कड़े संघर्ष से मिली सफलता तो छाई ‘मुस्कान’ जानिए पूरा मामला Aligarh news

कड़े संघर्ष के बाद सफलता मिले तो खुद व स्वजन के चेहरे पर मुस्कान खिल ही जाती है। यूपी सीनियर क्रिकेट टीम की कमान जिले की बालिका क्रिकेटर मुस्कान मलिक के हाथों में आई है। उनकी सफलता ने जिले की बालिका क्रिकेट प्रतिभाओं को प्रेरित करने का काम किया है।

Anil KushwahaWed, 20 Oct 2021 11:46 AM (IST)
यूपी सीनियर क्रिकेट टीम की कमान जिले की बालिका क्रिकेटर मुस्कान मलिक के हाथों में आई है।

अलीगढ़, जागरण संवाददाता। कड़े संघर्ष के बाद सफलता मिले तो खुद के व स्वजन के चेहरे पर मुस्कान खिल ही जाती है। यूपी सीनियर क्रिकेट टीम की कमान जिले की बालिका क्रिकेटर मुस्कान मलिक के हाथों में आई है। उनकी इस सफलता ने जिले की बालिका क्रिकेट प्रतिभाओं को प्रेरित करने का काम किया है। 2017 में पैर में फ्रेक्चर होने के बाद एक साल तक मैदान से दूर रहने के बाद मुस्कान कड़ी मेहनत कर वापसी कर यूपी की टीम में चयन कराने का कारनामा कर चुकी हैं। जमालपुर निवासी 19 वर्षीय मुस्कान जिले की पहली बालिका क्रिकेटर हैं जो यूपी क्रिकेट टीम की कप्तानी करेंगी।

आठ साल की उम्र से क्रिकेट खेलना शुरू किया

मुस्कान ने बताया कि उन्होंने आठ वर्ष की उम्र से क्रिकेट सीखना शुरू किया था। पहले हमजा क्रिकेट अकादमी से प्रशिक्षण लिया, फिर अब्दुल क्रिकेट अकादमी से भी जुड़ीं। अब पिछले करीब तीन साल से अलीगढ़ क्रिकेट स्कूल में प्रशिक्षण ले रही हैं। बताया कि 15 अक्टूबर को वे सीनियर क्रिकेट टीम चयन के ट्रायल के लिए कानपुर के लिए रवाना हुई थीं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने क्रिकेट के गुरुजनों को दिया। पिता शाहिद मलिक डेयरी संचालक व मां अनीसा गृहणी हैं। उनके कोच मसूद उज जफर अमीनी ने बताया कि मुस्कान दाहिने हाथ की बल्लेबाज होने के साथ बेहतरीन विकेटकीपर भी हैं। ये उनकी मेहनत का परिणाम है।

भाई ने छोड़ा बहन ने बढ़ाया कारवां

मुस्कान के भाई राशिद भी क्रिकेटर रहे हैं। 2014 में उन्होंने क्रिकेट से किनारा किया तो बहन मुस्कान ने पूरी तरह से क्रिकेट में पैर जमा दिए। राशिद ने बताया कि 2019 में मुस्कान ने यूपी अंडर-19, यूपी अंडर-23 और यूपी सीनियर क्रिकेट टीम में शामिल होकर मुकाबले खेले थे। 2020 में वे दुबई में हुए महिला क्रिकेट के आइपीएल टूर्नामेंट में खेलने के लिए चयनित की गई थीं। अब मुस्कान एक नवंबर से नागपुर में रणजी ट्राफी गल्र्स में बतौर कप्तान प्रतिभाग करेंगी।

2017 में फ्रेक्चर ने थाम दी थी उम्मीदें

भाई राशिद ने बताया कि 2017 में मैदान पर फील्डिंग के दौरान मुस्कान के दाहिने पैर में फ्रेक्चर हो गया था। उसमें तीन हडि्डयां टूटी थीं। एक साल तक वो मैदान से दूर रही। तब उसको भी लग रहा था कि क्रिकेट में आगे की राह थम न जाए। मगर ठीक होकर वो दोबारा मैदान पर लौटी और जी-तोड़ मेहनत कर आगे बढ़ी और यूपी टीम में चयन कराया।

मुस्कान को भी नहीं पता लगा

मुस्कान ने बताया कि टीम चयन का मैच खेलने के बाद थकान हो गई। खाना खाने के बाद वे सोने चली गईं। देर रात टीम की घोषणा की गई। इसके बारे में उनको भी मंगलवार सुबह जानकारी हो सकी। तब सुबह अलीगढ़ फोन करके भाई को जानकारी दी।

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