मेला दाऊजी महाराज : जीवन के लिए वरदान है आयुर्वेद Hathras News

मेला श्री दाऊजी महाराज स्थित वेद भगवान सनातन धर्म सभा शिविर में आयुर्वेद सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें आयुर्वेद को जीवन के लिए प्रकृति का अमूल्य वरदान बताया। साथ ही इसमें चिकित्सकों ने असाध्य रोगों से बचने के आयुर्वेदिक उपाय भी लोगों को बताए।

Sandeep Kumar SaxenaThu, 16 Sep 2021 11:54 AM (IST)
आयुर्वेद को जीवन के लिए प्रकृति का अमूल्य वरदान

हाथरस, संवाद सहयोगी। मेला श्री दाऊजी महाराज स्थित वेद भगवान सनातन धर्म सभा शिविर में आयुर्वेद सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें आयुर्वेद को जीवन के लिए प्रकृति का अमूल्य वरदान बताया। साथ ही इसमें चिकित्सकों ने असाध्य रोगों से बचने के आयुर्वेदिक उपाय भी लोगों को बताए।  आयुर्वेदिक दवाओं के प्रयोग से खून की कमीं, डायविटीज, असाध्य रोग भी खत्म हो जाते हैं। मधुमेह रोग को खत्म करने के लिए सभी अंग्रेजी दवाएं बंद कर चंद्रप्रभा वटी की दो-दो गोली तीन बार लेनी चाहिए। चाय, दूध, दही, मांस, मीठा व चाय सहित सभी नशा इसमें प्रतिबंधित हैं।

फायदे ही फायदे

सांकेतिक मेला श्री दाऊजी महाराज में बुधवार को आयुर्वेद सम्मेलन का अायोजन गणेश पूजन, वेद वंदना व धन्वंतरी स्तवन के साथ किया यगा। कार्यक्रम का संयोजन करते हुए वैद्य मोहन राकेश ने बताया कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्वति है। इसमें सभी रोगों का उपचार निहित है। चिकित्सकों के परामर्श से ली गईं आयुर्वेदिक दवाएं शरीर पर कभी भी नकारात्मक प्रभाव नहीं डालती हैं। यह सुलभ व सरल चिकित्सा पद्वति है। अध्यक्षता डा. जितेंद्र स्वरूप शर्मा फौजी ने की। इसमें दिवाकर शर्मा, स्वदेश अग्रवाल, पुनीत अग्निहोत्री, शिवनंदन अग्निहोत्री, डीके जैन, सीएस राघव मौजूद रहे।

विदेशों में भी लोकप्रिय है आयुर्वेद

विशेषज्ञों ने बताया कि एलोपैथिक दवाएं तुरंत असर तो करती हैं। लंबे समय तक इनका प्रयोग शरीर पर बुरा असर करता है। कभी-कभी तो इससे रोग खत्म होने के बजाय बढ़ भी जाता है। आयुर्वेद दवाएं पूरी तरह से प्राकृतिक हैं। यह रोगों को जड़ से खत्म कर देती हैं। अमेरिका, रूस, नेपाल, चीन सहित अन्य देशों में भी आयुर्वेद को अपनाया जा रहा है।

असाध्य रोगों को भी जड़ से खत्म कर देता है आयुर्वेद

चिकित्सकों ने बताया कि आयुर्वेदिक दवाओं के प्रयोग से खून की कमीं, डायविटीज, असाध्य रोग भी खत्म हो जाते हैं। मधुमेह रोग को खत्म करने के लिए सभी अंग्रेजी दवाएं बंद कर चंद्रप्रभा वटी की दो-दो गोली तीन बार लेनी चाहिए। चाय, दूध, दही, मांस, मीठा व चाय सहित सभी नशा इसमें प्रतिबंधित हैं।

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