Question: एप्रुवल नहीं तो कैसे चल रहे इतने ट्रामा सेंटर, वह भी दो से तीन कमरे में Aligarh news

जिले में 500 से अधिक प्राइवेट हास्पिटल हैं। करीब 100 हास्पिटल तो मल्टी स्पेशलिटी सुविधा के साथ ट्रामा सेंटर के रूप में ही संचालित हो रहे हैं। यह अलग बात है कि ज्यादातर ट्रामा सेंटर दो या तीन छोटे कमरों में चलाए जा रहे हैं।

Anil KushwahaSun, 25 Jul 2021 05:57 AM (IST)
किस ट्रामा सेंटर मेंं क्‍या सुविधा है ये सीएमओ कार्यालय को भी नहीं जानकारी।

अलीगढ़, जेएनएन ।  जिले में 500 से अधिक प्राइवेट हास्पिटल हैं। करीब 100 हास्पिटल तो मल्टी स्पेशलिटी सुविधा के साथ ट्रामा सेंटर के रूप में ही संचालित हो रहे हैं। यह अलग बात है कि ज्यादातर ट्रामा सेंटर दो या तीन छोटे कमरों में चलाए जा रहे हैं। अधिकारी इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि ऐसे किसी ट्रामा को एप्रुवल नहीं दिया गया है। अब सवाल ये है कि बिना एप्रुवल के इतने फर्जी ट्रामा सेंटर फिर खुल कैसे गए? क्या हकीकत में ही स्वास्थ्य विभाग की नजर इन ट्रामा सेंटरों पर नहीं पड़ी है या फिर कुछ और ही बात है। ट्रामा सेंटरों में उपचार के नाम पर होने वाली धंधेबाजी से अधिकारी अंजान हो, इस बात को मानने के लिए कोई तैयार नहीं। बगैर एप्रुवल के ट्रामा सेंटरों का संचालन विभागीय साठगांठ के बिना संभव ही नहीं है। यही वजह है कि खूब शिकायतें मिलने पर भी अधिकारी इनमें झांकने तक नहीं जाते। ट्रामा, जो मरीजों को लूट ही नहीं रहे, बल्कि उनके जीवन से भी खेल रहे हैं। इस खेल का पर्दाफाश करने के लिए दैनिक जागरण ने ‘ट्रामा का ड्रामा’ अभियान शुरू किया है। विगत तीन दिनों की पड़ताल में दर्जन भर से अधिक फर्जी ट्रामा सेंटर सामने आए हैं। पेश है अभियान का चौथी किस्त...

एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट पर ही एप्रुवल

विभागीय नियमों के मुताबिक ट्रामा सेंटर संचालित करने के लिए हास्पिटल संचालक को अलग से अनुमति लेनी पड़ती है? या फिर ट्रामा के नाम से ही हास्पिटल को पंजीकृत कराना पड़ता है। दोनों ही स्थिति में सीएमअो कार्यालय की एक्सपर्ट कमेटी संबंधित ट्रामा सेंटर पर पहुंचकर मानक के अनुसार विशेषज्ञ व संसाधनों की जांच करती है। कमेटी की संस्तुति पर ही सीएमओ अनुमति प्रदान करते हैं। हैरानी की बात ये है? कि शहर से लेकर देहात तक बिना एप्रुवल के ही ट्रामा सेंटर खुल गए हैं। किस ट्रामा सेंटर में क्या सुविधा है? सीएमओ कार्यालय में भी रिपोर्ट उपलब्ध नहीं। इससे साफ है? कि ज्यादातर ट्रामा सेंटर मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं, जिनका मकसद केवल मरीजों को लूटना ही है।

ये हैं ट्रामा सेंटर के मानक

एक आदर्श ट्रामा सेंटर में सिविल सर्जन, एनेस्थेटिक्स, आर्थोपेडिक सर्जन, न्यूरो सर्जन के अलावा दूसरे स्पेशलिस्ट, ओटी टेक्नीशियन व वेंटीलेटर टेक्नीशियन के साथ अन्य ट्रेंड सहयोगी स्टाफ होना जरूरी है। एक्स-रे, थ्रीडी अल्ट्रासाउंड मशीन, सीटी स्कैन, ओटी सीलिंग लाइट, पैरामानीटर, एनेस्थीसिया मशीन, वेंटीलेटर, ट्रांसपोर्ट वेंटीलेटर, एबीजी मशीन, डेफिब्रिलेटर मानीटर, पावर ड्रिल, स्पलिंट, ट्रैक्शन आदि उपकरण होने चाहिएं। मरीजों को हायर सेंटर रेफर करने की जरूरत पड़े तो एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस होनी चाहिए। लेकिन, कथित ट्रामा सेंटरों में आधी भी सुविधाएं नहीं। विशेषज्ञों की बात तो भूल ही जाएं। यही वजह हैं? कि तमाम ट्रामा सेंटर बिना एप्रुवल लिए ही चल रहे हैं। इस सवाल का संतोषजनक जवाब अधिकारी भी नहीं दे रहे कि बिना एप्रुवल के ट्रामा सेंटर खुल कैसे गए और संचालित किसकी अनुमति से हो रहे हैं?

जिंदगी से ज्यादा पैसे की चिंता

बिना मानक के संचालित ट्रामा सेंटरों में आए दिन हंगामें होते हैं। कई बार उचित इलाज के अभाव मरीज की जान भी चली जाती है, लेकिन संचालक पैसे के लालच में गंभीर रूप से घायल मरीज को भर्ती कर उपचार का ड्रामा शुरू कर देते हैं। मरीजों से खूब लूट होती है। इन ट्रामा सेंटरों के शिकार सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र के लोग ही बनते हैं, जिन्हें गुमराह करके यहां भेजा जाता है।

नाम बदल-बदल कर संचालन

धनीपुर मंडी व क्वार्सी-एटा बाईपास समेत कई स्थानों पर संचालित ट्रामा सेंटरों की शिकायतें विभाग को मिलती रही हैं। कार्रवाई न होने पर शासन-प्रशासन तक मामले पहुंचे हैं, तब जाकर कुछ हास्पिटलों (ट्रामा) को सील भी किया गया। हैरानी का बात ये है कि कुछ समय बाद ही विभागीय साठगांठ से संचालकों ने नाम में कुछ फेरबदल कर नए सिरे से पंजीकरण करा लिए। इससे साफ है कि ट्रामा सेंटर संचालकों को किसी की परवाह नहीं। स्वास्थ्य विभाग की तो बिल्कुल भी नहीं।

आप भी भेजिए शिकायत

ट्रामा सेंटरों में व्याप्त कमियों व लूट के शिकार कोई भी हो सकता है। यदि आपके साथ पूर्व में ट्रामा सेंटरों पर कोई अप्रिय घटना हुई हो या बुरा अनुभव रहा हो तो हमें ईमेल या वाट्सएप से जानकारी भेजें। हम आपकी आवाज अधिकारियों तक पहुंचाएंगे।

ईमेल-aligarh@ali.jagran.com

वाट्सएप-8477975975

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