Girl Child Week of Bharat Vikas Parishad : बेटियों में हैं अपार संभावनाएं, बस उन्हें हौसलों की उड़ान चाहिए

भारत विकास परिषद पूरे देश में 17 जनवरी से बालिका सप्ताह की शुरुआत कर रहा है।

भारत विकास परिषद पूरे देश में 17 जनवरी से बालिका सप्ताह की शुरुआत कर रहा है। पूरा सप्ताह बालिकाओं को समर्पित रहेगा। इस माध्यम से पूरे देश में लाखों बेटियों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। बस्तियों की बालिकाओं को संबल प्रदान करेंगे।

Publish Date:Sun, 17 Jan 2021 03:00 PM (IST) Author: Sandeep kumar Saxena

अलीगढ़, जेएनएन। भारत विकास परिषद पूरे देश में 17 जनवरी से बालिका सप्ताह की शुरुआत कर रहा है। पूरा सप्ताह बालिकाओं को समर्पित रहेगा। इस माध्यम से पूरे देश में लाखों बेटियों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। बौद्धिक कार्यक्रम, खेलकूद, पौष्टिक आहार और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी कराए जाएंगे, जिससे बेटियों का सर्वांगीण विकास हो सके। राष्ट्रीय महिला विकास (भारत विकास परिषद) की सदस्य डा. दिव्या लहरी ने कहा कि बालिकाओं को हम यदि उन्हें किशोरावस्था में ही संबल प्रदान करेंगे तभी वह आगे चलकर समाज का मुकाबला कर सकेंगी। खासकर देखने में आता है कि बस्तियों में बालिकाओं की स्थिति ठीक नहीं होती है। कुपोषण का शिकार होती हैं। पैसों के अभाव में वह स्कूल नहीं जा पाती हैं।

कम उम्र में शादी 

कुछ बालिकाओं को तो आठवीं तक पढ़ाई कराने के बाद उन्हें घर बिठा दिया जाता है। कई बार तो कम उम्र में उनकी शादी कर दी जाती है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के चलते उन्हें पौष्टिक आहार भी नहीं मिल पाता है। इससे बालिकाओं का बौद्धिक, सांस्कृतिक विकास नहीं हो पाता है। डॉ. दिव्या ने कहा कि आजादी के लंबे समय के बाद भी बस्तियों में रह रही बालिकाएं समस्याओं से जूझ रही हैं। इसलिए भारत विकास परिषद ने बीड़ा उठाया है कि बस्तियों की बालिकाओं को संबल प्रदान करेंगे। 

बेटियों में अपार संभावनाएं 

17 जनवरी को प्रत्येक शाखा मलिन बस्ती में या फिर ग्रामीण क्षेत्र में हीमोग्लोविन टेस्टिंग शिविर लगाएगी। इसमें एक डाटा बनाया जाएगा जिसमे बालिकाओं के नाम, पता, लंबाई, वजन तथा हीमोग्लोविन की मात्रा लिखी जाएगी। 18 जनवरी को बस्तियों में नृत्य नाटिका और भाषण प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसका विषय बेटियों से महकता घर आंगन, राष्ट्र के उत्थान मे बेटियों का योगदान है। 19 जनवरी को बच्चियों को स्टेशनरी, लोहे की कढ़ाई, गुड़ और चना बांटा जाएगा।  20 को गर्म कपड़े, 21 को बच्चो के लिए संस्कारशाला,  24 को महिला एवं बाल विकास प्रकल्प की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। डा. दिव्या ने कहा कि बेटियों में अपार संभावनाएं हैं, बस उन्हें हौसलों की उड़ान चाहिए। फिर देखिए वह एक नया इतिहास रचने का काम करेंगी। भारत विकास परिषद का यह कदम एक नया अध्याय लिखेगा।

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