World Alzheimers Day : अरे मेरा चश्मा कहां हैं...जरा आंखों पर तो हाथ लगाओ Aligarh news

अजी मेरा चश्मा कहां हैं? सवाल सुनते ही वह चौंक गईं। परेशान पति को आंखों पर हाथ लगाने की सलाह दी तो दोनों ही हंस दिए। क्योंकि चश्मा लगाए होने के बाद भी चश्मा जो तलाश रहे थे। एेसे किस्सों पर हंसी तो आती है पर यह मामला गंभीर है।

Anil KushwahaTue, 21 Sep 2021 08:47 AM (IST)
जेएन मेडिकल कालेज के मानसिक रोग विभाग में हुए शोध में 60-70 फीसद लोग अल्जाइमर्स से ग्रस्त मिले।

अलीगढ़, जागरण संवाददाता। अजी मेरा चश्मा कहां हैं? सवाल सुनते ही वह चौंक गईं। परेशान पति को आंखों पर हाथ लगाने की सलाह दी तो दोनों ही हंस दिए। क्योंकि, चश्मा लगाए होने के बाद भी चश्मा जो तलाश रहे थे। ऐसे किस्सों पर हंसी तो आती है पर यह मामला गंभीर है। जेएन मेडिकल कालेज के मानसिक रोग विभाग में डिमेंशिया (मस्तिष्क हानि से संबंधित रोग) के मरीजों पर हुए शोध में 60-70 फीसद लोग अल्जाइमर्स से ग्रस्त पाए गए, जो एक भूलने की बीमारी है। 65 वर्ष की आयु के लोगों में इसकी व्यापकता पांच फीसद होती है। उम्र बढ़ने के साथ इसकी व्यापकता बढ़ती जाती है। एक दूसरे शोध में 70 साल की उम्र के तीसरे बुजुर्ग को भूलने की बीमारी है। ऐसे अनेक लोग अपने शहर में भी हैं। इस तरह की शिकायतें युवा व बच्चों में भी हैं। दीनदयाल अस्पताल की एनसीडी सैल में ही अल्जाइमर्स के 70 मरीजों का उपचार चल रहा है।

ये है बीमारी

मानसिक रोग विभाग के चेयरमैन प्रोफेसर डा. एसए आजमी के अनुसार अल्जाइमर एक प्रकार का डिमेंशिया रोग है। इसमें रोगी को भूलने की परेशानी बढ़ती जाती हैं। बाद में उसे समय, व्यक्ति व स्थान पहचानने में परेशानी होती है। बिना उद्देश्य के रोगी इधर-उधर घूमने लगता है। अवसाद, चिड़चिड़ापन व गुस्सा करने लगता है। उसे शक होने लगता है। 40 फीसद रोगियों को ऐसी चीजें भी दिखाई पढ़ने लगती हैं, जोकि आसपास नहीं होती।

रोग का प्रमुख कारण

डा. आज़मी ने बताया, महिलाओं, किसी सदस्यों को सिर में चोट या परिवार में अल्जाइमर का इतिहास रहा हो, वहां रोग के होने का खतरा बढ़ जाता है। दरअसल, यह रोग मस्तिष्क में जैव रासायनिक तत्वों में गड़बड़ी, मस्तिष्क में पपड़ी बनने, कोशिकाओं में हृास या ज्यादा टूट-फूट के कारण ब्रेन का आयतन कम हो जाने के कारण होता है। और भी कारण हो सकते हैं।

ये है उपचार

प्रो. आज़मी ने कहा, औषधीय व गैर औषधीय विधि से उपचार किया जाता है। वातावरण में परिवर्तन भी जरूरी है। रोगी के कमरे में उचित प्रकाश का प्रबंधन, बड़े अक्षरों व गिनती वाला कैलेंडर ताकि रोगी को दिन की तारीख पता हो सके। उचित खाने की व्यवस्था, साफ-सफाई, देख-रेख व सम्मान से पेश आना आवश्यक है। समाज तथा आमजन को अल्जाइमर के प्रति जागरूक होना समझदारी भरा कदम होगा। रोग का पता चलते ही विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

ये भी हैं लक्षण

- स्मरण शक्ति में कमी - रोजाना की दिनचर्या भूल जाना - घर के लोगों के नाम भूल जाना - घर का रास्ता भूल जाना - सामान रखकर भूल जाना

इनका कहना है

अल्जाइमर्स एक भूलने की बीमारी है। ऐसे मरीजों को दीनदयाल अस्पताल स्थित एनसीडी क्लीनिक या जेरियाट्रिक वार्ड में दिखाया जा सकता है। वर्तमान में 70 मरीजों का उपचार चल रहा है।

- डा. खानंचद, नोडल अधिकारी-एनसीडी सैल व डिप्टी सीएमओ।

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