सिंधु बार्डर पर नए नारों के साथ बनेगी आंदोलन की रणनीति, जानिए क्या है मामला

कृषि कानूनों की वापसी के बाद भी किसान संगठन आंदोलन का रास्ता नहीं छोड़ रहे। नित नए आंदोलनों का तानाबाना बुना जा रहा है। अब एमएसपी पर कानूनी गारंटी को मुद्दा बनाकर एक और आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

Sandeep Kumar SaxenaTue, 30 Nov 2021 04:04 PM (IST)
संयुक्त किसान मोर्चा के जिला संयोजक शशिकांत।

अलीगढ़, जागरण संवाददाता। कृषि कानूनों की वापसी के बाद भी किसान संगठन आंदोलन का रास्ता नहीं छोड़ रहे। नित नए आंदोलनों का तानाबाना बुना जा रहा है। अब एमएसपी पर कानूनी गारंटी को मुद्दा बनाकर एक और आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। नए नारे भी दिए गए हैं। 'जंग अभी जारी है, अब एमएसपी की बारी है' इस नारे के साथ संयुक्त किसान मोर्चा चार दिसंबर को सिंधु बार्डर पर आंदोलन की रणनीति बनाएगा। प्रत्येक जिले से संगठन से जुड़े पदाधिकारी बार्डर पर पहुंचेंगे।

किसान नेताओं ने लगाए आरोप

संयुक्त किसान मोर्चा के जिला संयोजक शशिकांत ने कहा कि संसद में तीनों कृषि कानूनों की वापसी किसानों और उनके समर्थकों की ऐतिहासिक जीत और हिटलरशाही की हार है। वहीं, शीतकालीन सत्र में बिजली संशोधन बिल पास कराने की सरकार की कवायद किसानों के साथ धोखा है, जिसका दुष्प्रभाव खेती पर ही नहीं आम बिजली उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। पहले से ही भारी बिलों का करंट दे चुकी बिजली अब निजी हाथों सौंपने की तैयारी है। इस कानून के रद्द करने की मांग के लिए भी संघर्ष जारी रहेगा। एमएसपी पर कानूनी गारंटी से ही किसानों की आर्थिक हालात सुधरेंगे। इसलिए एमएसपी पर कानूनी गारंटी सरकार से हासिल किए बिना किसान दिल्ली की सड़कों से नहीं हटेगा। तीनों कानून सरकार ने जबरन थोपे और अब एक साल बाद कानून वापस कर मोदी सरकार किसानों से माफी चाहती है। उन्होंने कहा कि हमारे 700 साथियों ने उनकी जिद के बदले जान गंवा दी, उनके परिवारों का सहारा छिन गया। लखीमपुर खीरी में किसानों पर गाड़ियां चढ़ा दीं। किसानों को आतंकवादी, नक्सलवादी, पाकिस्तानी, देशद्रोही न जाने कितनी गालियां दी गईं। कोरोना महामारी में सड़कों पर मरने को छोड़ दिया। देशभर में 50 हजार से अधिक आंदोलनकारियों पर पुलिस केस दर्ज हुए।

अलीगढ़ में दर्ज हैं मुकदमे

अलीगढ में भी मोदी का पुतला दहन करने पर 11 किसान नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया गया। किसानों की मांग है कि सभी केस रद्द हों, आंदोलन में मारे गए और घायल हुए किसानों के परिवारों को मुआवजा, नौकरी और सम्मान दिया जाए। लखीमपुर खीरी नरसंहार के दोषी केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री को बर्खास्त कर सजा दी जाए। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के नाम पर 10 साल पुराने ट्रेक्टरों को चलाने पर पाबंदी के आदेश को रद्द किया जाए। वहीं पंचायत की जमीनें निजी कंपनियों को देने और ट्यूबवेल पर बिजली मीटर लगाने के योगी सरकार के निर्णय से किसानों में विरोध है। उन्होंने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा ने फिलहाल बार्डरों पर डटे रहने का निर्णय लिया है। 'जंग अभी जारी है, अब एमएसपी की बारी है' नारे के साथ आंदोलन को धार दी जाएगी। चार दिसंबर को सिंघु बार्डर पर आयोजित बैठक में सभी किसान संगठन मिलकर आंदोलन की आगे की रणनीति तय की करेंगे।

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