नाइजीरिया बंदी की जेएन मेडिकल कालेज में बीमारी से मौत, धोखाधड़ी के मामले में एक साल से बंद था जिला कारागार में

नाइजीरिया बंदी की शुक्रवार को जेएन मेडिकल कालेज में बीमारी के चलते मौत हो गई। लंबे समय से उसका उपचार चल रहा था। सिविल लाइंस थाने की पुलिस ने उसे धोखाधड़ी धौंस जमाने आइटी एक्ट व विदेशी अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

Anil KushwahaSat, 04 Dec 2021 05:35 PM (IST)
जिला कारागार में एक साल से बंद चले आ रहे नाइजीरिया बंदी की शुक्रवार को मौत हो गई।

अलीगढ़, जागरण संवाददाता। जिला कारागार में एक साल से बंद चले आ रहे नाइजीरिया बंदी की शुक्रवार को जेएन मेडिकल कालेज में बीमारी के चलते मौत हो गई। लंबे समय से उसका उपचार चल रहा था।

जेल प्रशासन ने विदेेशी दूतावास को जानकारी दे दी

सिविल लाइंस थाने की पुलिस ने उसे धोखाधड़ी, धौंस जमाने, आइटी एक्ट व विदेशी अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इस मामले में जेल प्रशासन ने उच्चाधिकारियों के साथ विदेशी दूतावास को जानकारी दे दी है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक विपिन मिश्रा ने बताया कि सिविल लाइंस पुलिस ने आठ दिसबंर 2020 को 35 वर्षीय जोआ पुत्र फुलगेस निवासी 147, ओसोदी रोड भफोलुका आंसोदी लागोस स्टेट, नाइजीरिया(हाल पता सी 14, हस्तसल विहार,उत्तम नगर,दिल्ली) को धोखाधड़ी, धौंस जमाने, आइटी एक्ट एवं विदेशी अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उन्होंने बताया कि जोआ को बीमार होने पर पहले भी दो बार बार जेएन मेडिकल कालेज में उपचार दिलाया गया था। 29 नवंबर को सांस लेने, छाती में दर्द व घबराहट होने पर जेएन मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया। जहां शुक्रवार शाम मौत हो गई। इस संबंध में नाइजीरिया बंदी के उच्च न्यायालय में अधिवक्ताओं से संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि जोआ के भाई से सहयोग प्राप्त नहीं हो रहा है। इस प्रकरण में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। जिनके स्तर से भारतीय दूतावास के जरिए नाइजीरिया दूतावास को अवगत करा दिया गया है। शनिवार को शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा।

भाई की हत्या में भाई को आजीवन कारावास

अलीगढ़ । एडीजे नौ सुनील सिंह की अदालत ने गांधीपार्क थाना क्षेत्र में तीन साल पहले हुई हत्या के मामले में एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। एडीजीसी जेपी राजपूत ने बताया कि थाना सासनीगेट के कासिम बाबा लडिया निवासी कौसर ने 26 दिसंबर 2017 को मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें कहा था कि उनकी सास जंगलगढ़ी निवासी नजमा अपने बेटे राशिद के साथ रहती हैं। 25 दिंसबर 2017 को कौसर के पति मुजाहिद नजमा के पास मिलने गए थे। इसी दौरान मकान बेचने की रंजिश में राशिद ने अपने भाई मुजाहिद पर चाकू से हमला कर दिया। इलाज के दौरान मुजाहिद की मौत हो गई थी। पुलिस ने राशिद के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके चार्जशीट दाखिल की। इसमें मां ने गवाही दी थी। सत्र परीक्षण व गवाहों के आधार पर अदालत ने राशिद को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। खास बात ये है कि इस केस का निर्णय चार साल से भी कम समय में आ गया।

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