हड़ताल से पांच घंटे तक अटकी रहीं मरीजों की सांसें

हड़ताल से पांच घंटे तक अटकी रहीं मरीजों की सांसें

दीनदयाल कोविड अस्पताल में रविवार की शाम डाक्टर व स्टाफ की हड़ताल से सांसें अटकी रहीं।

JagranMon, 26 Apr 2021 01:54 AM (IST)

जागरण संवाददाता, अलीगढ़: दीनदयाल कोविड अस्पताल में रविवार की शाम डाक्टर व स्टाफ की हड़ताल से मरीजों की जान पर आफत आ गई। विशेषकर वे मरीज जो आइसीयू या वेंटीलेटर पर थे। बिना देखरेख व उपचार के करीब पांच घंटे तक 250 मरीजों की सांसें अटकी रहीं। एसडीएम कोल रंजीत सिंह, सीओ सिविल लाइंस अनिल समानिया व इंस्पेक्टर क्वार्सी छोटे लाल ने किसी तरह हंगामा शात कराया। हड़ताल समाप्ति के बाद स्टाफ न लौटना शुरू किया तो जान में जान आई।

स्वजन भी रहे परेशान

डाक्टर व स्टाफ की हड़ताल से मरीज ही नहीं, उनके स्वजन भी काफी परेशान रहे। मरीजों को दवा आदि पहुंचाने के लिए वे कर्मचारियों की खुशामद करते रहे, मगर उन्हें हेल्प डेस्क तक भी नहीं जाने दिया गया। इससे एक तरफ स्टाफ की भीड़ तो दूसरी तरफ स्वजन की भीड़ जुट गई। हर कोई हड़ताल खत्म होने की प्रार्थना करता रहा। नोडल अधिकारी डा. बालकिशन ने भी डाक्टरों से जनहित में हड़ताल खत्म करने की अपील की।

प्रबंधन का दावा, नहीं बाधित हुआ उपचार

हड़ताल के दौरान डाक्टर व स्टाफ परिसर में इकट्ठा हो गए। पुलिस और प्रशासन अधिकारी उन्हें हड़ताल खत्म करने के लिए समझाते रहे। आपदा और जनहित में हड़ताल समाप्त करने का आग्रह भी किया, मगर प्रबंधन का दावा है कि हड़ताल के दौरान प्रत्येक कोविड वार्ड, आइसीयू व वेंटीलेटर वाले मरीजों के पास काफी डाक्टर व स्टाफ देखरेख में रहा। सीएमएस डा. एबी सिंह ने बताया कि कोविड अस्पताल को बिना स्टाफ के कैसे छोड़ सकते हैं। हड़ताल पर केवल बी-टीम वाला स्टाफ भी था। मरीजों को कोई परेशानी हड़ताल के दौरान नहीं होने दी गई।

अव्यवस्था व्याप्त, इसलिए बढ़ रहे विवाद

दीनदयाल अस्पताल को कोविड अस्पताल में बदल दिया गया है। अब केवल कोरोना संक्रमित मरीजों को ही उपचार के लिए भर्ती किया जा रहा है। ओपीडी व अन्य सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं, ताकि भीड़ न जुटने पाए। कोविड प्रोटोकाल भी यही है। लेकिन, यहां पहुंचने पर कहीं से भी प्रोटोकाल का पालन होता नहीं दिखा। कोविड वार्डों के पीछे स्वजन डेरा डाले हुए हैं। हर समय 40-50 कारें व अन्य वाहन परिसर में खड़े रहते हैं। यही नहीं, स्वजन मरीज से मिलने के लिए कभी कोविड वार्ड में पहुंच जाते हैं। रात में भी उनके पास रुक जाते हैं। कोई रोकने-टोकने वाला नहीं। रविवार को सुबह भी ऐसी ही एक घटना हुई, इसमें कोविड वार्ड के स्टाफ से मारपीट की बात सामने आई। यही वजह रही कि शाम को दोबारा ऐसी ही घटना हुई तो डाक्टर व स्टाफ ने आपा खो दिया। लेकिन, सवाल यह है कि बाहरी व्यक्ति कोविड वार्ड तक इतनी आसानी से कैसे पहुंच रहे हैं, कहीं न कहीं तो सुरक्षा और व्यवस्था में कमी तो जरूर है। प्रबंधन को इसकी जांच करनी चाहिए कि कहीं इसके पीछे कोई खेल तो नहीं, जिसके लिए प्रोटोकाल तो ताक पर रख दिया गया है।

मुकदमा दर्ज, सीसीटीवी फुटेज देखे

सीओ तृतीय अनिल समानिया ने बताया कि दोनों पक्षों से बातचीत की गईं। दीनदयाल अस्पताल के चीफ मेडिकल आफिसर की तहरीर पर चार-पांच युवतियों व महिलाओं के खिलाफ बलवा, सरकारी कर्मचारी पर हमला करने, मारपीट, धमकी देने, तोड़फोड़ व उत्तर प्रदेश चिकित्सा परिचर्या सेवा कर्मी और चिकित्सा परिचर्या सेवा संस्था (हिसा और संपत्ति की क्षति का निवारण) अधिनियम की धारा 2 ए व महामारी अधिनियम में मुकदमा दर्ज कर लिया है। सीसीटीवी फुटेज भी देखे गए हैं। जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

सीडीओ के आश्वासन पर लौटा स्टाफ

मामला कोविड अस्पताल में हड़ताल का था, इसलिए सीडीओ अंकित खंडेलवाल भी आ गए। सभागार में डाक्टर व स्टाफ के साथ करीब एक घटे तक वार्ता चली। दीनदयाल अस्पताल में अस्थाई चौकी की स्थापना करने व तहरीर मिलने पर न्याय संगत कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस दौरान एक अधिकारी ने चुनाव को अहम बता दिया, इससे स्टाफ भड़क गया। सीडीओ ने कहा कि आपकी सुरक्षा का ख्याल रखा जाएगा। कोविड वार्ड में मरीज के परिवार वालों को आने की अनुमति नहीं मिलेगी।

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