नेपाली क्रांतिकारी आंदोलन का प्रणेता रहे रेणु की रगों में रची बसी थी हिंदी, जानिए पूरा मामला Aligarh news

संस्था के सदस्यों, शिक्षकों व विद्यार्थियों ने मिलकर फणीश्वरनाथ के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किए।

परोपकार सामाजिक सेवा संस्था द्वारा गांव तोछीगढ़ में स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिकारी साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु की जन्म शताब्दी पर विजय विद्यालय में स्कूली बच्चों को हिंदी साहित्य के प्रति जागरूक किया और श्रद्धांजलि दी। संस्था के सदस्यों शिक्षकों व विद्यार्थियों ने मिलकर फणीश्वरनाथ के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किए।

Anil KushwahaThu, 04 Mar 2021 03:16 PM (IST)

अलीगढ़, जेएनएन : परोपकार सामाजिक सेवा संस्था द्वारा गांव तोछीगढ़ में स्वतंत्रता सेनानी, क्रांतिकारी साहित्यकार फणीश्वरनाथ 'रेणु' की जन्म शताब्दी पर विजय विद्यालय में स्कूली बच्चों को हिंदी साहित्य के प्रति जागरूक किया और श्रद्धांजलि दी। संस्था के सदस्यों, शिक्षकों व विद्यार्थियों ने मिलकर फणीश्वरनाथ के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किए।

 

बिहार में जन्‍म हुआ था रेणु का

संस्था के अध्यक्ष जतन चौधरी ने उनकी जीवनी बताते हुए कहा कि फणीश्वर नाथ ' रेणु ' का जन्म चार मार्च 1921 को बिहार राज्य के पूर्णिया जिले के औराही हिंगना गांंव में हुआ था। उनकी शिक्षा भारत और नेपाल में हुई। जिसके बाद वे स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। 1950 में नेपाली क्रांतिकारी आंदोलन में भी हिस्सा लिया जिसके परिणामस्वरुप नेपाल में जनतंत्र की स्थापना हुई। वे आंचलिक कथाकार के रूप में विख्यात हुए। भारत सरकार द्वारा रेणु को पद्मश्री अलंकरण से विभूषित किया गया।

 

काव्‍यपाठ का आयोजन

ठुमरी, लाल पान की बेगम, मैला आंचल, परती परिकथा, जूलूस, दीर्घतपा, कितने चौराहे, पलटू बाबू रोड आदि कृतियां लिखीं इनमें से 'मारे गए गुलफाम' नामक कहानी पर 'तीसरी कसम' फिल्म भी बन चुकी है।

कवियत्री राधा चौधरी ने भी काव्यपाठ के माध्यम से श्रद्धांजलि दी। ग्राम्यजीवन के विविध पहलुओं को सफलता के साथ उजागर करने के कारण वातावरण में सार्वत्रिक गुण मिलते हैं। इनका देहावसान 11 अप्रैल 1977 को हुआ था। हिंदी प्रवक्ता विनोद कुमार ने कहा कि उनकी कहानी ग्रामीण अंचल से प्रभावित थीं और इनमें सामान्य जनमानस का चित्रण चार चांद लगा देता है।

हिंदी के विकास की ली शपथ

कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रधानाचार्य देवेन्द्र कुमार ने सभी को हिंदी साहित्य का यथा संभव  समुचित विकास करने की शपथ दिलाते हुए कहा कि हिंदी केवल भाषा ही नहीं बल्कि हमारी संस्कृति है। कार्यक्रम को संजना शर्मा व खुशी ने भी संबोधित किया। संचालन अखिलेश यादव ने किया। इस मौके पर गुलाब सिंह, कंचन सिंह, योगेश सेंगर, संजीव कुमार सिंह, उमराव सिंह, दुष्यंत चौधरी, गिर्राज किशोर शर्मा, अजय कुमार शर्मा, प्रमोद कुमार, विजय प्रकाश, जगवीर सिंह, शैलेन्द्र कुमार, सुखपाल सिंह, डॉली, तनू, काजल, मुस्कान, कीर्ती, कुमकुम, शिवानी, पूनम, साधना, सूरज आदि मौजूद रहे।

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