अलीगढ़ में मुक्तिधाम को अव्यवस्थाओं से मिल रही मुक्ति, कोरोना काल में थे ऐसे हालात

श्मशान और कब्रिस्तान भी अछूते नहीं हैं। नगर निगम में श्मशान गृहों में नए चबूतरे बनवाए हैं। कब्रिस्तान में स्ट्रीट लाइटें लगी हैं। अन्य व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। एलपीजी गैस चलित अाधुनिक शवदाह गृह की सुविधा भी जल्द मिलेगी।

Sandeep Kumar SaxenaFri, 06 Aug 2021 07:12 AM (IST)
एलपीजी गैस चलित अाधुनिक शवदाह गृह की सुविधा भी जल्द मिलेगी।

अलीगढ़, जेएनएन। वैश्विक महामारी कोरोना की दूसरी लहर ने मौत का जो मंजर दिखाया, उससे हर कोई सिहर गया था। बस यही फिक्र थी कि महामारी से खुद को और अपनों को कैसे बचाया जाए। उन लोगों की पीड़ा का तो अंदाजा ही नहीं लगाया जा सकता, जिनके अपने इस महामारी का शिकार हो गए। उनकी तकलीफ तब और बढ़ गई, जब श्मशान गृह में दाह-संस्कार के लिए कतार में लगकर टोकन लेने पड़े। हालात ही ऐसे थे। अधूरी व्यवस्थाओं में शवों का एक साथ दाह-संस्कार कराना मुमकिन नहीं था। कब्रिस्तान में भी सरीखे हालात थे। अब तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा रही है। हर कोई प्रार्थना कर रहा है कि ये न आए। उधर, जिला प्रशासन व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में जुटा है। श्मशान और कब्रिस्तान भी अछूते नहीं हैं। नगर निगम में श्मशान गृहों में नए चबूतरे बनवाए हैं। कब्रिस्तान में स्ट्रीट लाइटें लगी हैं। अन्य व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। एलपीजी गैस चलित अाधुनिक शवदाह गृह की सुविधा भी जल्द मिलेगी।

श्मशान गृहों में नए चबूतरे बनवाए

जिला प्रशासन ने नुमाइश स्थित श्मशान गृह और शाहजमाल स्थित कब्रिस्तान को पिछले साल ही कोविड डेडिकेट घोषित कर दिया था। आदेश थे कि कोविड प्रोटोकाल के तहत ही श्मशान गृह में दाह-संस्कार और कब्रिस्तान में शव दफनाए जाएं। कब्रिस्तान में जगह कम पड़ने पर ईदगाह के पीछे 10 हजार वर्गमीटर भूमि पर नया कब्रिस्तान बनाया गया। लेकिन, यहां व्यवस्थाएं नहीं थीं। न बैठने की, न पानी की। हालात ऐसे थे कि इस बारे कोई सोच भी नहीं रहा था। चिंता तो सिर्फ आने वाले शवों को सुरक्षित तरीके से दफनाने की थी। रात में भी शव दफनाए गए। लाइट न होने से काफी दिक्कतें हुईं। पुलिया न बनने से जलभराव की समस्या भी बनी हुई थी। पानी भरने से कब्रें धंस जातीं। नगर निगम ने अब यहां स्ट्रीट लाइट लगवा दी हैं। जलभराव न हो, इसके भी इंतजाम किए जा रहे हैं। वहीं, नगर निगम ने शहर के ज्यादातर श्मशान गृहों में नए चबूतरे बनवाए हैं। पेयजल, लाइट के अलावा अस्थियां सुरक्षित रखने के लिए रेक की व्यवस्था की जा रही है।

जहां जगह मिली, वहीं किया दाह-संस्कार

दूसरी लहर में नुमाइश मैदान स्थित श्मशान गृह में दाह-संस्कार के लिए जगह कम पड़ गई थी। यहां 12 चबूतरे बने हुए थे। शव अधिक होने पर जहां जगह मिलती, वहीं दाह-संस्कार करा दिया जाता। दूसरी लहर थमने पर चार चबूतरे और बनाए गए हैं। श्मशान गृह की देखरेख कर रहे मानव उपकार संस्था के अध्यक्ष विष्णु कुमार बंटी बताते हैं कि श्मशान गृह में व्यवस्थाएं और बेहतर कराने के लिए डीएम से मांग की है।

एलपीजी गैस चलित शवदाह गृह

नुमाइश मैदान स्थित श्मशान गृह में स्मार्ट सिटी के तहत 90 लाख रुपये की लागत से एलपीजी गैस चलित शवदाह गृह बनेगा। इसका टेंडर हो चुका है। एक दिन में इसमें सात से आठ शवों का दाह-संस्कार किया जा सकेगा। जिले का यह पहला गैस चलित शवदाह गृह होगा। एक शव के दाह-संस्कार में 60 से 90 मिनट का समय लगेगा।

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