कोरोना के भय से बचाते हैं ये उपाय, आप ऐसा करके देखिए सुख भी मिलेगा Aligarh News

शहर में कुछ जगहों पर लोग भजन-कीर्तन करने लगे हैं।

कोरोना का अंदर बैठा डर खत्म हो जाता है। क्योंकि भक्ति में लीन होने के बाद फिर कोरोना का डर नहीं सताता है वैसे तमाम तरह की मन में शंकाएं उमड़ती हैं। इसलिए शहर में कुछ जगहों पर लोग भजन-कीर्तन करने लगे हैं।

Sandeep Kumar SaxenaFri, 14 May 2021 11:50 AM (IST)

अलीगढ़, जेएनएन। कोरोना से लड़ने के तमाम उपाय ढूंढे जा रहे हैं। लोग घरों में पूजा-पाठ करना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि पूजा-पाठ से मन शांत रहता है। कोरोना का अंदर बैठा डर खत्म हो जाता है। क्योंकि भक्ति में लीन होने के बाद फिर कोरोना का डर नहीं सताता है, वैसे तमाम तरह की मन में शंकाएं उमड़ती हैं। इसलिए शहर में कुछ जगहों पर लोग भजन-कीर्तन करने लगे हैं। 

हर कोई कोरोना के डर से भयभीत 

कोरोना ने पूरे देश को दशहत में डाल दिया है। हर कोई कोरोना के डर से भयभीत है। पूरी दुनिया में इससे निकलने के उपाय ढूंढे जा रहे हैं। कैसे बचाव किया जा सके, उसके रास्ते निकाले जा रहे हैं। तमाम लोग ऐसे हैं जो टोने-टोटके तक पर आ गए हैं। वहीं, अलीगढ़ में कुछ लोग हैं, जो भजन-कीर्तन कर रहे हैं। पूजा-पाठ कर रहे हैं। उनका कहना है कि भगवान का भजन करने से मन और मस्तिक पूरी तरह से प्रभु के चरणों में लग जाता है। फिर कहीं और ध्यान नरहीं जाता है, यहां तक है कि कोरोना की बीमारी है, यह बात भी ध्यान में नहीं आती है। प्रसिद्ध भजन गायक सुमित गोटेवाल का कहना है कि इस समय 10 से अधिक परिवारों में भजन-कीर्तन शुरू हो गया है। वह स्वयं अपने पत्नी और बच्चों के साथ शाम को भजन-कीर्तन करते हैं। शाम पांच बजे ढोल मजीरा लेकर बैठ जाते हैं। फिर एक घंटे तक भजन होता  रहता है। एक घंटे के भीतर पूरे शरीर का मानों व्यायाम सा हो जाता है। क्योंकि कोई ढोलक बजाता है तो कोई मजीरा कोई शखनाद करता है, सभी भक्ति में लीन होते हैं। इससे पूरे शरीर में एक झंकार सी हाती है। शरीर में रक्त संचार तेज होने लगता है। वैसे आजकल लोग मशीनों पर अधिक आधारित होने लगे हैं। योग-व्यायाम नहीं करते हैं। मगर, भजन-कीर्तन से शरीर का पूरा व्यायाम हो जाता है। सुमित गोटेवाल का दावा है कि जो भी व्यक्ति हनुमान चालीसा का पाठ करेगा, सुंदरकांड पढ़ेगा, भजन-कीर्तन में व्यस्त रहेगा तो उसका ध्यान कभी भी कोरोना जैसी बीमारियों की तरफ जाएगा ही नहीं। इससे उसे कोरोना का भय कतई नहीं सताएगा। 

भक्ति में है आनंद 

रुचि गोटेवाल कहती हैं कि राधा-रानी की भक्ति में जो आनंद है वो कहीं नहीं है। शाम को हम लोग भजन करते हैं, उसमें पूरी तरह से लीन हो जाते हैं। फिर दीन-दुनिया की कोई चिंता नहीं रहती है। बस मानों ऐसे लगता है कि साक्षात प्रभु सामने खड़े हैं। हमारे यहां यह पहले से ही परंपरा थी। लोग पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन में लीन रहते थे। इससे लोगों के अंदर प्रेम बना रहता था। वो झूठ फरेब से दूर रहते थे। उनका ध्यान गलत चीजों की तरफ नहीं जाता था। इसलिए आज कोरोना काल के समय प्रत्येक व्यक्ति को पूजा-पाठ हवन-पूजन तेज कर देना चाहिए। आप निश्चित मानिए, आपके अंदर कोरोना का भय नहीं आएगा। साथ ही आक्सीजन की भी कमी नहीं होगी। 

वाकई में है फायदे 

मनोचिकित्सक डा. अंशू सोम का कहना है कि किसी भी काम में यदि आप तल्लीन हो जाते हैं तो अन्य चीजों की तरफ आपका ध्यान नहीं जाता है। फिर, भजन-कीर्तन में तो यह बात साै फीसद सही है। अंर्तमन से यदि कोई प्रभु काे ध्यान करता है तो उसका ध्यान कहीं और नहीं जाता है। फिर वो डर और भय से मुक्त हो जाता है। मन में जो तनाव होता है वो दूर हो जाता है। गलत विचार आने बंद हो जाते हैं। वो अपने आपको मजबूत समझने लगता है। इसलिए कोई भी कार्य भक्ति की तरह करेंगे तो उसमें आपको सफलता भी मिलेगी।

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