अलीगढ़ में अनफिट वाहनों से लगातार बढ़ रहा हादसों का ग्राफ

सड़क पर सफर के दौरान वाहन संचालन में सावधानी बरतने की तो जरुरत होती ही बल्कि वाहन की फिटनेस सही न होने से भी हादसा होने का खतरा कहीं अधिक बढ़ जाता है। ऐसे वाहनों में चालक ही नहीं उसमें सवार लोगों की जान भी जोखिम में पड़ जाती है।

Sandeep Kumar SaxenaFri, 11 Jun 2021 04:19 PM (IST)
वाहनों में चालक ही नहीं उसमें सवार लोगों की जान भी जोखिम में पड़ जाती है।

अलीगढ़ जेएनएन। सड़क पर सफर के दौरान वाहन संचालन में सावधानी बरतने की तो जरुरत होती ही बल्कि वाहन की फिटनेस सही न होने से भी हादसा होने का खतरा कहीं अधिक बढ़ जाता है। ऐसे वाहनों में चालक ही नहीं उसमें सवार लोगों की जान भी जोखिम में पड़ जाती है। देश में अधिकांश दुर्घटनाएं वाहनों की जर्जर हालात के चलते होती हैं। हादसों को लेकर सरकारी आंकड़ों की बात करें तो कुल सड़क दुर्घटनाओं में से 2.4 फीसद वाहनों की हालत जर्जर होने से होती हैं। इससे हर साल हादसों में होने वाली मौतों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। अलीगढ़ में वाहनों की फिटनेस को परखने का कोई खास इंतजाम नहीं है। आरटीओ में आधुनिक मशीनों की जगह अफसरों की आंखें ही वाहन के फिट या अनफिट होने का प्रमाण पत्र दे रही हैं। जिले में इस साल 400 से अधिक सड़क हादसों में 389 लोग अकाल मौत के मुंह में समा चुके हैं तो 492 लोग घायल होकर जीवन भर का दंश झेलने को मजबूर हो गए हैं।

यातायात नियमों की अनदेखी पड़ रही भारी

बढ़ते सड़क हादसों को लेकर खास बात ये है कि वाहनों की फिटनेस की सही जांच ही नहीं कराई जाती है। कंडम हो चुके ऐसे तमाम वाहन सड़क पर दौड़ते देखे जा सकते हैैं। यातायात नियमों की अनदेखी, जर्जर सड़कें व ओवरलोड वाहन भी हादसों के लिए कम जिम्मेदार नहीं हैं।

धुंआ उगल रहे वाहनों की नहीं होती धरपकड़

जिले में कंडम वाहनों के सड़क पर दौड़ने व धुआं उगलने के बाद भी उनके जब्तीकरण की कार्रवाई नहीं होती है। प्रदूषण जांच के नाम पर भी खानापूर्ति हो रही है। सिर्फ वाहन का नंबर बता देने भर से ही ' सुविधा शुल्क ' लेकर प्रदूषण जांच का प्रमाण पत्र हाथों हाथ जारी किया जा रहा है। आरटीओ व ट्रैफिक पुलिस वाहन चेकिंग अभियान के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं।

20 हजार वाहन कंडम

जिले भर में फिटनेस न कराने वाले करीब 20 हजार वाहनों को कंडम घोषित किया जा चुका है। इनमें करीब दस हजार आटो तो शहर में बिना किसी भय के सवारियों को इधर से उधर ले जाने के काम में जुटे हुए हैं। ऐसी हालत में ये वाहन साक्षात मौत बनकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। सबकुछ जानते हुए भी संबंधित अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

जरुरी है हर साल फिटनेस

नियमों की बात करें तो नए व्यावसायिक वाहन की फिटनेस प्रत्येक दो साल में व उसके बाद हर साल जांच कर प्रमाण पत्र जारी होना चाहिए। आरटीओ में दलालों के जरिये जुगाड़ कर बिना वाहनों की पड़ताल किए ही प्रमाणपत्र जारी हो रहे हैं।

ये हैं नियम

वाहन की फिटनेस में हेड लाइट, बैक लाइट, फाग लाइट, साइड लाइट, पार्किंग लाइट के अलावा रिफ्लेक्टर पट्टी लगी होनी चाहिए। स्कूलों के अलावा निजी व सरकारी वाहनों में इस तरह की कमियों को आसानी से देखा जा सकता है। रोडवेज की बसों की जर्जर हालत और भी बदतर हैं। बसों में खिड़कियों के शीशे, फाग व बैक लाइट दुरुस्त नहीं होती है। फिर भी इन बसों को सड़क पर फर्राटा भरने की अनुमति मिल जाती है।

ट्रैक्टर-ट्राली बन रहे मुसीबत

ट्रैक्टर-ट्राली का प्रयोग कृषि कार्य में ही किया जा सकता है, लेकिन ये सड़क पर व्यावसायिक कामों में फर्राटे भरते नजर आते हैैं। इन वाहनों को नियंत्रित करना मुश्किल काम है। यही कारण है कि कई बार चालक के नियंत्रण खो देने से बड़े हादसे हो जाते हैं। रात में बिना किसी इंडीकेटर व सुरक्षा इंतजाम के जीटी रोड व हाईवे पर इनको फर्राटे भरते देखा जा सकता है।

अनफिट व कंडम वाहनों के जब्तीकरण के साथ ही चालान की कार्रवाई भी की जाती है। समय-समय पर चालकों को यातायात नियमों के पालन के लिए जागरूक किया जाता है। इस साल ऐसे 500 से अधिक वाहनों पर कार्रवाई की गई है।

- फरीदउद्दीन, आरटीओ प्रवर्तन

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