हाथरस में गोवंश हो रहे हमलावर, टार्च लेकर फसलों की रखवाली कर रहे किसान

बेसहारा पशुओं से फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। इससे बचाने के लिए किसानों को हाथ में टार्च व लाठी लेकर कड़कड़ाती सर्दी में रात के समय खेतों में खड़ी फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है। गोशालाओं का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है।

Sandeep Kumar SaxenaSat, 27 Nov 2021 05:55 PM (IST)
फसलों को खुलेआम घूम रहे बेसहारा गोवंश बर्बाद कर रहे हैं।

हाथरस, संवाद सहयोगी। सादाबाद में बेसहारा पशुओं से फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। इससे बचाने के लिए किसानों को हाथ में टार्च व लाठी लेकर कड़कड़ाती सर्दी में रात के समय खेतों में खड़ी फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है। लाखों रुपये खर्च करने बाद शासन द्वारा बनाई गोशालाओं का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है।

अन्नदाता की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले वह फसलों की बुवाई के लिए खाद व बीज के लिए परेशान था। अब खेतों में खड़ी फसलों को लेकर परेशान हैं। इन फसलों को खुलेआम घूम रहे बेसहारा गोवंश बर्बाद कर रहे हैं। इस समय खेतों में आलू, सरसों, गेहूं, सब्जियों की फसलें खड़ी हैं। पसीना बहाकर किसान इन फसलों को तैयार करते हैं। उनकी इस मेहनत पर दिन व रात में घूमने वाले बेसहारा पशुओं के अलावा नील गाय, जंगली सूअर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इनमें गोवंश तो दिन के समय भी फसलों को खाकर नष्ट कर रहे हैं।

कड़कड़ाती ठंड में रात के समय फसलें रखा रहे किसान

सरकार ने सभी ग्राम पंचायतों में गोशाला बनाने के निर्देश दिए हैं। उसके बाद बिसावर से कुरसंडा तक अस्थाई गोशाला तक का प्रबंधन नहीं किया गया है। सभी गोवंश खुलेआम घूमते हुए फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। खेतों में की गई कटीले तारों से बेरीकेडिंग को पशु तोड़ देते हैं। इससे बचने के लिए किसानों को रात के समय कड़कड़ाती ठंड में लाठी व टार्च लेकर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है।

खेतों में सरसों, आलू व अन्य फसलें खड़ी हुई हैं। इन्हें गोवंश व जंगली जानवरों से बचाने को कटीले तार खेतों के चारों ओर लगाए गए हैं।

- घनश्याम सिंह, किसान

सर्दियों में घर से निकलना भी मुश्किल होता है। ऐसे में खुले आसमान के नीचे जागते हुए जानवरों से फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है।

- खेम सिंह, किसान

सरकार ने गोवंश के लिए गोशाला बनाने के निर्देश दिए हैं। उसके बाद भी क्षेत्र में गोशाला नहीं होने से ही यह पशु किसानों के लिए मुसीबत बन गए हैं।

- राधेश्याम, किसान

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