Prakash Parv : त्याग और समर्पण की प्रतिमूर्ति थे गुरु गोविंद सिंह Aligarh news

बारहद्वारी स्थित एस्आर पेट्रोल पंप पर कार्यक्रम में वक्ताओं ने गुरु गोविंद सिंह की साहस भरी कहानी को बताया।

स्वदेशी जागरण मंच ने सिखों के दशवें गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में उनकी वीरता और साहस को याद किया। बारहद्वारी स्थित एस्आर पेट्रोल पंप पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने गुरु गोविंद सिंह की साहस भरी कहानी को सभी के सामने रखा।

Anil KushwahaTue, 02 Mar 2021 02:12 PM (IST)

अलीगढ़, जेएनएन : स्वदेशी जागरण मंच ने सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में उनकी वीरता और साहस को याद किया। बारहद्वारी स्थित एस्आर पेट्रोल पंप पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने गुरु गोविंद सिंह की साहस भरी कहानी को सभी के सामने रखा। मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह त्याग और समर्पण की साक्षात प्रतिमूर्ति थे। पूरा परिवार देश और धर्म के लिए न्यौछावर कर दिया। बलिदान की ऐसी प्रेरणास्रोत कहानी कहीं और नहीं मिलेगी। 

वीर योद्धा थे गुरु गोविंद सिंह 

समाजसेवी मनोज अग्रवाल ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह वीर योद्धा थे। साहित्य से भी खासा लगाव था। देश के प्रति अटूट अनुराग था। मनोज अग्रवाल ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह के पिता गुरु तेग बहादुर ने देश और धर्म के लिए हंसते-हंसते अपने शीश कटवा दिए थे। उन्हीं की तरह गुरु गोविंद सिंह भी थे, उन्होंने पूरा परिवार देश की रक्षा के लिए न्यौछावर कर दिया। 

दो पुत्रों को मुगलों ने दीवार में चुनवा दिया

स्वदेशी जागरण मंच के जिलाध्यक्ष रजनीश राघव ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह पर अत्याचार की सारी सीमाएं तोड़ दी गईं। उनके दो पुत्र युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो गए। दो पुत्रों को मुगलों ने दीवार में चुनवा दिया। मगर, वह टूटे नहीं। युद्ध से पीछे भी नहीं हटे और देश की रक्षा के लिए अपने प्राण उत्सर्ग कर दिए। देश के लिए इतना बड़ा बलिदान दुनिया में कहीं नहीं सुनाई देता है। महानगर संयोजक अमित अग्रवाल ने कहा कि सिखों की बहादुरी, त्याग-समर्पण से भारत का इतिहास भरा पड़ा है। मगर, गुरु गोविंद सिंह का बलिदान रोमांचित कर देता है। देश और धर्म की रक्षा के लिए उन्होंने असहनीय कष्ट सहे। मुगलों ने बेइंतहा उनपर अत्याचार किए, मगर उनके कदम कभी पीछे नहीं हटे। परिवार देश पर बलिदान होता गया, मगर वह तनिक भी भयभीत नहीं हुए। ऐसे बहादुर योद्धा को देश कभी नहीं भूल पाएगा।

नई पीढ़ी को पढ़ना चाहिए इतिहास

हिर्देश गुप्ता ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह के वीरता भरे इतिहास को नई पीढ़ी को पढ़ाना चाहिए। उन्हें बताना चाहिए कि कैसे वह देश के लिए उन्होंने अपना पूरा परिवार देश के लिए न्यौछावर कर दिया। आदर्श भारद्वाज ने कहा कि गुरुद्वारे के सामने से पहुंचते ही श्रद्धा से शीश झुक जाता है। क्योंकि इन्हीं गुरुद्वारों से वीरता की कहानियां निकलतीं हैं। गुरु गोविंद सिंह और सिखों के गुरुओं की वीरता गुरुवाणी में गूंजती है। शबद-कीर्तन सुनकर मन आनंदित हो जाता है। राहुल रुद्रा ने कहा कि सिखों के बहादुरी भरे इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

हिंदुत्‍व की रक्षा में सिखों का बड़ा योगदान

महानगर सह संयोजक गुंजित वार्ष्णेय ने कहा कि हिंदुत्व की रक्षा में सिखों का बहुत बड़ा योगदान है। भगवा पताका का सम्मान हमारे सिख के बहादुर योद्धाओं ने किया। उनकी बहादुरी की दास्तां देश के कण-कण में समाई हुई है। गुरु गोविंद सिंह की वीरता की कहानी सुनकर मन रोमांचित हो उठता है। एक बहादुर योद्धा की तरह वह युद्ध के मैदान में हमेशा डटे रहे। पुत्र वीरगति को प्राप्त होते गए मगर वह झुके नहीं। चाहते तो मुगलों से समझौता कर सकते थे। मगर, उन्होंने  ऐसा नहीं किया। बल्कि बहादुरी के साथ युद्ध के मैदान में हमेशा डटे रहे। उन्होंने सिखों को गुरु ग्रंथ साहिब का पवित्र उपहार दिया, जो सिखों के गुरु के रुप में पूजनीय हैं। गुरु गोविंद सिंह की दूरदृष्टि को प्रदर्शित करता है। कार्यक्रम में विवेक कक्कड़, पुनीत अग्रवाल,संदीप अग्रवाल,चंदन, कुश, देव, आर्यन, अध्ययन, नमन आदि थे।

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