अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है भारत, यहां है खास व्‍यवस्‍था Aligarh News

विश्‍व भारती पब्‍लिक स्‍कूल की प्रिंसिपल सुनीता सिंह जादौन का कहना है कि गुलामी की बेड़ियों से भारत के आजाद होने पर जवाहर लाल नेहरू ने इंडियन नेशनल कांग्रेस के लाहौर सेशन में पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी।

Sandeep Kumar SaxenaThu, 16 Sep 2021 09:20 AM (IST)
विश्‍व भारती पब्‍लिक स्‍कूल की प्रिंसिपल सुनीता सिंह जादौन।

अलीगढ़, जागरण संवाददाता। विश्‍व भारती पब्‍लिक स्‍कूल की प्रिंसिपल सुनीता सिंह जादौन का कहना है कि गुलामी की बेड़ियों से भारत के आजाद होने पर जवाहर लाल नेहरू ने इंडियन नेशनल कांग्रेस के लाहौर सेशन में पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी। अनगिनत सत्याग्रह, आंदोलनों से हमें यह आजादी मिली थी। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने लंबे वाद-विवाद के बाद भारतीय संविधान की प्रस्तावना में भारत के आदर्शों काे इंगित किया और नए भारत की दिशा प्रशस्त की। भारत एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य है, जिसमें समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक आजादी है। चीन और पाकिस्तान से युद्ध के बाद भारत ने यह साबित कर दिया कि वह संपन्न देश है। यहां की मिश्रित अर्थ व्यवस्था से लोगों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। जो लोग असमर्थ हैं, उन्हें विभिन्न योजनाएं सहयोग करती हैं।

अनुच्‍छेद 370 पर लिया गया अखंडता का प्रमाण

स्पष्ट है कि सबका साथ सबका विकास ही भारत को ऊंचाइयों के शिखर तक पहुंचा रहा है। इसी का परिणाम है कि विश्व में भारत की स्थिति मजबूत हुई है। अयोध्या प्रकरण में फैसला आने के बाद भी कहीं कोई विवाद नहीं हुआ। सभी समुदाय कोर्ट के निर्णय से संतुष्ट थे। आर्टिकल 370 हटाकर जम्मू-कश्मीर पर लिया गया निर्णय भारत की अखंडता का प्रमाण है। वर्तमान में किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, इससे स्पष्ट होता है कि देश में हर वर्ग को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। आज भारत विश्व स्तर पर तय किए गए लक्ष्यों को पूरा कर रहा है। यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल में मल्टीलेटरलिज्म और एंटी टेररिज्म की बात उठाई गई है। हमें बदलते समय के साथ नए नियम भी लाने होंगे, जिससे समाज के सभी वर्गों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाया जा सके। वे गर्व से कह सकें कि हम भारत के निवासी हैं। स्वामी विवेकानंद ने कभी अपने आदर्शों के साथ समझौता नहीं किया। उस दौर में युवाओं ने अन्याय की खिलाफत की, दूसरों पर हो रहे अन्याय का विरोध भी किया। वे जिसमें विश्वास रखते थे, उसके लिए बलिदान हो जाना बड़ी बात नहीं समझते थे। ऐसे ही युवाओं का शुद्ध मन और दिमाग इस स्वतंत्र राष्ट्र की रीड़ है। युवाओं को सामाजिक वास्तविकता और कठिनाइयों से रूबरू होना चाहिए। स्वतंत्र भारत के आदर्शों को अपनाकर उनका पालन करने का प्रयास करना चाहिए। देश का युवा ही देश को तरक्की के मार्ग की ओर अग्रसर करेगा।

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