Exhibition : ताकते रहे गए अफसर, आपस में सेटिंग कर ठेका ले गए ठेकेदार, जानिए पूरा मामला

नुमाइश को दुधारू गाय कहा जाता रहा है। नुमाइश से बहुतों के ब्यारे-न्यारे भी होते हैं। हर किसी को इसका इंतजार रहता है। इस बार नुमाइश 19 दिसंबर से लगने जा रही है। इसके लिए अभी से गोटियां फिट करना शुरू कर दिया है।

Anil KushwahaSun, 28 Nov 2021 10:04 AM (IST)
इस बार नुमाइश 19 दिसंबर से लगने जा रही है।

अलीगढ़, जागरण संवाददाता । नुमाइश को दुधारू गाय कहा जाता रहा है। नुमाइश से बहुतों के ब्यारे-न्यारे भी होते हैं। हर किसी को इसका इंतजार रहता है। इस बार नुमाइश 19 दिसंबर से लगने जा रही है। इसके लिए अभी से गोटियां फिट करना शुरू कर दिया है। शुक्रवार से इसकी शुरुआत तहबाजारी के ठेके से हो चुकी है। ठेकेदार आपस में सेटिंग कर सस्ते में ठेका ले गए और अफसर ताकते रह गए। उम्मीद पाले बैठे थे कि ठेका दो करोड़ के पार जाएगा। क्योंकि पिछले पिछले साल जब यह ठेका 1.53 लाख में उठा तब शर्त रखी गई थी अगले से अधिक बोली लगेगी। ठेकेदार ऐसे ही पूल बनाकर काम करते रहे तो यह नुमाइश के लिए घाटे का सौदा होगा। जानकारों का मानना है कि अभी तो यह शुरुआत है। दुकान आवंट, सर्कस, झूला आदि के अभी ठेका होने हैं। पहली बार नुमाइश करा रहे अफसरों को सावधान रहना होगा।

कमाई का जरिया ही न समझा जाए

राजकीय औद्योगिक एंव कृषि प्रदर्शनी के नाम से अलीगढ़ की नुमाइश देश भर में विख्यात है। ताला उद्योग और संस्कृति की झलक भी यहां देखने को मिलती है। खेल, फिल्म, कला-संस्कृति से जुड़ी बड़ी से बड़ी शख्सियत ने अपने फन का जादू बिखेरा है। नुमाइश केवल हुल्लड बाजार का शोर शराबा नहीं है, बल्कि यहां आने वालों को तालीम और तहजीब का अहसास भी कराती है। हर किसी को इसका महत्व समझना होगा। ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन हों जो देश की साक्षी संस्कृति की झलक दिखाएं। ये भी सभी को पता है कि तड़क-भड़क के कार्यक्रमों में जितना पैसा फूंका जाता है उसके हिसाब से दर्शक भी नहीं जुट पाते। इस पर भी निगाह रखने की जरूरत है कि कोई अपनी जेब भरने के लिए नुमाइश प्रशासन को चूना न लगा पाए। बाहर से आने वाले दुकानदारों से होने वाली अवैध वसूली से भी अच्छा संदेश नहीं जाता।

खाली कुर्सी कुछ कहती हैं

उप मुख्यमंत्री का कार्यक्रम हो और उसमें भीड़ न हो ये हो ही नहीं सकता। लोग अपने आप पहुंचते हैं। शुक्रवार को सर्किट हाउस में खाली कुर्सी देखकर सब हैरान थे। इस अव्यवस्था को लकर पार्टी से लेकर व्यवस्थापक ही कठघरे में हैं। लाेग तो सवाल उठा रहे हैं कि जब भीड़ ही नहीं जुटानी थी तो इतनी कुर्सी क्यों रख दीं? इस पर भाजपाइयों को भी नजर रखी चाहिए। क्योंकि इस तरह के मौकों को विपक्ष जल्दी लपकता है। फिर सफाई देने से भी काम नहीं चलता। वैसे, उप मुख्यमंत्री ने सर्किट हाउस में हुए इस आयोजन में जिन्ना का नाम लेना नहीं भूले। उन्हें पता है कि अलीगढ़ में जिन्ना का नाम लेने का संदेश दूर तक जाता है। एएमयू की जिन्ना की तस्वीर लगी होने का सांसद सालों से विरोध करते आ रहे हैं। राजनीति भी खूब गरमाई। एक बार फिर जिन्ना का जिन्न निकल आया है।

बैनर पर फोटो

इगलास में दो दिवसीय सांसद स्पर्धा खेल प्रतियोगिता का आयोजन हुआ था। पहले दिन बैनर पर सांसद सतीश गौतम और हाथरस सांसद राजवीर दिलेर का फोटो दिखा। दूसरे दिन बैनर पर सिर्फ सांसद राजवीर दिलेर का फोटो दिखा। ब्लाक स्तरीय प्रतियोगिता में ब्लाक प्रमुख का फोटो नजर नहीं आया। चर्चा भी खूब हुई। क्योंकि इगलास सीट से हाथरस सांसद के पुत्र, मौजूदा विधायक राजकुमार सहयोगी, ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि अरुण फौजी टिकट की लाइन में है। दो दिन बाद तहसील स्तर पर हुई प्रतियोगिता में बैनर में फिर बदलाव देखने को मिला। इस बार सांसद सतीश गौतम व विधायक राजकुमार सहयोगी एक बैनर पर और हाथरस सांसद व ब्लाक प्रमुख इगलास एक बैनर पर नजर आए। वैसे, बैनर में फोटो की अदला-बदली कोई नई बात नहीं है। प्रतियोगिता के अतिथियों के अनुसार ऐसा हाेता रहता है, लेकिन चुनाव से पहले हो रही इस कसरत के मायने निकाले जा रहे हैं।

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