ऐसे करेंगे सब्जियों के राजा आलू की खेती तो होगा मुनाफा

अलीगढ़ में सबसे अधिक आलू उत्पादन होता है। इस बार इस फसल से अच्छा लाभ हुआ है।

आलू की लागत का 40 प्रतिशत खर्च बीज पर आता है। इसलिए आलू का बीज विश्वसनीय स्टोर या कृषि एवं उद्यान विभाग से क्रय करना चाहिए। प्रति हेक्टेयर 25 से 35 कुंतल बीज की आवश्यकता होती है। बीज 25-40 ग्राम का जिसकी मोटाई 2.5 से 3.0सेमी. हो।

Publish Date:Fri, 23 Oct 2020 12:42 PM (IST) Author: Mukesh Chaturvedi

योगेश कौशिक, अलीगढ़ः  सब्जियों के राजा आलू के उत्पादन से किसानों को अन्य फसलों के मुकाबले अच्छा मुनाफा होता है। यदि आलू की वैज्ञानिक तरीके से खेती की जाए तो पैदावार को और बढ़ाया जा सकता है। आलू की बुवाई अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से नवंबर के द्वितीय सप्ताह तक की जा सकती है। आलू के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी मुफीद होती है। भूमि में उचित जल निकास का प्रबंध होना आवश्यक है। आलू की कंद जमीन के अंदर होती हैं इस लिए मिट्टी का भुरभुरा होना आवश्यक है। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें, दूसरी तथा तीसरी जुलाई देशी हल या कल्टीवेटर से करनी चाहिए। खेत में ढ़ेले हो तो पाटा चलाना चाहिए। बुवाई के समय खेत में नमी का होना आवश्यक है।

बीज व बुवाई

आलू की लागत का 40 प्रतिशत खर्च बीज पर आता है। इसलिए आलू का बीज विश्वसनीय स्टोर या कृषि एवं उद्यान विभाग से क्रय करना चाहिए। प्रति हेक्टेयर 25 से 35 कुंतल बीज की आवश्यकता होती है। बीज 25-40 ग्राम का जिसकी मोटाई 2.5 से 3.0सेमी. हो। बीज वाले आलू को शीतग्रह से बुवाई से 10-15 दिन पहले निकाल कर छायादार जगह पर फैला दें। बीज व मृदा जनित रोगों से बचाव के लिए ट्राईकोडर्मा विरिडी 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल में 15-20 मिनट भिगो कर रखें। प्लांटर मशीन से बुवाई करें। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 60 सेमी. व कंद से कंद की दूरी 20 सेमी. तथा मेंडों की ऊचाई 20-25 सेमी. रखें। 

खाद एवं उर्वरक

आलू की फसल में अन्य फसलों की अपेक्षा अधिक मात्रा में खाद एवं उर्वरकों की आवश्यकता होती है। इसमें सड़ी हुई गोबर की खाद 250 कुंतल तथा पांच कुंतल सरसों या नीम की खली या 40 कुंतल वर्मीकंपोस्ट, रासायनिक उर्वरकों में 180 किग्रा. नाइट्रोजन, 80 किग्रा. फास्फोरस, 100-120 किग्रा. खेत में मिला देना चाहिए। नाइट्रोजन की आधी मात्रा तैयारी के समय व शेष मात्रा का एक भाग मिट्टी चढ़ाते समय व दूसरा खेत में खड़ी फसल में देना चाहिए। 

एेसे करें सिंचाई

आलू उथली जड़ वाली फसल है। इसलिए इसमें बार-बार सिंचाई की आवश्यकता होती है। बुवाई के 20 दिन के अंदर पहली सिंचाई हल्की करनी चाहिए। जलवायु व मिट्टी की किस्म के अनुसार 5-10 सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। नालियों का केवल आधा भाग ही पानी से भरना अच्छा होता है। खेत में जल निकास का प्रबंध उचित होना चाहिए। पानी भरने पर कंद सड़ जाते हैं। खुदाई के 10 दिन पहले सिंचाई बंद कर देनी चाहिए। मंगलायतन विश्व विद्यालय के कृषि विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रंजना तिवारी ने बताया कि आलू मुनाफे की फसल है। लेकिन इसमें लागत ज्यादा आती है। किसान पाला पडऩे व रोग आने पर तुरंत कृषि विशेषज्ञों से राय लें। रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कृषि विशेषज्ञ की राय से करना चाहिए। वैज्ञानिक विधि से खेती करने पर किसानों को अच्छी उपज व अधिक मुनाफा होता है। 

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