Passion of service : खुद का लाडला छोड़ कोविड के मरीजों की जान बचा रहीं सोनी Aligarh News

स्टाफ नर्स सोनी ने बताया कि उन्होंने 2018 में जीएनएम कोर्स किया था।

शायद इसीलिए मां को धरती पर भगवान का जीता-जागता स्वरूप कहा गया है। एक मां अपने खुद के इकलौते लाडले से दूर रहकर दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए दिन-रात मुफ्त में सेवाएं दे रही है। कोविड अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल करने की है।

Sandeep Kumar SaxenaSun, 09 May 2021 07:44 AM (IST)

अलीगढ़, गौरव दुबे। शायद इसीलिए मां को धरती पर भगवान का जीता-जागता स्वरूप कहा गया है। एक मां अपने खुद के इकलौते लाडले से दूर रहकर दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए दिन-रात मुफ्त में सेवाएं दे रही है। ड्यूटी भी किसी डाक्टर की क्लीनिक पर नहीं, बल्कि कोविड अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल करने की है। कोरोना की दूसरी लहर में जब इंसानों की जानें जा रही हैं, ऐसे में रायल होम्स तालानगरी निवासी 32 वर्षीय सोनी पाठक अपने 10 वर्षीय बेटे अनुभव तिवारी व पति अभिषेक तिवारी से अलग रहकर लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान तक दांव पर लगाए बैठी हैं।
 
स्टाफ नर्स सोनी ने बताया कि उन्होंने 2018 में जीएनएम कोर्स किया था। इसके बाद 2018 में ही एएमयू के जेएन मेडिकल कालेज में अगेंस्ट टू लीव यानी वहां के स्टाफ के अवकाश पर जाने पर ड्यूटी देने की जिम्मेदारी मिली। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में स्टाफ की छुट्टिïयां निरस्त कर दी गईं तो सोनी को ड्यूटी करने का मौका नहीं मिल रहा। मगर सेवा का जुनून ऐसा कि उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के पास चक्कर लगाकर खुद अपने रिस्क पर दीनदयाल अस्पताल में मुफ्त सेवाएं देने के लिए प्रार्थना पत्र देकर उस पर मुहर लगवाई। इसके लिए उनको शपथ पत्र भी लिखना पड़ा। अब वे सरकारी अस्पताल में कोविड मरीजों की देखभाल व इलाज करने में दिन-रात व्यस्त रहती हैं। इस संक्रमण काल में जो लोग आक्सीजन सिलिंडर व अन्य जरूरी चीजों के लिए रुपयों को तरजीह दे रहे हैं, उनके लिए सोनी का समर्पण आईना दिखाने वाला है।
बेटा नहीं लग सकता मां के गले
सोनी ने बताया कि जब ड्यूटी के बाद वे घर आती हैं तो बेटा उनको दूर से सैनिटाइज करता है। बाहर ही बाथरूम बना है, वहां नहाकर सीधे अपने अलग कमरे में जाती हैं। पति ग्रामीण बैंक कासिमपुर में बिजनेस कोआॢडनेटर हैं, वे खाना बनाते हैं। अपने ही कमरे में सोनी खाना खाती हैं और सुबह फिर ड्यूटी पर चली जाती हैं। ये दिनचर्या बनी हुई है। संक्रमण के खतरे के चलते बेटे को भी पास आने की अनुमति नहीं है।
बच्चे के जन्मदिन पर बांटतीं कपड़े
मदर्स टच सीनियर सेकेंडरी स्कूल में सातवीं कक्षा के छात्र अनुभव का जब जन्मदिन होता है तो मां सोनी बरछी बहादुर की दरगाह पर जाकर जरूरतमंदों को कपड़े भी बांटती हैं। जवां ब्लाक के मुजफ्फरा गांव (ग्रामीण निवास) जाकर वहां भी क्षेत्रीय जरूरतमंद बच्चों को खाना व कपड़े मुफ्त में बांटती हैं।

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