Security lapse in AMU : जब बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित है तो बाहरी युवक ने परिसर में कैसे आत्‍महत्‍या की Aligarh news

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जब भी कोई बात होती है तो उसका संदेश दूर तक जाता है। शिक्षा के मामले में सर सैयद के इस इदारे का कोई तोड़ भी नहीं है। यहां पढ़े छात्र दुनिया भर में ज्ञान की रोशनी फैला रहे हैं।

Anil KushwahaSun, 25 Jul 2021 10:02 AM (IST)
एएमयू में कश्मीरी हास्टल में बाहरी युवक द्वारा आत्महत्या की घटना ने सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा किया है।

अलीगढ़, जेएनएन।  अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जब भी कोई बात होती है तो उसका संदेश दूर तक जाता है। शिक्षा के मामले में सर सैयद के इस इदारे का कोई तोड़ भी नहीं है। यहां पढ़े छात्र दुनिया भर में ज्ञान की रोशनी फैला रहे हैं। ऐसे में इसकी शान में अगर बट्टा लगे तो चाहने वालों को खटता तो है ही। चार दिन पहले यूनिवर्सिटी के सुलेमान हाल के कश्मीरी हास्टल में एक बाहरी युवक द्वारा आत्म हत्या करने की घटना ने सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। यूनिवर्सिटी से जुड़ा हर शख्स हैरान है कि एक बाहरी युवक ताला तोड़कर पंखे पर कैसे लटक गया? उस यूनिवर्सिटी में जहां सुरक्षा पर हर माह लाखों खर्च होते हैं। इसके लिए एक बड़ी टीम है। कोरोना काल में वैसे भी गेटों पर लिख रखा है कि बाहरी लोगों का कैंपस में प्रवेश वर्जित है, फिर ये युवक कैंसे दाखिल हो गया?

बाहरी लोगों को रोकना चुनौती भी

एएमयू में बाहरी लोगों द्वारा ठिकाना बनाना कोई नहीं बात नहीं है। शायद ही कोई ऐसा हाल हो जिसमें छात्रों के साथ बाहरी युवक न रहते हों। कोई दोस्त बनकर रहता है तो परिवार का करीबी बनकर। इसकी जानकारी गेट कीपर से लेकर हाल के सर्वेसर्वा तक को होती है, लेकिन उन्हें खदेड़ने की हिम्मत किसी में नहीं होती। डर यही रहता है कि हमने किसी को टोक दिया तो छात्रों के बुरे बन जाएंगे। यही कारण है कि कैंपस में हथियार तक पहुंच जाते हैं। जब भी छात्र गुटों में विवाद होता है इनकी गूंज तब सुनाई भी देती है। छात्र संघ में खूब देखने को मिलता है। यूनिवर्सिटी के हित के लिए बाहरी लोगों पर लगाम लगाना जरूरी है। छात्र नाराज हो सकते हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी की सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं है। छात्र यहां पढ़ने आते हैं, उनके लिए बेहतर माहौल पैदा करना भी इंतजामिया की जिम्मेदारी है।

चेकिंग का बढ़िया मौका

कोरोना के चलते यूनिवर्सिटी लंबे समय से बंद है। अधिकांश छात्र भी अपने घर चले गए हैं। कुछ ही छात्र हैं जो हास्टल में रुके हुए हैं। इंतजामिया के पास बढ़िया मौका है कि सभी हास्टल की चेकिंग की जाए। इससे हास्टल में रह रहे छात्र व उनके सहयोगियों की सटीक जानकारी मिली जाएगी। कमरा किसके नाम एलोट है। उसमें फिलहाल रह कौन रहा है ये भी आसानी से पता चल जाएगा। अगर हास्टल के प्रोवोस्ट से यही जानकारी मांगी जाएगी तो शायद ही जानकारी पूरी मिल पाए। ऐसी ही बेदम रिपोर्ट के चलते ही बाहरी छात्र ठिकाना बनाने में सफल हो जाते हैं। चेकिंग अभियान को नए सत्र में भी दोहराया जा सकता है। ये छात्र और यूनिवर्सिटी के हित में है। किसी को बुरा लगता है तो लग जाए। हास्टलों के प्रवेश द्वार पर सुरक्षा की समीक्षा भी होनी चाहिए, ताकि कमजोर कड़ियों को दुऱुस्त किया जा सके।

अब तो हद हो गई

रामघाट रोड पर पीएसी के पास सड़क का हाल सबके सामने है। किस तरह राहगीर यहां से गुजर रहे हैं। ऐसा शायद ही कोई दिन रहा हो जिस दिन दुपहिया वाहन चालक न गिरे हों। ऐसी नौबत अचानक नहीं आ गई। इसकी शुरुआत एक साल पहले ही हो गई थी। पानी की निकासी न होने के कारण पहले सड़क के किनारे जलभराव हुआ। तब आसपनास के घरों का पानी एकत्रित हो रहा था। अफसरों को इसकी जानकारी थी, लेकिन पानी निकासी का कोई माकूल इंतजाम नहीं कर पाए। यही कारण रहा कि पिछले दिनों हुई बारिश में यह सड़क दलदल बन गई। वर्तमान में इस सड़क का हाल वैसा ही है जो कभी पीएसी के सामने हुआ करता था। सीसी रोड बनने के बाद समाधान हुआ था। दलदल बन चुकी इस सड़क को सीसी रोड बनाकर ही सुधारा जा सकता है, लेकिन पानी निकासी का इंतजाम फिर भी करना होगा।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.