आजादी के इतिहास के पन्नों में शहादत की तमाम कहानियां हैं, ये हैं अलीगढ़ के क्रांतिकारी

आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर पूरे देश में उत्सव मनाया जा रहा है। आजादी से जुड़े क्रांतकारियों की कहानियां बयां की जा रही है। जिले में भी तमाम क्रांतिकारी हैं जिन्होंने इस देश के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण उत्सर्ग कर दिए।

Anil KushwahaThu, 25 Nov 2021 04:15 PM (IST)
आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर पूरे देश में उत्सव मनाया जा रहा है।

अलीगढ़, जागरण संवाददाता। आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर पूरे देश में उत्सव मनाया जा रहा है। आजादी से जुड़े क्रांतकारियों की कहानियां बयां की जा रही है। जिले में भी तमाम क्रांतिकारी हैं, जिन्होंने इस देश के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण उत्सर्ग कर दिए। इन बहादुरों की कहानियां सुनकर रोम-रोम रोमांचित हो जाता है।

गौरव गाथाओं से भरा भारतीय इतिहास

भारतीय इतिहास गौरवगाथा से भरा हुआ है। भारत माता के वीर सपूतों ने देश के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर कर दिया है। महान क्रांतिकारियों में सरदार भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, महान क्रांतिकाारी चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल, खुदीराम बोस, प्रफुल्ल चंद चाकी आदि क्रांतिकारी हैं, जिन्होंने देश पर अपना प्राण उत्सर्ग कर दिया। मगर, तमाम ऐसे भी वीर सपूत हैं, जिनका बलिदान बहुत बड़ा है, मगर वह इतिहास के पन्नों तक नहीं पहुंच पाएं। जिले में भी ऐसे तमाम क्रांतिकारी हैं। फूल चौक का कुआं आज भी शहादत की कहानियां बयां करता है, वहां पर अंग्रेजों ने फांसी घर बनाया था, भारतीयों को फांसी दिया करते थे। करीब 50 से अधिक क्रांतिकारियों को अंग्रेजों ने उस स्थान पर फांसी के फंदे पर लटका दिया। मगर, दुर्भाग्य है कि तमाम लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं है। खासकर नई पीढ़ी के लोगों को तो जानकारी ही नहीं है। इनके दस्तावेज तक नहीं सहेजेगे गए। इन क्रांतिकारियों के परिवार के लोगों तक की जानकारी नहीं है। आजाद भारत में भी इन्हें खोजने की कोशिश नहीं की गई।

शहर के कई क्रांतिकारियों के बारे में अभी भी लोगों को नहीं पता

इतिहासकार विशन बहादुर सक्सेना का कहना है कि आजादी की लड़ाई के समय तमाम ऐसे बहादुर सपूत हुआ करते थे जो घर-परिवार छोड़कर निकल जाया करते थे, बस उनका एक मकसद रहता था कि अंग्रेजों को सबक सिखाना है। भारत माता को आजाद कराना है। इसके चलते कई बार वो अंग्रेजों की क्रूरता का निशाना बन जाया करते थे। उन्हें बहुत तकलीफें दी गई और फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। ऐसे क्रांतिकारियों के बारे में जानकारी नहीं है। शहर में इनके बारे में पता लगाने की जरूरत है।

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