अलीगढ़ में संदिग्ध मरीज फैला रहे संक्रमण, झोलाछाप बन रहे मौत का कारण

सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार समेत अन्य संक्रामक बीमारियों का भी है।

सर्दी खांसी जुकाम बुखार समेत अन्य संक्रामक बीमारियों का भी है। कोई घर ऐसा नहीं है जिसमें मरीज न हों। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की लाइन लगी है। कुछ लोग इलाज के लिए विशेषज्ञ या डिग्रीधारक डॉक्टरों की बजाय झोलाछापों की शरण में पहुंच रहे हैं।

Sandeep Kumar SaxenaWed, 21 Apr 2021 03:54 PM (IST)

अलीगढ़, जेएनएन। जिले में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। यह सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार समेत अन्य संक्रामक बीमारियों का भी है। कोई घर ऐसा नहीं है, जिसमें मरीज न हों। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की लाइन लगी है। कुछ लोग इलाज के लिए विशेषज्ञ या डिग्रीधारक डॉक्टरों की बजाय झोलाछापों की शरण में पहुंच रहे हैं। यहां इलाज तो दूर उनकी ठीक स्क्रीनिग भी नहीं हो पा रही है। मरीज अपनी सेहत और बिगाड़ रहे हैं। कुछ लोग तो मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदकर खुद अपना इलाज करने में लगे हैं। ऐसे तमाम मरीजों की तबीयत बिगड़ने पर कोविड केयर सेंटर लाया जा रहा है। कई मरीजों की समय से उपचार न मिल पाने से मृत्यु तक हो चुकी है। जबकि, इससे पहले ही वे न जाने कितने लोगों को संक्रमित कर चुके होते हैं। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़े ऐसी ही लापरवाही की ओर इशारा कर रहे हैं। मंगलवार को रिकार्ड 215 मरीज संक्रमित पाए गए थे। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को कोई भी लक्षण दिखने पर सरकारी अस्पताल में आकर जांच कराने की सलाह दी है। 

एक जैसे लक्षण 

मौसमी वायरल व कोरोना के कुछ लक्षण एक जैसे हैं। इस समय ऐसे सभी मरीजों की पूरी गंभीरता व सावधानी के साथ स्क्रीनिग बहुत जरूरी है। यदि बुखार से पीड़ित कोरोना संक्रमित मरीज की पहचान नहीं हो पाई तो उसकी ही नहीं, अन्य लोगों की जिंदगी को भी खतरा है। ऐसे मरीज को झोलाछाप बिना जांच के ही सामान्य दवा खिलाते रहते हैं। कई बार मरीज के दूसरे लक्षण की अनदेखी होना सामान्य है। कोरोना संक्रमित ऐसे तमाम मरीज बाद में दीनदयाल अस्पताल या अन्य कोविड केयर सेंटरों में भर्ती हुए। कई की तो बीमारी ही बढ़ गई। शहर से लेकर देहात तक झोलाछापों की नई फौज पैदा हो गई है। 

सीएमओ डॉ. बीपीएस कल्याणी ने बताया कि यह समय बेहद सावधानी बरतने का है। कोरोना के साथ अन्य बीमारियों का प्रकोप भी शुरू हो गया है। इधर-उधर इलाज कराने की बजाय नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र, अस्पताल में ही जाएं, ताकि उन्हें बीमारी के अनुसार ही उचित इलाज मिल सके। 

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