छात्र के हौंसले से तेंदुआ भी हारा, ऐसे किया सामना, जानिए विस्‍तार से

ये कहानी 16 साल के उस छात्र लकी की है जिसने न सिर्फ एक वयस्क तेंदुए का हमला झेला बल्कि सूझबूझ और अदम्य साहस का परिचय देकर तेंदुए को भगाकर उसके चंगुल से आजाद हो गया। इस हमले में उसकी बांह और पीठ जख्मी हो गई।

Sandeep Kumar SaxenaThu, 02 Dec 2021 06:39 AM (IST)
ये कहानी 16 साल के उस छात्र लकी की है, जिसने न सिर्फ एक वयस्क तेंदुए का हमला झेला।

अलीगढ़, प्रवीण तिवारी। ये कहानी 16 साल के उस छात्र लकी की है, जिसने न सिर्फ एक वयस्क तेंदुए का हमला झेला, बल्कि सूझबूझ और अदम्य साहस का परिचय देकर तेंदुए को भगाकर उसके चंगुल से आजाद हो गया। इस हमले में उसकी बांह और पीठ जख्मी हो गई। जिस वक्त हमला हुआ, वहां छात्र को बचाने वाला कोई नहीं था। जख्मी बांह लिए जब छात्र स्कूल के स्टाफ के पास पहुंचा तो स्टाफ ने बिल्ली का हमला बता दिया। मगर, जब तेंदुए को खुद देखा तो सभी के होश उड़ गए। छात्र के साहस की पूरे गांव ने प्रशंसा हो रही है। आइए सुनते हैं हाईस्कूल के छात्र की जुबानी तेंदुए के हमले की कहानी....

ऐसे किया तेंदुआ का सामना

मेरा हिंदी का पेपर था। बुधवार सुबह 8:30 बजे मैं गांव के ही कक्षा चार के छात्र मनोज के साथ स्कूल पहुंचा। अपनी कक्षा में पैड रखकर मनोज के साथ दूसरी मंजिल पर उसकी कक्षा में जा रहा था। कक्षा के दरवाजे तक पहुंचा ही था कि पास में ही जीने की सीढ़ियों पर तेंदुआ नजर आया। टीवी पर तेंदुआ को देखा था इस लिए पहचान लिया। उसे देखते ही मेरे होश उड़ गए। मनोज मेरे पीछे ही खड़ा था। कुछ समझ नहीं आया कि क्या करूं। तेंदुए और मेरे बीच में महज दो मीटर का फासला रहा होगा। मैं मनोज का हाथ पकड़कर नीचे जाने के लिए सीढ़ियों की तरफ भागा, तभी तेंदुए ने छंलाग लगाकर मुझे गिरा लिया। कंधे के नीचे दायीं बांह को मुंह में दबा लिया। पीठ पर भी पंजे गाड़ दिए। मनोज तब तक भाग चुका था। मैंने हिम्मत नहीं आरी। मैं भी तेंदुए को हाथ व पैर मारता रहा। तभी अचानक तेंदुआ भागकर एक खाली कक्षा में घुस गया। मैं फौरन उठा और सीढ़ियों से नीचे की ओर भागा। नीचे आकर योगेश सर को बताया कि ऊपर तेंदुआ है। लेकिन वह मानने काे तैयार नहीं थे। कहने लगे कि यहां तेंदुआ कहां से आया, कोई बिल्ली होगी। देखने के लिए वह ऊपर जाने लगे। ऊपर चढ़ते ही उन्हें कक्षा में तेंदुआ नजर आ गया। वे भी उल्टे पांव लौट गए। उन्होंने सभी बच्चों को घर भेज दिया। मुझे अस्पताल ले जाया गया। तेंदुए ने जब मुझ पर हमला किया तो बचने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था। इसी कारण हिम्मत जुटाकर मैंने भी उसने मारना शुरू किया। मैं अब अपनों के बीच में हूं। अच्छा हुआ तेंदुआ पकड़ा गया। अब किसी को डर नहीं लगेगा।

मां हुई बेसुध, बेटा देखकर आया चैन

लकी पर तेंदुए के हमले की खबर से पूरे गांव में हड़कंप मच गया। लकी की मां गीता सिंह को इसकी जानकारी बेटी वंदना से मिली। वंदना ने मां को बताया कि तेंदुए ने भैया पर हमला कर दिया है। इससे वह बेसुध हो गईं। होश आने पर परिवार की अन्य महिलाएं उन्हें कालेज ले गईं। वहां बेटा को सकुशल पाकर उन्हें चैन आया। घायल छात्र को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, वहां से मलखान सिंह अस्पताल रेफर कर दिया। देरशाम लकी को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। घर पहुंचते ही मां ने उसे सीने से लगा लिया। गांव वाले भी बच्चे का हाल जानने पहुंचे और उसकी बहादुरी प्रशंसा करने लगे।

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