स्वच्छता की मुहिम पर चढ़ा भक्ति का रंग, साफ हो गया अचल सरोवर Aligarh news

पौराणिक सरोवर होने के चलते इसे साफ करने के लिए हजारों हाथ उठ खड़े हुए।

क्या आप सोच सकते हैं कि स्वच्छता के लिए मुहिम चलाई जाए और भक्ति का रंग चढ़ जाए। मुहिम में जुड़े लोग भक्ति रस के आनंद में डूब जाएं। स्वच्छता अभियान ऐसा रंग लाया कि वह संकीर्तन से जुड़ गया।

Anil KushwahaMon, 01 Mar 2021 12:59 PM (IST)

अलीगढ़, जेएनएन : क्या आप सोच सकते हैं कि स्वच्छता के लिए मुहिम चलाई जाए और भक्ति का रंग चढ़ जाए। मुहिम में जुड़े लोग भक्ति रस के आनंद में डूब जाएं। अलीगढ़ में ऐसा ही कुछ हुआ। स्वच्छता अभियान ऐसा रंग लाया कि वह संकीर्तन से जुड़ गया। छह वर्षों से लगातार संकीर्तन चल रहा है और स्वच्छता की भी अलख जगाई जा रही है। 


छह वर्षों से चल रहा अभियान

शहर के बीचो-बीच स्थित पौराणिक स्थल अचल सरोवर गंदगी से भरा हुआ था। सरोवर को स्वच्छ बनाने के लिए वर्ष 2014 में अचल सरोवर, अटल धरोहर अभियान प्रारंभ किया गया। पौराणिक सरोवर होने के चलते इसे साफ करने के लिए हजारों हाथ उठ खड़े हुए। हर कोई सरोवर से गंदगी निकालने के लिए जुट गया। स्वच्छता की कमान अचल सरोवर रक्षक दल ने संभाली। इसी के साथ प्रत्येक रविवार को कीर्तन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिससे भक्ति रस का आनंद सभी को मिलता रहे और स्वच्छता का यह अभियान अनवरत चलता रहे। यह कड़ी धीरे-धीरे बढ़ती चली गई और संकीर्तन में परिवर्तित होती चली गई। 

हर रविवार को होती है परिक्रमा

प्रत्येक रविवार को सुबह छह बजे संकीर्तन के साथ अचल सरोवर की परिक्रमा लगाई जाती है। इसमें अचल सरोवर रक्षक दल के सदस्य बड़े ही उत्साह के साथ भाग लेते हैं। भक्ति के आनंद में वह झूमते और नृत्य करते हुए चलते हैं। उनका कहना है कि यदि संकीर्तन का यह कार्यक्रम नहीं चलता तो अचल का स्वच्छता अभियान न जाने कब थम गया होता। संकीर्तन के माध्यम के चलते ही छह वर्ष से यह अभियान चल रहा है। 

भक्ति में है शक्ति 

श्री गिलहराज महाराज मंदिर के महंत योगी कौशलनाथ का कहना है कि भक्ति में बड़ी शक्ति होती है। भक्ति के साथ कोई भी कार्य किया जाता है तो उसमें सफलता जरूर मिलती है। सनातन संस्कृति में किसी भी बड़े कार्य का शुभारंभ धार्मिक कार्यों से होता है। पूजा-अनुष्ठान से ही कार्य की सफलता होती है। इसलिए अचल सरोवर अभियान भी सफल हुआ। कौशलनाथ ने कहा कि स्वच्छता का इतना लंबा अभियान नहीं चल सकता था। प्रतिदिन साफ-सफाई से लोग ऊब जाते और अचल पर उनका आना नहीं हो पाता। मगर, संकीर्तन के माध्यम से लोगों के अंदर जागरूकता बनी रही और लोग स्वच्छता की आज भी अलख जगाए हुए हैं। 

बन गया कारवां 

दल की महिला प्रमुख कृष्णा गुप्ता ने कहा कि अचल सरोवर अभियान की जब शुरुआत हुई थी तो यह नहीं पता था कि यह इतना लंबा चलेगा। हम लोगों ने सोचा था कि बस चंद दिनों में ही यह अभियान सिमट जाएगा, मगर धीरे-धीरे यह लंबा कारवां बन गया। छह साल से हम लोग लगातार परिक्रमा लगा रहे हैं। यहां तक की कोरोना के समय भी कोई न कोई प्रभु का नाम लेकर भ्रमण कर लिया करता था। इससे हमारी छह साल की लंबी तपस्या भंग नहीं हुई। कृष्णा गुप्ता ने कहा कि भक्ति के साथ कोई भी कार्यक्रम शुरू करेंगे तो उसमेें सफलता जरूर मिलेगी।

