आउटसोर्सिंग कर्मियों के वेतन में धांधली, साठगांठ का आरोप, जानें-पूरा मामला

आउटसोर्सिंग से कर्मचारियों की नियुक्ति पर सरकार ने रोक लगा दी है क्योंकि सेवा प्रदाता कंपनियों की ओर से कर्मचारियों के उत्पीड़न की तमाम शिकायतें मिलती रही हैं। हैरानी की बात है कि आकस्मिक स्थिति में आउटसोर्सिंग से रखे गए कर्मचारियों के वेतन में भी खूब धांधली हो रही है।

Anil KushwahaWed, 01 Dec 2021 09:07 AM (IST)
आउटसोर्सिंग से कर्मचारियों की नियुक्ति पर सरकार ने रोक लगा दी है।

अलीगढ़, जागरण संवाददाता। आउटसोर्सिंग से कर्मचारियों की नियुक्ति पर सरकार ने रोक लगा दी है, क्योंकि सेवा प्रदाता कंपनियों की ओर से कर्मचारियों के उत्पीड़न की तमाम शिकायतें मिलती रही हैं। हैरानी की बात ये है कि आकस्मिक स्थिति में आउटसोर्सिंग से रखे गए कर्मचारियों के वेतन में भी खूब धांधली हो रही है। ऐसे ही मामला स्वास्थ्य विभाग में सामने आया है। सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा कर्मचारियों के वेतन से खूब कटौती की जा रही। कर्मचारियों को यह भी नहीं बताया जा रहा कि किस मद में कितनी राशि काटी जा रही है। अफसरों से शिकायत के बाद भी समाधान नहीं हो रहा। ऐसे कर्मचारियों की संख्या 50 से अधिक बताई जा रही है।

ये है मामला

आरटीआइ कार्यकर्ता अविनाश कुमार ने पिछले दिनों श्रमायुक्त को एक शिकायती पत्र भेजा। अविनाश ने बताया कि विभिन्न पदों पर गुजरात की कवच सिक्योरिटी सर्विस से अनुबंध के तहत कर्मचारी रखे गए हैं। इनके वेतन से हर माह आंशिक रूप से अवैध कटौती कर आर्थिक शोषण हो रहा है। कंप्यूटर आपरेटर को 12 हजार की बजाय सात हजार, लैब टेक्नीशियन को 17 हजारकी बजाय 11 हजार, वार्ड ब्याय को सात हजारकी बजाय 4800 रुपये ही दिए जा रहे हैं। यह जांच का विषय है कि कर्मचारियों के वेतन से इतनी कटौती किस आधार पर की जा रही है।

ईपीएफ में भी गोलमाल

आरोप है कि कंपनी, विभाग को जो बिल उपलब्ध करा रही है, उसमें मासिक भुगतान पर जीएसटी 400 रुपये ही दर्शाई जा रही है। कर्मचारियों के वेतन से कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के नाम पर कितनी धनराशि की कटौती की जा रहा है। इससे साफ है कि ईपीएफ में गोलमाल चल रहा है, जिसकी जांच कराई जानी जरूरी है। कर्मचारियों को दिए गए कार्यादेश में भी मासिक भुगतान व कटौती के संबंध में कोई उल्लेख नहीं किया गया है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा कर्मचारियों को दिए जा रहे भुगतान व कटौती की जांच की जाए, ताकि उन्हें आर्थिक शोषण से मुक्ति मिल सके।

इनका कहना है

मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है। मेरे कार्यकाल में आउटसोर्सिंग से कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हुई है। यदि पूरा वेतन कंपनी नहीं दे रही तो इसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

- डा. आनंद उपाध्याय, सीएमओ

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