जीवांश कार्बन पर निर्भर है उत्पादन, ऐसे बढ़ता है उत्‍पादन, जानिए विस्‍तारAligarh News

एक फीसद जीवांश कार्बन वाली भूमि में प्रति हेक्टेयर 60 से 65 कुंतल प्रति हेक्टेयर गेहूं की पैदावार होती है। किसी खेत में एक फीसद जीवांश कार्बन नहीं मिले। शोध केंद्रों में ही जैविक विधि से गेहूं उगाया गया था इसके परिणाम सुखद रहे।

Sandeep Kumar SaxenaTue, 15 Jun 2021 11:23 AM (IST)
शोध केंद्रों में ही जैविक विधि से गेहूं उगाया गया था, इसके परिणाम सुखद रहे।

अलीगढ़, जेएनएन। रसायनिक खाद के भरोसे खेती कर रहे किसानों को शायद इससे कुछ फर्क पड़े कि भूमि में जीवांश कार्बन उत्पादन तय करते हैं। जीवांश कार्बन की मात्रा जितनी अधिक होगी, उत्पादन उतना बेहतर होगा। और जीवांश कार्बन की मात्रा जैविक खाद निर्धारित करती है। जिस खेत में जैविक खाद का उपयोग होता है, वहां पैदावार अच्छी होगी। ये तथ्य अलीगढ़ के कृषि वैज्ञानिकों की रिसर्च में सामने आए हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने गांव-गांव जाकर खेतों की मिट्टी पर शोध किया था। तब इस निष्कर्ष पर निकले।

जीवांश कार्बन पर निर्भर है उत्पादन

जनपद में 3,04261 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। इसमें करीब 20 हजार हेक्टेयर में ही जैविक खेती होती है, बाकी खेती रसायनिक खाद पर भी निर्भर है। वरिष्ठ शोध सहायक रागिब अली बताते हैं कि अच्छी पैदावार के लिए भूमि में जीवांश कार्बन की मात्रा 0.80 से एक फीसद होनी चाहिए। जबकि, अलीगढ़ मंडल की भूमि में जीवांश कार्बन की मात्रा 0.20 से 0.30 फीसद तक है। भूमि में जीवांश कार्बन की मात्रा फसलाें को कैसे प्रभावित करती है, इसे जानने के लिए उप कृषि निदेशक (शोध) डा. वीके सचान के नेतृत्व में गेहूं के उत्पादन पर शोध किया था। मिट्टी की जांच में जीवांश कार्बन की मात्रा देखी गई। जिन खेतों में 0.20 फीसद जीवांश कार्बन पाए गए, वहां 15 से 20 कुंतल प्रति हेक्टेयर गेहूं की पैदावार हुई। जबकि, 0.50 फीसद जीवांश कार्बन वाली भूमि में 30 से 40 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त हुई। एक फीसद जीवांश कार्बन वाली भूमि में प्रति हेक्टेयर 60 से 65 कुंतल प्रति हेक्टेयर गेहूं की पैदावार होती है। किसी खेत में एक फीसद जीवांश कार्बन नहीं मिले। शोध केंद्रों में ही जैविक विधि से गेहूं उगाया गया था, इसके परिणाम सुखद रहे।

खेतों में रहती है नमी

डा. वीके सचान बताते हैं कि जीवांश कार्बन की कमी के चलते रसायनिक खाद अधिक देनी पड़ती है। क्योंकि, ऐसी भूमि में नमी ज्यादा समय नहीं रहती। जबकि, जीवांश कार्बन वाली भूमि में नमी काफी समय तक बनी रहती है। सिंचाई की आवश्यकता कम पड़ती है। फसलाें की गुणवत्ता बेहतर होती है। जीवांश कार्बन मात्रा तभी बढ़ती है, जब खेतों में गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट, जैविक खाद, हरी खाद का प्रयोग किया जाए। जीवांश कार्बन की मात्रा जैसे-जैसे बढ़ेगी, उपज भी बढ़ती जाएगी। जीवांश कार्बन ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं।

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