कमीशन के ‘चक्रव्यूह में फंसा दादों, हरदोई व सांकरा का विकास, जानिए मामला

गांव-देहात के विकास कार्यों में घपले-घोटाले छिपे नहीं हैं। परफोर्मेंस ग्रांट से लाभान्वित जिले की सांकरा दादों व हरदोई पंचायत का विकास कमीशन के फेर में फंस गया है। सितंबर से अब तक इन पंचायतों में दूसरे चरण के विकास कार्यों के टेंडर तक जारी नहीं हो सके हैं।

Anil KushwahaTue, 30 Nov 2021 10:45 AM (IST)
परफोर्मेंस ग्रांट से लाभान्वित जिले की सांकरा, दादों व हरदोई पंचायत का विकास कमीशन के फेर में फंस गया है।

अलीगढ़, जागरण संवाददाता। गांव-देहात के विकास कार्यों में घपले-घोटाले किसी से छिपे नहीं हैं। परफोर्मेंस ग्रांट से लाभान्वित जिले की सांकरा, दादों व हरदोई पंचायत का विकास कमीशन के फेर में फंस गया है। सितंबर से अब तक इन पंचायतों में दूसरे चरण के विकास कार्यों के टेंडर तक जारी नहीं हो सके हैं। वहीं, पहले चरण में ढाई करोड़ के 31 निर्माण कार्य भी आधे अधूरे पड़े हैं। ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक के अफसर लापरवाह बने हुए हैं। इसी के चलते जिला विकास में पिछड़ रहा है।

जिले में पहली बार बड़े स्‍तर पर मिला बजट

प्रदेश सरकार ने विकास में पिछड़ी ग्राम पंचायतों को माडल के रूप में विकसित करने के लिए परफोर्मेंस ग्रांट से लाभान्वित किया गया है। प्रदेश में अलीगढ़ समेत 16 जिलों का इसमें चयन हुआ है। जिले में बिजौली ब्लाक की सांकरा, हरदोई एवं दादों को इसमें शामिल किया गया। इन तीनों पंचायतों के लिए कुल 40 करोड़ की धनराशि आवंटित हुई है। जिले में पहली बार ग्राम पंचायतों को इतने बड़े स्तर पर बजट मिला है। एक साल से इन पंचायतों में विकास कार्यों की तैयारी चल रही है। सर्वे के माध्यम से विकास कार्यों का चयन हुआ है। चरणों में इन विकास कार्यों को पूरा किया जा रहा है।

अगस्त से हुई शुरुआत

अगस्त से पहले चरण के विकास कार्यों की शुरुआत हुई। कुल ढाई करोड़ की लागत से 31 कामों को इसमें शामिल किया गया। 25 अगस्त को टेंडर जारी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो गए, लेकिन निर्माण के कुछ दिन बाद ही ग्राम पंचायतों से शिकायत मिलनी शुरू हो गईं। लोगों ने गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए। सीडीओ अंकित खंडेलवाल ने इस पर जांच कराई तो आरोप सही मिले। ऐसे में 78 लाख के घटिया कामों को श्रमदान घोषित करते हुए तीन ठेकेदारों को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया।

टेंडर ही नहीं हुए जारी

पहले चरण के काम जांच के बाद से ही आधे अधूरे पड़े हैं। वहीं, सितंबर में दूसरे चरण के कामों के टेंडर भी फंस गए है। चार करोड़ की लागत से 70 कामों के टेंडर प्रक्रिया की 25 सितंबर से शुरुआत होनी थी, लेकिन शुरुआत से ही यह विवादों में फंस गए। आरोप के लगे कि कमीशन के चलते पंचायतों से ठेकेदारों को टेंडर ही नहीं मिल रहे हैं। तब से अब तक इनका समय आगे बढ़ रहा है, लेकिन टेंडर जारी नहीं हो सके। कमेटी भी इन टेंडरों की देरी को लेकर कोई निर्णय नहीं ले पा रही है। इसी के चलते जिला सूबे की चयनित 16 जिलों में सबसे पीछे पिछड़ रहा है।

यह हैं कमेटी में शामिल

परफोर्मेंस ग्रांट की निधि के टेंडर के लिए 10 सदस्यीय कमेटी बनी हुई है। इसमें डीडीओ, डीपीआरओ, प्रधान, सचिव के अलावा जल निगम, पीडब्ल्यूडी व आरईडी के अधिशासी अभियंता व शिक्षा विभाग के कोषागार अधिकारी शामिल हैं। इस कमेटी को दूसरे चरण में हरदोई के 20, दादों के 34 व सांकरा के 16 टेंडर करने हैं।

यह है कमीशन का चक्रव्यूह

बजट की भरमार के चलते परफोर्मेंस ग्रांट से लाभान्वित पंचायतों में इन दिनों कमीशन का सबसे बड़ा खेल चल रहा है सूत्रों का दावा है कि ग्राम पंचायत से लेकर ब्लाक तक के अफसर इसमें लगे हुए हैं। निर्माण कार्यों के लिए स्वीकृति धनराशि में से 30 से 35 प्रतिशत तक का बजट इन्हीं लोगों के कमीशन में बंट जाता है। इसी के चलते निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नहीं आती है। ठेकेदार भी अधिक कमीशन की मांग के चलते यहां पर निर्माण कार्य लेने से बच रहे हैं। इसी के चलते यह देरी हो रही है।

इनका कहना है 

परफोर्मेंस ग्रांट से लाभान्वित पंचायतों में टेंडर जारी करने के लिए एक कमेटी बनी हुई है। इसी कमेटी के हस्ताक्षरों से टेंडर दिए जाते हैं। सुस्त काम के लिए ग्राम पंचायत सचिवों का जवाब तलब किया गया है। संतोष जनक जवाब न मिलने पर इनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।

धनंजय जायसवाल, डीपीआरओ

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

Tags
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.