अलीगढ़ में पौधों की कीमतों में लगी आग, मुरझाने लगी नर्सरी Aligarh news

कोरोनो संकट के बीच कमरतोड़ मंहगाई के दर्द से आमजन तड़फ रहा है। खाद्य वस्तुएं व धातुओं की कीमतों के साथ बागवानी भी महंगी हो गई है। पौधों की कीमतों में आग लगने से नर्सरी भी मुरझाने लगी है।

Anil KushwahaMon, 14 Jun 2021 01:51 PM (IST)
पौधों की कीमतों में आग लगने से नर्सरी भी मुरझाने लगी है।

अलीगढ़, जेएनएन । कोरोना संकट के बीच कमरतोड़ मंहगाई के दर्द से आमजन तड़ाप रहा है। खाद्य वस्तुएं व धातुओं की कीमतों के साथ बागवानी भी महंगी हो गई है। पौधों की कीमतों में आग लगने से नर्सरी भी मुरझाने लगी है। गर्मियों के सीजन में सुस्त चलने वाले बागवानी कारोबार पर अब मंहगाई का ग्रहण है। इसके चलते महानगर की पौधों की नर्सरी में ग्राहकों की आमद भी कम हो रही है। अब तो कारोबारियों को बरसात के सीजन का इंतजार है।

आक्‍सीजन की कमी ने दिलाई पौधों की याद

कोरोना संकट में प्राकृतिक धरोहरों को एक बार फिर से याद किया जा रहा है। संक्रमण के बाद जब मरीजों में जीवनदायिनी आक्सीजन की हास्पिटलों में कमी हुई और आक्सीजन सिलेंडर को लेकर देश के साथ प्रदेश भर में हाहाकार मचा तब आक्सीजन देने वाले पौधे याद आने लगे। पीपल, आम, नीम, बरगद सहित 30 से अधिक पौधों को लोगों ने रौपना शुरू किया। एक ओर जहां पश्चिम बंगाल, असम, गुजरात सहित अन्य प्रांतों में लाकडाउन हुआ तो आवागमन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। आक्सीजन के पौधों पर तो 30 से 40 फीसद तक रेट बढ़ गए। जो बागवानी के शौकीन पीपल, नीम के पेड़ों को हाथ नहीं लगाते थे, वे पौधों की नर्सरी पर इन पौधों को खोजने के लिए भटकते हुए देखे। कोरोना के संकट के जब बादल छटने लगे तो लोग भी लापरवाह होने लगे। एक ओर लोगों से संक्रमण का डर कम हुआ, वहीं पौधों पर महंगाई छाने लगी। इससे पौधों की नर्सरी मुरझाने लगी।

इनका कहना है

हमने दूसरे राज्यों से कुछ पौधे मंगाए हैं। इनकी कीमतों में 30 से 40 फीसद तक की वृद्धि की गई है। हमने भी पौधों के उतने ही पैसा बढ़ा दिए हैं। मंहगाई के चलते आक्सीजन के पौधों के साथ फलदार व फूल वाले पौधों की अब मंग कम हो गई है।

- राजकुमार, नर्सरी संचालक

मुझे बागवानी का काफी शौक है। घर में फुलवारी के साथ कुछ आक्सीजन के लिए भी पौधों को खरीदा है। पांच मई को पीपल सहित फलदार पौधे खरीदकर लाई थी। पीपल का पौधा 75 रुपये का। इसी तरह के अन्य पौधों पर 30 से 40 फीसद तक मंहगाई है।

- अंजली अग्रवाल, ग्राहक

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