Coronas havoc : ये मुश्किल वक्त है, एक-दूसरे की डोर थामे रहिए Aligarh news

कोरोना की दूसरी लहर ने सबको हिला कर रख दिया है।

टीवी चैनलों पर पिछले दिनों बहुत सी ऐसी तस्वीर देखी होंगी जिन्होंने विचलित किया होगा। कोई जिंदगी के लिए लाइन में लगा हुआ था तो कोई मरने के बाद मोक्ष प्राप्ति के लिए। कोरोना की दूसरी लहर ने सबको हिला कर रख दिया है।

Anil KushwahaSun, 18 Apr 2021 11:21 AM (IST)

अलीगढ़, जेएनएन। टीवी चैनलों पर पिछले दिनों बहुत सी ऐसी तस्वीर देखी होंगी जिन्होंने विचलित किया होगा। कोई जिंदगी के लिए लाइन में लगा हुआ था तो कोई मरने के बाद मोक्ष प्राप्ति के लिए। कोरोना की दूसरी लहर ने सबको हिला कर रख दिया है। कहीं अस्पतालों में बैड की कमी है तो कहीं लापरवाही चरम पर। बदइंतजामी का परिणाम ये कि इंसान के साथ इंसानियत की मौत हो रहीं है। अस्पतालों में अभी भी हाहाकार मचा हुआ है। सरकारी तंत्र भी हैरान और परेशान है। परंतु, महामारी पर जीत तो हासिल करनी होगी। एक साल पहले भी इस अदृश्य बीमारी को काफी हद तक मात दी थी। लेकिन दुश्मन का खात्मा हुए बगैर ही जीत मानकर बैठ गए। यही लापरवाही भारी पड़ गई। फिर से हमें सजग रहना होगा। ये मुश्किल वक्त है। एक-दूसरे की डोर भी थामनी होगी। एक जुटता से किसी भी मुसीबत से लड़ा जा सकता है। 

पालन तो करना ही होगा

प्लेग, कालेरा, और स्पैनिश फ्लू ऐसी बीमारी रहीं जो हर सौ साल बाद आईं। कोरोना की तरह इन बीमारियों ने कई देशों में इंसानों की जान ली। स्पैनिश फ्लू के सौ साल बाद कोरोना महामारी ने दुनियाभर में हाहाकार मचा दिया। पिछले साल चीन से निकले इस वायरस ने लाखों लोगों की जान ले ली। हम इस वायरस की दूसरी लहर का सामना कर रहे हैं। कोरोना वायरस की तरह ही प्लेग, कालेरा और स्पैनिश फ्लू के समय भी दुनिया में इनके इलाज के व्यापक इंतजाम नहीं थे। उस समय भी लोगों को घर में रहने रहने की सीख दी गई थी। यानि मास्क और शारीरिक दूरी का पाठ पढ़ाया गया था। कोरोना वायरस को हराने के लिए दवा से ज्यादा मास्क लगाने और शारीरिक दूरी का पालन करना जरूरी है, फिर भी हम अनजान बने हुए हैं। एक-दूसरे की सेहत की खातिर इसका पालन करना ही होगा। 

कभी भुला नहीं पाएंगे

सीबीएसई की बोर्ड परीक्षा रदद हो गईं। अन्य बोर्ड परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गईं।। ऐसा कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के चलते किया गया है।  देश में जब से कोरोना ने दस्तक दी है सबसे अधिक मार छात्रों पर ही पड़ी है। मार्च से पहले कोरोना के केस कम आने पर उम्मीद बंधी थी कि नए सत्र से स्कूलों में पढ़ाई का माहौल फिर से बनेगा। परंतु स्कूल खुलने से पहले ही कोरोना ने ऐसा झपट्टा मारा किया कि फिर से लाकडाउन की ओर बढ़ने लगे हैं। बोर्ड की परीक्षा रद होना कुछ छात्रों के लिए खुशी की बात हो सकती है, लेकिन उन छात्रों के लिए कतई नहीं जो दिन रात मेहनत कर रहे थे। पहली बार बोर्ड  परीक्षा देने का मजा कुछ और ही होता है। इस कोरोना ने छात्रों को इससे वंचित कर दिया।  छात्रों को इसका मलाल ताउम्र रहेगा। इसे वो कभी भूल नहीं पाएंगे। 

आ गई परीक्षा की घड़ी  

पंचायत चुनाव में कुछ ही दिन शेष हैं। विधानसभा चुनाव से पहले हर दल के लिए ये चुनाव बहुत मायने रखते हैं। माना जा रहा है कि जितनी पंचायतों में जिसका कब्जा होगा, विधानसभा चुनाव में उतनी की पकड़ मजबूत होगी। सत्ताधारी भाजपा और बसपा को साख बचाने के लिए मैदान में उतरना होगा। पिछले चुनाव में  उपेंद्र सिंह नीटू के रूप में बसपा का झंडा बुलंद हुआ था। इस बार नीटू भाजपा में हैं और चुनाव मैदान से बाहर भी। भाजपा के लिए भी चुनाव नाक का सवाल बन गया है। क्योंकि सात विधायक, सांसद और एमएलसी उसके ही हैं। इतने माननीय होने के बाद पार्टी चाहेगी कि जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी भी उसकी हो। कांग्रेस और सपा भी पूरे दमखम से मैदान में हैं। कांग्रेस के दो दिग्गज सपा में चले गए हैं। ऐसे में कांग्रेस के अन्य नेताओं के लिए ये चुनाव किसी परीक्षा से कम नहीं है।

 

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