Riding on the system : गैस शवदाह गृह बना होता तो आज ऐसे न होते हालात Aligarh news

यदि नुमाइश मैदान में गैस शवदाह गृह होता तो यहां शवों के अंतिम संस्कार में दिक्कत नहीं होतीं।

महामारी और आपदा का मुकाबला करने के लिए तैयारियां पहले ही कर ली जाएं तो दिक्कतें कुछ कम हो जाती हैं। कोरोना संकट के समय यह महसूस किया जा रहा है। खास कर अंतिम संस्कार के लिए परेशान होते लोगों को देखकर व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।

Anil KushwahaMon, 26 Apr 2021 06:21 AM (IST)

अलीगढ़, जेएनएन ।  महामारी और आपदा का मुकाबला करने के लिए तैयारियां पहले ही कर ली जाएं तो दिक्कतें कुछ कम हो जाती हैं। कोरोना संकट के समय यह महसूस किया जा रहा है। खास कर अंतिम संस्कार के लिए परेशान होते लोगों को देखकर व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।  यदि नुमाइश मैदान में गैस शवदाह गृह होता तो यहां शवों के अंतिम संस्कार में दिक्कत नहीं होतीं। एक-एक शव के अंतिम संस्कार में चार-चार घंटे लग रहे हैं। सुबह से लेकर देररात तक अंतिम संस्कार हो रहे हैं। मरीज की मौत से तीमारदार टूट रहे हैं। शव के अंतिम संस्कार में भी उन्हेंं अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है। नुमाइश मैदान स्थित श्मशान गृह के पास अपने परिजनों को खो चुके लोगों को प्रतिदिन बदहवास देखा जा सकता है। उनकी आंखों में इस समय खून उतर रहा है। मगर, दो साल पहले गैस  शवदाह गृह बनाने का प्रस्ताव फाइलों में ही फंसा हुआ है। 

सांसद ने की थी घोषणा

इसकी मांग कई वर्षों से उठ रही है। दो साल पहले गायत्री पैलेस में मानव उपकार संस्था का स्थापना दिवस था, जिसमें सांसद सतीश कुमार गौतम ने  गैस शवदाह गृह बनवाने की घोषणा की थी। तत्कालीन कमिश्नर अजय दीप सिंह के निर्देश पर तत्कालीन नगर आयुक्त सत्यप्रकाश पटेल ने 25 लाख रुपये का प्रस्ताव बनवा तो दिया, लेकिन उसे शासन तक नहीं भेजा गया। कमिश्नर अजयदीप सिंह सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद फाइल एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी। अक्टूबर में नगर आयुक्त सत्य प्रकाश पटेल का स्थानांतरण हो गया। इससे एक दिन पहले पटेल ने फाइल तत्कालीन कमिश्नर जीएस प्रियदर्शी के पास पहुंचा दी और मीडिया को बताया कि शवदाह गृह पर काम शुरू हो गया है। वर्तमान में नगर आयुक्त प्रेम रंजन सिंह हैं, उनके कार्यकाल में भी इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। 

हालत हो रहे बेकाबू

नुमाइश स्थित शवदाह गृह में हालात बेकाबू हो रहे हैं। एक-एक दिन में 10 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। रविवार को तो 14 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। चूंकि लकड़ी से शवों का अंतिम संस्कार करना होता है तो उसमें समय लगता है। गैस शवदाह गृह में बमुश्किल पांच से दस मिनट का समय लगता है। 

पहले 25 लाख का, फिर बनाया 85 लाख का प्रस्ताव

गैस शवदाह गृह के निर्माण में तत्कालीन नगर आयुक्त सत्य प्रकाश पटेल ने ही रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने 25 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाया था। इसपर निर्माण करने वाली कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए। कहा,  इतने में तो सिर्फ मशीन ही आएगी। इस पर नगर आयुक्त पीछे हट गए। जब उनपर जोर दिया गया तो स्थानांतरण से एक दिन पहले उन्होंने 85 लाख रुपये का प्रस्ताव बनवा दिया। चर्चा है कि इसमें भी गोलमाल हुआ है। 

इनका कहना है

नगर आयुक्त अभी हैं नहीं, उनके आने पर मैं तुरंत कार्य शुरू करवाऊंगा। स्वयं इसपर निगरानी रखूंगा, मेरी कोशिश होगी कि जल्द से जल्द बनकर तैयार हो जाए।

सतीश कुमार गौतम, सांसद

मैं लगातार गैस शवदाह गृह के निर्माण के लिए तत्कालीन नगर आयुक्त सत्य प्रकाश पटेल के चक्कर लगातार रहा। मगर, उन्होंने कोई काम नहीं किया। यदि शवदाह गृह का निर्माण हो गया होता तो आज स्थिति ऐसी नहीं होती। सुबह से लेकर देररात तक शवों का अंतिम संस्कार हो रहा है।

विष्णु कुमार बंटी, संस्थापक अध्यक्ष मानव उपकार संस्था

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