दो साल से सुलग रही थी गुस्‍से की आग, दो मौतों से दहल गया गांव, जानिए वजह Aligarh news

गौंडा में मामूली से विवाद के चलते शनिवार को दो मौतों से नगला बिरखू दहल गया। बुजुर्ग ने जिस पड़ोसी युवक की हत्या की उसके परिवार से मात्र एक बार कहासुनी हुई थी। दो साल पहले का यह मामला पुलिस तक पहुंच गया था।

Anil KushwahaMon, 27 Sep 2021 05:50 AM (IST)
नगला बिरखू में दो मौत के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारी लोगों से पूछताछ करते हुए।

अलीगढ़, जागरण संवाददाता। गौंडा में मामूली से विवाद के चलते शनिवार को दो मौतों से नगला बिरखू दहल गया। बुजुर्ग ने जिस पड़ोसी युवक की हत्या की, उसके परिवार से मात्र एक बार कहासुनी हुई थी। दो साल पहले का यह मामला पुलिस तक पहुंच गया था। लेकिन, बात वहीं खत्म नहीं हुई। बुजुर्ग ने एक जान लेकर खुद को भी गोली मार ली। इसके बाद देर रात उठी चीखों ने सन्नाटा तोड़ दिया। पूरा गांव जाग गया। रविवार को दिनभर पुलिस जांच में जुटी रही। तमंचा और गड़ासा बरामद करने के अलावा मामला भी दर्ज किया गया है। एतिहातन गांव में पुलिस तैनात की गई है।

दो साल पहले तक थे अच्‍छे संबंध

दो साल पहले तक 65 वर्षीय हीरालाल शर्मा और पड़ोसी चंद्रपाल सिंह उर्फ चंद्रवीर के परिवार में अच्छे संबंध थे। बताते हैं कि वर्ष 2019 में हीरालाल की गाय घर से निकल गई, जिसे चंद्रपाल के स्वजन ने अपने यहां बांध लिया। यही विवाद का कारण बन गया। दोनों परिवारों में कहासुनी सुनी। शिकायत पुलिस तक गई। समझाने पर दोनों परिवार शांत हो गए। इसके बाद चंद्रभान ने अपने घर की दीवार ऊंची करा ली, ताकि हीरालाल का घर नजर न आए। इसके बाद तो दोनों परिवार के संबंध अच्छे हो ही नहीं पाए। तनाव बना ही रहा। शनिवार की रात उसी दीवार पर नसैनी लगाकर हीरालाल चंद्रभान की छत पर गया और उसके बेटे 24 वर्षीय कृष्णा की जान ले ली। तब गांव में लोग सोए हुए थे। हर तरफ सन्नाटा था, जो कि चीखों और पुलिस की गाड़ियों के सायरन से टूटा। घटना की जानकारी होने पर सीओ इगलास अशोक कुमार, इंस्पेक्टर हरिभान सिंह राठौर के अलावा डाग स्क्वाड और फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंच गईं। सुबह आसपास के गांवों के लोगों की भी भीड़ जुट गई। सीओ ने बताया कि मामले में कृष्णा के पिता चंद्रपाल सिंह ने मुकदमा दर्ज कराया है। देर शाम कृष्णा का गांव में व हीरालाल का स्वजन ने नुमाइश मैदान में अंतिम संस्कार करा दिया।

बेहद गुस्सैल था हीरालाल

खुद को गोली से उड़ाने वाला हीरालाल स्वभाव बेहद गुस्सैल था। ग्रामीणों के अनुसार छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा होना आम बात था। इसी स्वभाव के चलते आए दिन किसी न किसी से झगड़ा होता था। पत्नी व बेटे की कई साल पहले बीमारी के चलते मौत हो गई थी। इसके बाद वह अधिक चिड़चिड़ा हो गया था। हीरालाल की चार संतानों में से तीन हैं, जो कि आटा चक्की चलाते हैं।

छिपकर बचाई जान

कृष्णा की हत्या व मां शशि देवी के घायल हो जाने के बाद के बाद कमरे मेें छिपकर अपनी जान बचाने वाले दिव्यांग भाई उमाशंकर व दीपक उर्फ दीपू ने बताया कि हीरालाल गड़ासा लेकर बेहद गुस्से में था। अगर वे नहीं छिपते तो वह उन्हें भी मार डालता। शोर-शराबे पर गांव वालों को आता देख वह बाउंड्री पार कर अपने घर चला गया। कुछ ही देर बाद गोली चलने की आवाज आई। फिर पता चला कि हीरालाल ने खुद ही गोली मार ली है। पास में ही तमंचा पड़ा हुआ था।

कट चुका था गला

पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों के अनुसार कृष्णा के गले पर गड़ासे के कई वार थे, जिससे गला कट चुका था। चेहरे पर भी गड़ासे से वार किया गया था। अत्यधिक खून बह जाने से उसकी मौत हो गई। हीरालाल के सिर में कनपटी के रास्ते तमंचे की गोली धंसी हुई मिली।

आखिर क्या बात थी?

इस घटना को लेकर हर कोई हैरान था। ग्रामीणों का कहना था कि विवाद दो साल पहले का था। ताजा कोई विवाद या टकराव भी नहीं हुआ था। सब कुछ सामान्य था, फिर आखिर ऐसी कौन सी बात हो गई कि हीरालाल आपा खो बैठाा और कृष्णा को जाकर मार डाला। फिर खुद ने भी आत्महत्या कर ली।

परिवार का पालनहार था कृष्णा

हीरालाल के हाथों मौत के घाट उतारा गया कृष्णा अपने परिवार का इकलौता पालनहार था। चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर का था और अविवाहित था। गांव में ही हेयर कटिंग की दुकान थी। बड़ा भाई उमाशंकर दिव्यांग है। वह कुछ भी कर पाने में सक्षम नहीं है। छोटा भाई दीपक उर्फ दीपू घरेलू कामों में सहयोग करता था। तीसरे नंबर की बहन गुड़िया की करीब एक साल पहले शादी हो चुकी है। पिता चंद्रपाल छोटा-मोटा ही काम करते हैं। कृष्णा की हत्या के बाद से स्वजन बेहाल हैं। पड़ाेसी हीरालाल भी खेतीबाड़ी करने के साथ ही चक्की चलाता था। हीरालाल के बेटे सोनू, मोनू व रिंकू का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि आखिर क्या हुआ कि उनके पिता ने यह कदम उठाया।

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