बारिश की बूंदें सहेजने काे तैयार हो रहे तालाब, किसान भी बन रहे मुहिम का हिस्‍सा Aligarh news

मानसून में बारिश की बूंदें सहेेजने को तालाब तैयार हो रहे हैं। शासन से लक्ष्य तय होते ही भूमि संरक्षण विभाग ने तालाबों की खोदाई शुरू करा दी है। किसान भी इस मुहिम में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं।

Anil KushwahaThu, 17 Jun 2021 11:46 AM (IST)
मानसून में बारिश की बूंदें सहेेजने को तालाब तैयार हो रहे हैं।

अलीगढ़, जेएनएन । मानसून में बारिश की बूंदें सहेेजने को तालाब तैयार हो रहे हैं। शासन से लक्ष्य तय होते ही भूमि संरक्षण विभाग ने तालाबों की खोदाई शुरू करा दी है। किसान भी इस मुहिम में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। खेतों में तालाब के लिए जमीन भी उपलब्ध कराई जा रही है। जनपद में ऐसे 16 तालाब खोदे जाएंगे। इस बार बारिश भी झमाझम होने के संकेत मिल रहे हैं। ऐसा हुआ तो दो-तीन दिन बारिश में तालाब पानी से लबालब हो जाएंगे। पिछले साल 17 तालाब तैयार कराए गए थे, जो ग्रामीण क्षेत्रों में जल संचय का मुख्य स्रोत बने हुए हैं। ये तालाब किसानों ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत अपने खेतों में खोदवाए थे। इसी योजना तहत इस बार भी पंजीकृत किसानों को तालाब बनवाने के लिए सरकार 50 प्रतिशत अनुदान दे रही है।

जल संचय का अच्‍छा स्रोत है तालाब

तालाब न सिर्फ जल संचय को अच्छा स्रोत होते हैं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने का साधन भी हैं। इससे खेतों की सिंचाई की जा सकती है। मछली पालन, सिंघाड़ा उत्पादन कर किसान अतिरित्त आय अर्जित कर सकते हैं। कई किसान कर भी रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई याेजना का लाभ लेने के लिए पंजीकृत किसान इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। भूमि संबंधी दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही योजना का लाभ मिलेगा। तालाब का क्षेत्रफल भी निर्धारित है। तालाब की लंबाई 22 मीटर, चौड़ाई 20 मीटर और गहराई तीन मीटर रखी गई है। एक तालाब के निर्माण के लिए एक लाख पांच हजार रुपये का बजट है। इसमें 50 प्रतिशत यानी 52,500 रुपये अनुदान के रूप में डीबीटी के जरिए तीन किस्तों में किसान के खाते में पहुंचेगा।

मछली पालन कर रहे किसान

भूमि संरक्षण अधिकारी निधि राठौर बताती हैं कि आय बढ़ाने के साथ जल संचयन के लिए खेतों में तालाब उपयुक्त साधन हैं। सरकार 50 फीसद अनुदान भी दे रही है। पिछले साल खाेदे गए तालाबों में किसान मछली पालन और सिंघाड़ा उत्पादन कर रहे हैं। खेत में ही तालाब होगा ताे भूमि पर नमी बनी रहेगी, उत्पादन अच्छा होगा। भूजल में भी वृद्धि हाेगी।

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