अलीगढ़ में पोखरें हीं साफ और कब्जा मुक्त हो जातीं तो बारिश न बनती मुसीबत Aligarh news

शहर की भौगोलिक स्थिति कटोरेनुमा बताकर जलभराव पर मजबूरी जता रहे अफसर पोखरों को साफ और कब्जा मुक्त करा देते तो बारिश मुसीबत न बनती। नगर निगम पर ऐसी टिप्पणियां हर कोई कर रहा है। जनप्रतिनिधि अपनी दी हुई सलाह न मानने पर अधिकारियों को आड़े हाथों ले रहे हैं।

Anil KushwahaThu, 22 Jul 2021 11:49 AM (IST)
जल निकासी की व्‍यवस्‍था न होने से सड़कों पर जमा पानी।

अलीगढ़, जेएनएन ।  शहर की भौगोलिक स्थिति कटोरेनुमा बताकर जलभराव पर मजबूरी जता रहे अफसर पोखरों को साफ और कब्जा मुक्त करा देते तो बारिश मुसीबत न बनती। नगर निगम पर ऐसी टिप्पणियां हर कोई कर रहा है। वहीं, जनप्रतिनिधि अपनी दी हुई सलाह न मानने पर अधिकारियों को आड़े हाथों ले रहे हैं। कह रहे हैं कि आवास और कार्यालयोेेें में बैठकर समस्याओं का समाधान नहीं होता, इसके लिए फील्ड में उतरना पड़ता है। सही भी है, इनमें से कोई काम नगर निगम अधिकारियों ने नहीं कराया। जबकि, इनके पास न बजट की कमी थी, न समय की। लाकडाउन के दौरान ही ये काम हाे जाते तो बारिश में ये हालात न देखने पड़ते। पोखरों की क्षमता बढ़ाई नहीं गई, जलनिकासी से मुख्य स्रोत गंदगी से अटे पड़े हैं। जो नाले बनाए जा रहे थे, वे अधूरे छोड़ दिए। ऐसी स्थिति में झमाझम बारिश से जलभराव नहीं होगा तो क्या हाेगा?

जलनिकासी का प्रमुख स्रोत जाफरी ड्रेन व अलीगढ़ ड्रेन ही हैं

शहर की जलनिकासी के प्रमुख स्रोत जाफरी ड्रेन और अलीगढ़ ड्रेन हैं। शहरभर का पानी इन्हीं से होकर निकलता है। दोनों की हालत खस्ता पड़ी है। आबादी से होकर निकल रहे जाफरी ड्रेन को पक्का कराने के सुझाव कोल विधायक अनिल पाराशर ने दिए थे। कहा था कि क्वार्सी चौराहे से एटा चुंगी तक ड्रेन को आरसीसी का करा दिया जाए। इससे ड्रेन की क्षमता बढ़ेगी और कटान भी नहीं होगा। निगम अफसरों से सलाह पर ध्यान नहीं दिया। इसका नतीजा यह रहा भारी बारिश में ये ड्रेन कई जगह से कट गया। इससे श्रीनगर, शिवशक्ति कालोनी समेत कई आबादी वाले इलाकों में पानी भर गया। रामघाट रोड, मैरिस रोड भी जलमग्न हैं। मडराक से गुजर रहा अलीगढ़ ड्रेन कटने से भकरौला, मनोहरपुर कायस्थ गांव में पानी घुस गया। बीघों खड़े खेत जलमग्न हो गए। उधर, शाहजमाल इलाके में जंगलगढ़ी स्थित नाला अधूरा छोड़ दिया। निकासी न होने से पूरे इलाके में पानी भर गया। रामघाट रोड पर ही किशनपुर तिराहे से प्रकाश लाज से नाला बनना था, अफसर ये काम भी न कर सके। चार दिन से इस रोड पर पानी जमा है। मेलरोज बाईपास का भी यही हाल है। निगम अफसर समय से चेत जाते तो समस्या इतनी न बढ़ती।

पोखरों काे भूल गया निगम

पोखरों की सफाई और क्षमता बढ़ाने की योजना दो साल पहले बनी थी। पिछले साल विकास नगर पोखर में सफाई कार्य शुरू हुआ, लेकिन कुछ हिस्सा साफ कर काम अधूरा रोड दिया। कालीदह पोखर की सफाई कराने का भी प्रस्ताव पास हुआ। लेकिन हुआ कुछ नहीं। जबकि, डेढ़ साल पहले गूलर रोड का कब्जा मुक्त कराकर इसकी क्षमता बढ़ाई गई थी। तब मानसूनी बारिश में पानी नहीं भरा था। आधे शहर का पानी इसी पोखर में समा गया। पोखरों की क्षमता बढ़ाकर जलनिकासी का इतना बेहतर उदाहरण होने के बाद भी अफसर कुछ कर न सके। कालीदह पोखर के बड़े हिस्से पर कब्जा हो गया। मुकदमा दर्ज कराने के बाद विभागीय अफसर इस हिस्से पर अपना अधिकार होने से इन्कार कर रहे हैं। जबकि, यह जलमग्न भूमि थी। इस पर किसी तरह का निर्माण नहीं हो सकता था। अब बैनामे कराकर प्लाटिंग की जा ही है। अफसरों की सहमति के बिना यह हो नहीं सकता था। जनप्रतिनिधि भी इस मामले में खामोश हैं।

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