बड़े व अहम लक्ष्य की प्राप्ति के लिए बेसिक स्तर से शुरू की जा रही कवायद, जानिए पूरा मामला Aligarh news

स्‍कूलों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम डेवलप किया जाएगा।

बड़े-बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जमीनी स्तर या बेसिक स्तर से ही किसी भी योजना या अभियान की शुरुआत की जाती है। बेसिक मजबूत होगा तो सफलता की सीढ़ी चढ़ने में कोई दिक्कत नहीं अाती है। ऐसा ही कदम शासनस्तर से भी उठाया गया है।

Anil KushwahaMon, 17 May 2021 04:37 PM (IST)

अलीगढ़, जेएनएन । बड़े-बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जमीनी स्तर या बेसिक स्तर से ही किसी भी योजना या अभियान की शुरुआत की जाती है। बेसिक मजबूत होगा तो सफलता की सीढ़ी चढ़ने में कोई दिक्कत नहीं आती है। ऐसा ही कदम शासनस्तर से भी उठाया गया है। लक्ष्य भी ऐसा है कि जिसके लिए बेसिक स्तर से ही कवायद करनी होगी। मुहिम किसी एक वर्ग, क्षेत्र के लिए नहीं बल्कि पूरे समाज व देश की रक्षा के लिए चलाई जा रही हो तो ये काफी जरूरी होता है कि इसकी शुरुआत मजबूत हो। बाद में सफलता की सीढि़यों पर चलते हुए मंजिल तो मिल ही जाएगी। हालांकि ये मुहिम शुरू करने की जिलास्तर पर पहले ही शुरुआत कर दी गई थी लेकिन अब शासनस्तर से भी इस ओर कदम बढ़ाया गया है।

भू-गर्भ जल संचयन की मुहिम छेड़ी जाएगी

बेसिक शिक्षा विभाग की जमीन पर बने सरकारी स्कूलों की जमीन से देश ही नहीं बल्कि विश्व के सबसे बड़े व अहम अभियान यानी भू-गर्भ जल संचयन की मुहिम छेड़ी जाएगी। हालांकि जिलास्तर पर अफसरों ने पहले भी इस संबंध में तैयारी करने की बात कही थी। मगर अब शासन की ओर से भी इस ओर गंभीरता दिखाते हुए इस मुहिम को अनिवार्य रूप से किए जाने की ओर कदम बढ़ाया गया है। जिले में 1766 प्राइमरी व 733 जूनियर हईस्कूल हैं। इनमें से करीब 2000 स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। जहां बेसिक शिक्षा विभाग की काफी जमीन है। अब ऐसे स्कूलों का चिह्नांकन किया जाएगा जहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम डेवलप किया जा सके। तमाम स्कूलों में पुराने व खराब पड़े हैंडपंप व सबमर्सिबल के पास फिल्टर लगाकर बारिश के समय विद्यालय में जमा होने वाला जमीन के अंदर रिचार्ज करने को भेजा जाएगा। कुछ स्कूलों में ये व्यवस्था की भी गई है लेकिन अब शासन को भू-गर्भ संचयन की व्यवस्था हो सकने वाले स्कूलों की सूची भेजी जाएगी। प्रदेशभर के सभी जिलों के बीएसए से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। कोरोना संक्रमण काल से राहत मिलने के साथ ही इस दिशा में तेजी से कदम उठाए जाएंगे। बारिश के सीजन के आने से पहले व्यवस्थाएं चाक-चौबंद करने की अफसरों की तैयारी है।

इनका कहना है

बीएसए डा. लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि अभी से खंड शिक्षाधिकारियों से ऐसे स्कूल जहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम डेवलप हो सकता है, उनकी सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। बारिश के पानी को जमीन के नीचे रीचार्ज करने की व्यवस्था बनाने के लिए जोर-शोर से जुटा जाएगा। जल संरक्षण जीवन के लिए बहुत जरूरी है।

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