आनंद की होती है बारिश 

डा. सुवीर राय ने कहा कि रविवार को अचल पर आकर मन प्रसन्न हो जाता है। संकीर्तन में आनंद की बारिश होती है। हम लोग पहले स्वच्छता अभियान से जुड़े हुए थे। उसके बाद संकीर्तन का कार्यक्रम चला। तमाम लोगों ने सवाल उठाए कि स्वच्छता के कार्यक्रम में संकीर्तन क्यों? मगर, अब लोगों को पता चला कि धार्मिक कार्यक्रम ने ही हम लोगों के अंदर जनचेतना पैदा कर रखी है। संकीर्तन के चलते प्रत्येक रविवार को कदम अपने आप अचल की ओर बढ़ जाते हैं। यहां पर भजन में हर कोई झूम उठता है। मगर, सभी का संकल्प रहता है कि अचल को और सुंदर बनाना है। 

एकजुटता में है शक्ति 

लक्ष्मीराज सिंह का कहना है कि एकजुटता में बहुत शक्ति होती है। हम सभी ने अचल को साफ-सुथरा बनाने के लिए दिन रात मेहनत की। अभियान के समय तो लोग अचल सरोवर में भीषण गंदगी में उतर जाया करते थे। किसी के हाथ में फावड़ा होता था तो किसी के हाथ में झाड़ू। कोई बड़े से डंडे से अचल में तैरती हुई पालीथिन को खींचने का प्रयास करता था। गंदे पानी में भी घुसकर सफाई करने से लोग पीछे नहीं हटे। सभी का मकसद था कि अचल साफ-सुथरा हो। लक्ष्मीराज सिंह ने कहा कि यह सब संकीर्तन के माध्यम से हो पाता था। क्योंकि इससे हर किसी का जुड़ाव हो गया था, इसी के माध्यम से लोग सफाई करने आ जाया करते थे और सफाई में एकजुट होकर जुट जाया करते थे। इसलिए एकजुटता में बहुत शक्ति होती है।  

हर काम में ले आनंद 

क्षमा गुप्ता ने कहा कि जीवन में कोई भी काम करें, उसमें आनंद ढूंढे। स्वच्छता का काम भी आनंद से भरा हो सकता है यह किसी ने सोचा नहीं था, मगर अचल सरोवर के अभियान ने यह साबित करके दिखा दिया। वरना गंदगी से लोग दूर भागते। मगर, अचल अभियान में लोग सरोवर में ही उतर पड़े और साफ-सफाई में जुट गए। क्षमा कहती हैं कि कीर्तन की ही ताकत थी कि महिलाएं भी अचल को साफ करने के लिए उतर पड़ी। सुबह का समय होता था। घर के काम-काज की उन्हें चिंता नहीं रहती थी, बस अचल को कैसे साफ-सुथरा किया जाए, इसके बारे में सभी का प्रयास रहता था और उसमें सफलता मिली। योगेश गुप्ता ने कहा कि अचल सरोवर के अभियान में संकीर्तन ने हम सभी के अंदर एक नई चेतना जाग्रत की, जिसके चलते हम सभी आज भी सक्रिय बने हुए हैं। 

भक्ति मार्ग है हर सफलता का सूत्र 

भक्ति में रमे पुनीत वाष्र्णेय बंटी ने कहा कि भक्ति मार्ग ही हर सफलता का सूत्र है। भक्ति का मतलब होता है किसी भी कार्यक्रम में रम जाना। अचल सरोवर अभियान में ऐसा ही हुआ। सभी भक्ति में रम गए। सफाई करते समय कोई भजन गुनगुनता था तो कोई आनंद के रस में डूब जाता था। जैसे लगता था कि सफाई नहीं बल्कि प्रभु की भक्ति की जा रही है। हेमंत सिंह ने कहा कि बड़े-बड़े काम भक्ति मार्ग से सिद्ध हुए, स्वच्छता का भी यह अभियान भक्ति मार्ग से सफल हुआ। 

जीत निश्चित होगी 

मोहन लाल वर्मा ने कहा कि यदि आपके अंदर विश्वास है। आप भगवान को मानते हैं। आस्था और विश्वास से भरे हुए हैं तो आपको सफलता जरूर मिलेगी। अचल सरोवर अभियान में भी ऐसा ही हुआ। इससे जुड़ने वाला हर शख्स आस्था और विश्वास से भरा होता था। उसने यह ठान लिया था कि अचल को साफ करके मानेंगे। इसलिए इसमें से 1500 ट्राली के करीब कूड़ा निकाला गया। 10 हजार से अधिक लोग इस अभियान में जुटे। लगातार पांच महीने तक अभियान चला। अब संकीर्तन के माध्यम से हम सभी फिर जुटे हुए हैं। कैलाश ने कहा कि अचल पर जब एक साथ कीर्तन करते हैं तो मानों लगता है कि यहां ब्रज की बारिश हो रही है, ऐसा आनंद कहीं और नहीं मिलता है। जितेंद्र ने कहा कि प्रभु की भक्ति से बड़ा मंत्र कोई नहीं है। भक्ति में डूबकर देखिए, हर जगह आपको सफलता मिलेगी।

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