संतों का सानिध्य...अलीगढ़ की धरती होगी धन्य, विदेश से भी आएंगे शंत

अलीगढ़ की धरती पर महान संतों का समागम होने वाला है।

अलीगढ़ की धरती पर महान संतों का समागम होने वाला है। महान संत काठिया बाबा के चरण पड़ेंगे। 13 अप्रैल से सात दिनों तक आगरा रोड स्थित शांतिपुरम संतों के दर्शन से धन्य हो जाएगा। देश के कई हिस्सों से संतों का समागम होगा।

Sandeep Kumar SaxenaFri, 09 Apr 2021 02:58 PM (IST)

अलीगढ़, जेएनएन। श्री राधा माधव मंदिर में देव मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा का उत्सव मनाया जाएगा। ऐसे मौके पर अलीगढ़ की धरती पर महान संतों का समागम होने वाला है। महान संत काठिया बाबा के चरण पड़ेंगे। 13 अप्रैल से सात दिनों तक आगरा रोड स्थित शांतिपुरम संतों के दर्शन से धन्य हो जाएगा। देश के कई हिस्सों से संतों का समागम होगा।

यह धार्मिक कार्यक्रम शिडयूल

आगरा रोड पर शांतिपुरम स्थित श्री राधा माधव मंदिर में 13 अप्रैल को राधा-माधव की प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा होगी। श्री राधा माधव संकीर्तन एवं भक्त प्रचार ट्रस्ट की ओर से आयोजित कार्यक्रम में देश के महान संत आ रहे हैं। आयोजक भगवान स्वरुप शर्मा ने बताया कि 13 अप्रैल को सुबह सात बजे से कार्यक्रम प्रारंभ हो जाएगा। सबसे पहले विग्रह जलवास का कार्यक्रम होगा। शाम पांच बजे विग्रह भमण होगा। उसके बाद प्रसादी का वितरण होगा। फिर 14 से 18 अप्रैल तक धार्मिक आयोजनों की शुरुआत हो जाएगी। सुबह सात बजे से पूजन होगा। शाम 7.30 बजे स्वामी लवदास महाराज का प्रवचन सुनने को मिलेगा। 19 अप्रैल को प्राण आह्वान स्थापना सुबह सात से दस बजे तक होगा। प्रथम दर्शन राधा माधव एवं प्रचवन काठिया बाबा का होगा। भागवत चरित का पाठ होगा। भजन संध्या में होली गायन होगा। 

नई पीढ़ी पश्चिमी संस्कृति की ओर बढ़ रही

भगवान स्वरुप शर्मा ने बताया कि अलीगढ़ में पहली बार इतना विशाल आयोजन हो रहा है। राधा-माधव का मंदिर अपनी भव्य छटा बिखेरेगा। मंदिर को वृंदावन की तर्ज पर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राधा-माधव संकीर्तन मंडल भक्ति भाव के लिए हमेशा तत्पर रहता है। पूरे देश में संकीर्तन के माध्यम से भक्ति रस का संचार किया जाता है। भगवान दास ने कहा कि प्रभु की भक्ति के बिना कुछ नहीं है। आज नई पीढ़ी पश्चिमी संस्कृति की ओर बढ़ रही है। वह भजन-भक्ति से दूर होती जा रही है। इससे परिवारों में विकार आ रहे हैं। लोगों में मतभेद बढ़ रहा है। इंसान स्वार्थ में लिप्त होता जा रहा है। स्थिति यह हो गई है कि पड़ोसी अपने पड़ोसी की चिंता नहीं करता है। जबकि विदेशी भारतीय संस्कृति की ओर से लौट रहे हैं। वह भजन-कीर्तन में मुग्ध हो रहे हैं। इसलिए हमें भी भारतीय संस्कृति की ओर लौटना होगा। भक्ति का आनंद उठाना होगा। नई पीढ़ी को धार्मिक आयोजन में शामिल होना होगा। इसलिए कार्यक्रम में शामिल हों।

 

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