अलीगढ़ में पकड़े साइबर ठगी के अंतरराज्यीय गिरोह के झारखंड से जुड़े हैं तार Aligarh news

साइबर थाना पुलिस ने 14 सितंबर को ठगी के जिस अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए गोरखपुर के एक शातिर को दबोचा था उसके तार जामताड़ा (झारखंड) से जुड़े हुए हैं। गिरोह में देश के अलग-अलग कोने से 40 अन्य लोग भी शामिल थे।

Anil KushwahaSun, 24 Oct 2021 10:42 AM (IST)
अलीगढ़ में पकड़े साइबर ठगी के तार अंतरराज्यीय गिरोह के झारखंड से जुड़े हैं।

अलीगढ़, जागरण संवाददाता।  साइबर थाना पुलिस ने 14 सितंबर को ठगी के जिस अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए गोरखपुर के एक शातिर को दबोचा था उसके तार जामताड़ा (झारखंड) से जुड़े हुए हैं। गिरोह में देश के अलग-अलग कोने से 40 अन्य लोग भी शामिल थे। यह गिरोह फर्जीवाड़ा करके एक ही नाम से तीन-चार बहुउपयोगी सिम खरीदता था। फिर फर्जी पेटीएम एकाउंट बनाकर ठगी की जाती। इनके तार झारखंड के जामताड़ा से भी जुड़े हैं।

मामू भांजा निवासी डा पल्‍लवी के साथ हुई थी साइबर ठगी

गांधीपार्क क्षेत्र के मामू भांजा निवासी डा. पल्लवी के साथ साइबर ठगी हुई थी। शातिर ने गूगल पे कस्टमर केयर अधिकारी बनकर उन्हें झांसे में लिया और बैंक खाते से 1.34 लाख रुपये पार कर दिए। साइबर थाना में मुकदमा दर्ज करके इसकी जांच की गई। इसमें महराजगंज के नगर पंचायत निचलौल के कृष्णा नगर निवासी अफरोज अब्बासी का नाम सामने आया। पुलिस ने आरोपित अफरोज को गोरखपुर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपित अफरोज अंतरराज्यीय गिरोह का सदस्य है। ये लोग ठगी करने का अलग तरीका अपनाते हैं। इसके तहत एक ही आइडी पर तीन-चार फर्जी सिम जारी करवा लेते हैं। इसके बाद पेनटेन वेबसाइट से उसी व्यक्ति के नाम का पैन नंबर हासिल करते हैं। मोबाइल और पैन नंबर की मदद से ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) मंगाकर पेटीएम पर एक ही नंबर के तीन-चार फर्जी एकाउंट चालू कर लेते हैं। इसके बाद अानलाइन शापिंग, री-चार्ज के माध्यम से ठगी करते है। बैंक में रुपये ट्रांसफर कर लेते हैं। दो घंटे के अंदर रुपये को कैश के रूप में निकाल लेते हैं या फिर किसी फर्जी एकाउंट में सुरक्षित रख लेते हैं।

वाट्सएप पर जुड़े 40 लोग

शातिरों ने वाट्सएप पर 40 लोगों का एक ग्रुप बना रखा था। इसी ग्रुप पर ठगी के संबंध में किसी को कोई समस्या होती है तो चर्चा की जाती थी। कई बार ठगी की प्लानिंग भी ग्रुप पर होती थी। पुलिस अब इनकी तलाश में जुट गई है।

यूट्यूब से सीखा आइडिया, तीन साल में 800 एकाउंट बनाए

अफरोज बीएससी द्वितीय वर्ष का छात्र है। वर्ष 2017 से साइबर ठगी में सक्रिय है। सबसे पहले जब पेटीएम पर उसे कैशबैक मिला तो उसने एक से ज्यादा एकाउंट बनाने की सोची। इसके बाद यू-ट्यूब पर इसका तरीका सीखा। इसी बीच अानलाइन रुपये कमाने के संबंध में यू-ट्यूब पर रेफर एंड अर्न कैश बैक अाफर नाम के चैनल से जुड़ गया। यहीं से एक लिंक मिला, जिसको शेयर करने पर पैसे मिलते थे। इसके बाद अन्य लोग जुड़ते गए। फर्जी पेटीएम एकाउंट को बनाने में करीब 200 रुपये का खर्च आता था। इसे आगे 1200 रुपये तक में बेच देते थे। आठ सौ से ज्यादा एकाउंट बेच चुके हैं। 40 एकाउंट इनके पास वर्तमान में एक्टिवेट हैं।

पेटीएम एकाउंट में ट्रांसफर करवाते थे रुपये

जब आप कोई सिम खरीदने जाते हैं तो दुकानदार आपसे अंगूठा आदि एक से ज्यादा बार लगाने को कहता है। फिजिकल सत्यापन भी नहीं होता। इसी का फायदा उठाकर व्यक्ति के दस्तावेज चोरी कर लिए जाते हैं। शातिर अफरोज ऐसे ही दुकानदारों से सांठगांठ करके फर्जी कागजात ले लेता था। अफरोज इन कागजातों को अपने साथियों को देता था। उन कागजों से सिम एक्टीवेट करवाकर अफरोज को देते थे। इनसे फर्जी पेटीएम एकाउंट बना लेते थे। साथ ही फर्जी सिम से लोगों को काल करके झांसे में लेते थे। उनसे ओटीपी व नेट बैंकिंग का पासवर्ड लेकर पेटीएम एकाउंट में पैसा ट्रांसफर करवा लेते थे।

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