अलीगढ़ में घूंघट की ओट से 12 हजार महिलाएं कर रहीं खेतीबाड़ी, ऐसे पाई सफलता, जानिए विस्‍तार से

मुश्किलों से घबरा कर उसके सामने घुटने टेक देना कोई अकलमंदी नहीं होती।

मुश्किलों से घबरा कर उसके सामने घुटने टेक देना कोई अकलमंदी नहीं होती। परिस्थितियां चाहे जितनी भी खराब और आपके प्रतिकूल क्यों न हों इंसान को अपना संघर्ष हमेशा जारी रखना चाहिए। हालात से लडऩा लड़कर गिरना और फिर उठकर संभलना ही जिंदगी है।

Sandeep kumar SaxenaSat, 27 Feb 2021 09:47 AM (IST)

अलीगढ़, सुरजीत पुंढीर। मुश्किलों से घबरा कर उसके सामने घुटने टेक देना कोई अकलमंदी नहीं होती। परिस्थितियां चाहे जितनी भी खराब और आपके प्रतिकूल क्यों न हों, इंसान को अपना संघर्ष हमेशा जारी रखना चाहिए। हालात से लडऩा, लड़कर गिरना और फिर उठकर संभलना ही जिंदगी है। जिले में भी ऐसी ही करीब 12 हजार से अधिक महिलाएं संघर्षों के बीच सफलता की नई इबारत लिख रही हैं। यह महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ( एनआरएलएम) से जुड़कर समूहों में पारंपरिक फसलों से हटकर खेतीबाड़ी करने में जुटी हैं। कोई गोभी की खेती कर रहा है, तो कोई टमाटर की। इससे महिलाओं की आय तो बढ़ ही रही है, साथ ही नारी सशक्तिकरण का नारा भी बुलंद हो रहा है।

यह है योजना 

केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं को मजबूत बनाने के लिए एनआरएलएम योजना संचालित है। इसके तहत महिलाओं के समूह गठित होते हैं। इन समूहों को बैंक से एक साथ लोन मिलता है। सभी महिलाएं संयुक्त रूप से इसे जमा करती हैं। ब्याज में भी विशेष छूट मिलती हैं। यह महिलाएं विभिन्न श्रेणियों में काम काज करती हैं। दो साल पहले इसमें खेतीबाड़ी की भी शुरुआत कर दी गई। इसके तहत महिलाएं समूह बनाकर खेती बाड़ी करती हैं। सरकार इन समूहों को लोन देने के साथ ही कृषि उपकरण भी उपलब्ध कराती है।

12 हजार महिलाएं जुड़ीं

अब तक जिले के 270 से अधिक गांव में महिला समूह खेतीबाड़ी से जुड़ी हैं। इनमें 12 हजार से अधिक महिलाएं खेती करती हैं। इन महिलाओं को विभाग की तरफ से समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है। अच्छी पैदावार के गुर सिखाए जाते हैं। पारंपरिक खेती के अलावा जैविक आधुनिक खेती पर जोर दिया जाता है। इससे फसलों में अच्छी खासी पैदावार होती है।

समूह की महिलाएं अब खेतीबाड़ी में भी अच्छा काम कर रही हैं। जिले में करीब 12 हजार से अधिक महिलाएं इससे जुड़ चुकी हैं। विभाग की तरफ से इन्हें कृषि उपकरण के साथ ही प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

अनुनय झा, सीडीओ

हम तीन साल से समूह से जुड़ी हैं। इसके कुछ दिनों बाद ही मैंने खेती शुरू कर दी। करीब 16 बीघा खेती करते हैं। इनमें पांच बीघा जमीन पर जैविक खेती करते हैं। इससे सामान्य खेती से अच्छी आय होती है। अब पूरे गांव में 150 से अधिक महिलाएं समूह से जुड़कर खेतीबाड़ी कर रही हैं। पशुपालन व डेयरी भी संचालित कर रही हैं।

नीरज देवी, महिला किसान

हमारे समूह में 10 महिलाएं हैं। सभी मिलकर 70 बीघा खेती करते हैं। सब्जियों के साथ ही गेहूं, सरसों की भी खेती होती है। घर के पुरुष अलग खेती करते हैं। इससे सभी की आय में बढ़ोतरी हो रही है।

सुशीला, महिला किसान

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