डीएपी की बढ़ती मांग ने बढ़ा दी अफसरों की भाग-दौड़ Aligarh News

डीएपी की बढ़ती मांग ने कृषि विभाग के अफसरों की भाग-दौड़ बढ़ा दी है। डीएपी की किल्लत की सूचना मिलते ही अफसर बिक्री केंद्रों पर पहुंच जाते हैं। अफसरों का कहना है कि डीएपी की जिले में कहीं कोई कमी नहीं है।

Sandeep Kumar SaxenaFri, 15 Oct 2021 04:04 PM (IST)
डीएपी की जिले में कहीं कोई कमी नहीं है। दुकानदार ही भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं।

अलीगढ़, जागरण संवाददाता। डीएपी की बढ़ती मांग ने कृषि विभाग के अफसरों की भाग-दौड़ बढ़ा दी है। डीएपी की किल्लत की सूचना मिलते ही अफसर बिक्री केंद्रों पर पहुंच जाते हैं। अफसरों का कहना है कि डीएपी की जिले में कहीं कोई कमी नहीं है। दुकानदार ही भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। इसलिए मौके पर जाकर वस्तुस्थिति का पता करना होता है। क्रय-विक्रय का लेखाजोखा देखा जाता है। डीएपी समेत अन्य उर्वरकों के नमूने लेकर जांच को भेज रहे हैं। अनियमितता मिलने पर नोटिस भी दिए गए हैं।

यह हैं अलीगढ़ में उर्वरक के हालात

हर साल खरीफ और रबी के फसली सीजन में अनुदानित उर्वरक यूरिया और डीएपी की मांग बढ़ जाती है। किसान अधिक मात्रा में ये उर्वरक खरीद लेते हैं, दुकानों में भी स्टाक कर लिया जाता है। इसके चलते अक्सर इनकी किल्लत रहती है। उर्वरक न मिलने पर कई बार किसानों द्वारा हंगामा, जाम-प्रदर्शन हो चुके हैं। इस बार समय पर ही डीएपी और यूरिया की आपूर्ति करा दी गई। रबी की फसल के लिए जिले में अब तक 11,500 मीट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति चुकी है। जबकि, सहकारी समितियों पर पिछले कुछ दिनों से डीएपी की किल्लत बनी हुई थी। किसानों का कहना था निजी दुकानों पर 100-150 रुपये प्रति बोरा अधिक लिया जा रहा है। सरकारी दर पर डीएपी उपलब्ध नहीं हो पा रहा। मजबूरी में ही दुकानों से डीएपी खरीदना पड़ रहा था। इगलास के गांव उडंबरा निवासी किसान जगदीश सिंह ने भी क्षेत्र में डीएपी की किल्लत बताई। गांव टमोटिया के भूदेव प्रसाद शर्मा का कहना था कि इगलास आलू की बैल्ट है, यहां सबसे अधिक डीएपी की आवश्यकता होती है, लेकिन समितियों पर डीएपी उलपब्ध नहीं हो पा रहा। जिला कृषि अधिकारी डा. रामप्रवेश ने बताया कि इगलास समेत सभी क्षेत्रों में सहकारी समितियों को डीएपी उपलब्ध करा दिया गया है। अक्टूबर का लक्ष्य 13,500 मीट्रिक टन है, इसके सापेक्ष 11,500 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध हो चुका है। 16 अक्टूबर को 1328 मीट्रिक टन डीएपी आएगा। 1600 मीट्रिक टन डीएपी और उपलब्ध होने की संभावना है। डीएपी अौर यूरिया की कहीं कोई किल्लत नहीं है। सरकारी दर से अधिक कीमत लेने पर दुकानदारों पर कार्रवाई होगी।

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