मूसलाधार बारिश भी हुई तो दगा नहीं देंगे पंपिंग स्टेशन, जानिए वजह Aligarh news

जहां जलभराव की समस्या अधिक रहती है, वहां पंपिंग स्टेशनों की क्षमता बढ़ाई जा रही है।

मानसून में हर बार जलभराव की समस्या से जूझते शहर में नगर निगम के इंतजाम एेन वक्त पर दगा दे जाते हैं। चाहे वह साफ किए गए नाले हों या पंपिंग स्टेशन। इस बार नगर निगम मानसून से पहले पुख्ता इंतजाम कर रहा है।

Anil KushwahaTue, 20 Apr 2021 03:23 PM (IST)

अलीगढ़, जेएनएन। मानसून में हर बार जलभराव की समस्या से जूझते शहर में नगर निगम के इंतजाम ऐन वक्त पर दगा दे जाते हैं। चाहे वह साफ किए गए नाले हों या पंपिंग स्टेशन। इस बार नगर निगम मानसून से पहले पुख्ता इंतजाम कर रहा है। शहर के प्रमुख नालों की तलीझाड़ सफाई के अलावा पंपिंग स्टेशन भी दुरुस्त कराए जा रहे हैं। जर्जर हो चुकी मशीनरी को बदला जा रहा है। जहां जलभराव की समस्या अधिक रहती है, वहां पंपिंग स्टेशनों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। बिजली जाने पर पंपिंग स्टेशन चलेंगे, इसके लिए जेनरेटरों का इंतजाम किया जा रहा है। जोनल अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी तय की जाएंगी। 

शहर में कुल 27 पंपिंग स्टेशन

शहर में कुल 27 पंपिंग स्टेशन हैं। इनमें आधे से ज्यादा पंपिंग स्टेशनों की हालत खस्ता है। यही वजह है कि बारिश में पंपिंग स्टेशन पूरी क्षमता से नहीं चल पाते। कुछ घंटे चलने के बाद ही हांफने लगते हैं। 2019 के मानसून में हालात विकराल थे। दुकानें जलमग्न हो गईं, अपार्टमेंट, शापिंग मॉल के वेसमेंट डूब गए। कई इलाकों में घरों में पानी भर गया था। नाव तक डालनी पड़ गई थी। बीते साल भी विभिन्न इलाकों में जलभराव की समस्या रही। पंपिंग स्टेशन दगा दे गए थे। उन हालातों को देखते हुए निगम अफसराें ने इस बार मानसून से पहले व्यवस्थाओं का खाका खींच लिया है।

लाखों खर्च के बाद भी नहीं मिल रहा लाभ

पंपिंग स्टेशनों को दुरुस्त कराने और बारिश में ये पूरी क्षमता से चल सकें, इसके इंतजाम कराए जा रहे हैं। खासकर उन क्षेत्रों में जहां जलभराव की समस्या अधिक रहती है। गूलर रोड, सराय हरनारायण, छर्रा अड्डा, रामघाट रोड स्थित प्रमुख पंपिंग स्टेशनाें पर अतिरिक्त स्टाफ रखा जाएगा। इन्हीं इलाकों में जलभराव की समस्या अधिक रहती है। यही नहीं, जो पंपिंग स्टेशन जेनरेटरों पर निर्भर हैं, वहां विद्युत कनेक्शन कराए जाएंगे। इससे डीजल का खर्चा बचेगा। दरअसल, पंपिंग स्टेशनों में डीजल पर हर साल 60 से 70 लाख रुपये खर्च होता है। इसके बाद भी अपेक्षाकृत लाभ नहीं मिलता। बारिश में जब व्यवस्थाएं लड़खड़ा जाती हैं, तब खामियां तलाशी जाती हैं। इसीलिए इस बार पहले ही इंतजाम किए जा रहे हैं।

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