बस चालकों के चरित्र को छिपा रहे स्कूल संचालक, सत्यापन से बना रहे दूरी, आखिर क्यों?

परिवहन विभाग ने स्कूली वाहनों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए वाहन चालकों का चरित्र प्रमाण पत्र मांगा है। स्कूल संचालक बस चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी डाटा व चरित्र प्रमाण पत्रों को देने में आना-कानी कर रहे हैं।

Anil KushwahaPublish:Wed, 01 Dec 2021 11:51 AM (IST) Updated:Wed, 01 Dec 2021 11:55 AM (IST)
बस चालकों के चरित्र को छिपा रहे स्कूल संचालक, सत्यापन से बना रहे दूरी, आखिर क्यों?
बस चालकों के चरित्र को छिपा रहे स्कूल संचालक, सत्यापन से बना रहे दूरी, आखिर क्यों?

अलीगढ़, जागरण संवाददाता।  परिवहन विभाग ने स्कूली वाहनों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए वाहन चालकों का चरित्र प्रमाण पत्र मांगा है। स्कूल संचालक बस चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी डाटा व चरित्र प्रमाण पत्रों को देने में आना-कानी कर रहे हैं। परिवहन विभाग ने करीब तीन माह पहले शासन के निर्देश पर यह डाटा मांगा था। अब डीएम के निर्देश पर विद्यालय संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। दो बार उनको सूचना देने के लिए नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। शासन के निर्देशों की अवहेलना करने का इनको दोषी माना जाएगा। विद्यालय संचालकों को आखिरी बार एक सप्ताह का और समय दिया गया है।

चालकों का उपलब्ध कराना है पूरा डाटा

स्कूल संचालकों से वाहन चालकों के चरित्र प्रमाण पत्र के साथ ही उनकी शैक्षिक योग्यता आदि की जानकारी मांगी गई है। संबंधित डाटा हर हाल में भेजना अनिवार्य है। पिछले दिनों डीएम की अध्यक्षता में हुई सड़क सुरक्षा सप्ताह की बैठक में भी इस बात को रखा गया था। डीआइओएस व बीएसए को इस मामले में विद्यालय संचालकों को नियमों के पालन के लिए निर्देशित करने को कहा गया है।

नहीं कराया सत्यापन

एआरटीओ प्रवर्तन अमिताभ चतुर्वेदी ने बताया कि प्राथमिक शिक्षा के सीबीएसई व हिंदी माध्यम के कुल 175 स्कूल हैं। जिनमें से 32 ने अपने चालकों के डीएल का सत्यापन कराया है। सिर्फ 13 ने चरित्र प्रमाण पत्र जमा किए हैं। माध्यमिक शिक्षा,सीबीएसई व हिंदी माध्यम के 98 स्कूल हैं। इनमें 19 ने अपने चालकों के डीएल का सत्यापन कराया है। 79 स्कूलों ने वाहन चालकों का सिर्फ चरित्र प्रमाण पत्र जमा किया है। उच्चाशिक्षा के 47 शैक्षणिक संस्थानों में से सिर्फ एक ने ही डीएल का सत्यापन कराया है। चरित्र प्रमाण पत्र अभी तक किसी ने भी नहीं दिया है। इस रिकार्ड को डीएम की बैठक में पेश भी किया गया है। डीएम ने निर्देश दिए हैं कि जो भी स्कूल संचालक डाटा उपलब्ध कराने में आनाकानी कर रहे हैं या जिनके पास डाटा मौजूद ही नहीं है उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।