगुल भले ही नहीं फूंका हो, मगर इस सर्द मौसम में सियासी पार चढ़ता जा रहा है। ब्राह्मण कार्ड चलकर बसपा भाजपा को ललकार रही है। बुधवार को हाथरस जिले के सादाबाद विधानसभा क्षेत्र से पार्टी ने डा. अविन शर्मा को प्रत्याशी घोषित किया है। बुधवार को भी जिले की बरौली व एटा जिले की पटियाली विधानभा क्षेत्र से ब्राह्मण प्रत्याशी घोषित किया जाएगा। मुख्य अतिथि पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व अलीगढ़ आगरा, मिर्जापुर मंडल के मुख्य सेक्टर प्रभारी बाबू मुनकाद अली इन सीटों के नामों पर घोषणा करेंगे।

ये कैसा महोत्सव?

अमृत महोत्सव वीरों की गौरवगाथा है। आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर पूरे देश में यह मनाया जा रहा है। महोत्सव के माध्यम से देश के उन वीर सपूतों को भी खोज निकालना था, जिन्होंने आजादी के लिए अपना सर्वस्य न्यौछावर कर दिया था। आजादी की लड़ाई में उनका योगदान किसी से कम नहीं था, मगर वह इतिहास के पन्नों पर चमक नहीं सके। पीएम ने भी कहा था कि ऐसे लाेगों को सामने लाया जाए? मगर, जिले में अमृत महोत्सव के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। क्रिकेट मैच खेलकर महोत्सव मनाया जा रहा है। जिस देश ने हमें गुलाम बनाया था, क्रिकेट से उसका गहरा नाता है। ऐसे में अच्छा होता जिले के उन तमाम क्रांतिकारियों को खोजा जाता जो गुमनामी में हैं। मगर, उनके शौर्य और वीरता की गाथा किसी से कम नहीं है। इनकी कहानियां नई पीढ़ी को बताए जाने की जरूरत है।

कहीं दीवार रुकावट न बन जाए

फिल्म दीवार में दो भाइयों के बीच में दीवार खींची रहती है, मगर सालना जलसे के मैदान में तो दीवार ही खड़ी कर दी गई। हालांकि, इसका प्रयोजन समझ से परे है। दीवार खड़ी करते समय ही हलचलें तेज हो गई थीं। आखिर जलसा कैसे होगा? जीटी रोड के सामने तमाम दुकानें रहती हैं, दुकानदारों को इससे दिक्कत आएगी। ऐसे में दो बड़ी चुनौतियां भी हैं। पहली बड़ी चुनौती जलसे को अच्छे से निपटाना होगा? दूसरी चुनौती चुनावी रैलियों में होगी। जलसे वाले मैदान में अपार सैलाब उमड़ पड़ता है। चारों ओर भीड़ ही भीड़ दिखाई देती है। ऐसे में जलसे का मैदान खुला रहना ठीक रहता है। क्योंकि चुनावी रेला उमड़ता है तो वह किसी को देखता नहीं है। कहीं, दीवार रुकावट न बन जाए? हालात को देखते हुए उसे हटाने के निर्देश न आ जाए। आश्चर्य की बात है कि सत्ताधारी पार्टी के नेताजी भी इसपर मौन हैं।

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