इसी कॉलेज में पढ़ाई की थी राजा महेंद्र प्रताप ने, फिर बनाई अफगानिस्तान में अपदस्थ सरकार Aligarh news

सैयद अहमद खां कभी नौरंगीलाल राजकीय इंटर कॉलेज से काफी प्रभावित थे।

875 में एक मदरसे के रूप में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की नींव रखने के वाले सर सैयद अहमद खां कभी नौरंगीलाल राजकीय इंटर कॉलेज से काफी प्रभावित थे। इस कॉलेज के बेहतर शैक्षणिक माहौल को देखते हुए उन्होंने अपने पुत्रों को इसी कॉलेज में पढ़ाया था।

Publish Date:Wed, 02 Dec 2020 09:20 AM (IST) Author: Anil Kushwaha

गौरव दुबे, अलीगढ़ : 1875 में  एक मदरसे के रूप में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की नींव रखने के वाले सर सैयद अहमद खां कभी  नौरंगीलाल राजकीय इंटर कॉलेज से काफी प्रभावित थे। इस कॉलेज के बेहतर शैक्षणिक माहौल को देखते हुए उन्होंने अपने पुत्रों को इसी कॉलेज में पढ़ाया था। मुरसान नरेश राजा महेंद्र प्रताप भी इस कॅालेज के छात्र रहे। बाद में मोहम्मडन एंग्लो कॉलेज की स्थापना होने के बाद राजा सर सैयद के कॉलेज में पढ़ने लगे। देश को आजाद देखने का सपना पाले राजा ने बाद में अफगानिस्तान में अपदस्थ  सरकार भी बनाई।

कॉलेज का कोई सानी नहीं

लगभग डेढ़ शताब्दी बाद भी आाज भी नौरंगीलाल राजकीय इंटर कॉलेज का कोई सानी नहीं हैं। यह कॉलेज मंडल व प्रदेशभर में जिले का नाम रोशन कर रहा है। यहां से पढ़कर निकले पूर्व छात्र कमिश्नर, न्यायाधीश, आइजी, डीआइजी से लेकर श्रम आयुक्त समेत तमाम पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं व कुछ अभी भी दे रहे हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल होने वाले मंडल के पहले राजकीय कॉलेज का तमगा भी इस कॉलेज के माथे पर लगा। वहीं एनसीसी विंग की शुरुआत करने वाला भी ये मंडल का पहला राजकीय कॉलेज बन नाम चमका रहा है। 1852 में बारहद्वारी क्षेत्र में अंग्रेजी हुकूमत में इस कॉलेज की नींव रखी गई थी। 1854 मेें इसे सिविल लाइंस क्षेत्र मेें घंटाघर के पास शिफ्ट किया गया जहां आज भी ये शान से चमक रहा है।

एतिहासिक नौरंगीलाल कॉलेज आज भी कर रहा मंडल का नाम रोशन

मंडलभर में 78 व केवल अलीगढ़ जिले में 35 राजकीय माध्यमिक कॉलेज हैं। मगर इन सबमें नौरंगीलाल राजकीय इंटर कॉलेज का अलग ही इतिहास है। 1852 में अंग्रेजों के बच्चों को पढ़ाने के लिए अंग्रेजी हुकूमत ने इस कॉलेज की स्थापना कराई थी। अलीगढ़ के सेठ नौरंगीलाल ने अपनी जमीन करीब 35 एकड़ जमीन इसलिए दान दी थी कि संस्थान का नाम उनके नाम पर रखा जाए। अंग्रेजों ने उनकी इस शर्त को मानते हुए इसका नाम नौरंगीलाल मिडिल स्कूल रखा था। 1852 मेें जब ये सिविल लाइंस में स्थानांतरित किया गया तब इसको हाईस्कूल की मान्यता मिली। 1878 में इस कॉलेज को कोलकाता बोर्ड से मान्यता मिली थी, क्योंकि उस समय यूपी बोर्ड की स्थापना नहीं हुई थी। 1920 में यूपी बोड बना तब इस कॉलेज को यूपी बोर्ड से मान्यता मिली। अब कक्षा छह, सात व आठवीं मेें अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई कराने वाला भी पहला राजकीय विद्यालय बनकर उभरा है।

2016 मेें क्लीन एंड ग्रीन स्कूल योजना में शामिल

2016 में नौरंगीलाल कॉलेज को क्लीन एंड ग्रीन योजना के तहत स्मार्ट कॉलेज बनाने के लिए चयनित किया गया। खेल का मैदान व पार्क स्थापित किया गया। आरओ वॉटर चिलर प्लांट, सबमर्सिबल, अत्याधुनिक फर्नीचर, हाइटेक लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं से लैस करने के कदम बढ़ाए गए। 10 लाख रुपये से कॉलेज में इंटर लॉकिंग सड़क का निर्माण भी कराया गया। 

2018 से शुरू हुई अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई

नौंरगीलाल कॉलेज प्रदेश का ऐसा पहला राजकीय कॉलेज 2018 में बन गया था, जहां अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई की व्यवस्था शुरू की गई। 2018 में यहां अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं चलाना शुरू हुईं। 2019 में छठवीं के बच्चे पास होकर सातवीं में आए तो सातवीं की भी अंग्रेजी माध्यम पढ़ाइ शुरू हो गई। अब आठवीं की पढ़ाई भी अंग्रेजी माध्यम से कराई जानी शुरू की गई है।

2020 में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल

2020 में नौरंगीलाल राजकीय इंटर काॅलेज पहला राजकीय कॉलेज बना जिसको स्मार्ट सिटी योजना के तहत चमकाने के लिए चयनित किया गया। कमिश्नर जीएस प्रियदर्शी की अोर से इस कॉलेज को स्मार्ट सिटी योजना के तहत शामिल किया गया है। इसके तहत यहां जीर्णोद्धार का काम, मल्टीस्टोरी कांप्लेक्स, स्मार्ट क्लास, पुस्तकालय, आधुनिक शौचालय, सोलर प्लांट आदि के काम कराए जाएंगे।

पुराना रुतबा दिलाना है वापस

प्रधानाचार्य शीलेंद्र यादव ने कहा कि, पुराने में समय में नौरंगीलाल कॉलेज में दाखिला लेना एएमयू में दाखिला लेने सरीखा हुआ करता था। इसमेें दाखिले के लिए प्रशासन, शासन स्तर तक से सिफारिशें आती थीं। एक बार फिर इसको उसी पुराने रुतबे के स्थान पर लाने का प्रयास किया है। इस लक्ष्य को पाने के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए तत्पर रहूंगा।

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