हाथरस में गांधीधाम-भागलपुर एक्सपे्रस का इंजन फेल, ट्रैक जाम

गांधीाधाम से भागलपुर एक्सप्रेस शाम को साढे़ छह बजे मथुरा से कासगंज की ओर जा रही थी। हाथरस सिटी स्टेशन से कुछ दूर निकलते ही ट्रेन का इंजन अचानक फेल हो गया। इसके पीछे आ रही पैसेंजर ट्रेन को सिटी स्टेशन पर रोका गया।

Sandeep Kumar SaxenaSat, 23 Oct 2021 10:35 PM (IST)
हाथरस और मेंडू के बीच भागलपुर एक्सप्रेस का इंजन फेल होने से हाथरस सिटी स्टेशन पर खड़ी यात्री ट्रेन।

हाथरस, जागरण संवाददाता। गांधीधाम से भागलपुर जा रही एक्सप्रेस ट्रेन का पूर्वोत्तर रेलवे के ट्रैक पर हाथरस सिटी और मेंडू स्टेशन के बीच शनिवार को इंजन फेल हो गया। इसके चलते दो घंटे से अधिक ट्रैक जाम रहा। दूसरी ट्रेन का इंजन लगाकर ट्रेन को गंतव्य के लिए रवाना किया गया। करीब दो घंटे तक ट्रेेन के यात्री परेशान रहे। 

दो घंटे तक परेशान रहे यात्री

गांधीाधाम से भागलपुर एक्सप्रेस शाम को साढे़ छह बजे मथुरा से कासगंज की ओर जा रही थी। हाथरस सिटी स्टेशन से कुछ दूर निकलते ही ट्रेन का इंजन अचानक फेल हो गया। इसके पीछे आ रही पैसेंजर ट्रेन को सिटी स्टेशन पर रोका गया। कासगंज से मथुरा की ओर जा रही गोरखपुर-अहमदबाद एक्सप्रेस को मेंडू स्टेशन पर रोक दिया गया। कासगंज से मथुरा की ओर जा रही यात्री गाड़ी को रति के नगला स्टेशन पर रोका गया। स्टेशन अधीक्षक सतीश मोहन ने अनुसार हाथरस सिटी स्टेशन से पैजेंसर ट्रेन का इंजन भागलपुर एक्सप्रेस में लगाकर गंतव्य को रवाना कर दिया है। दो घंटे पांच मिनट ट्रैक बाधित रहा। अब ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया है।

हाथरस में बिजली कटौती से थम रहे उद्योगों के पहिए, डीजल खा रहा मुनाफा, जानिए कैसे

हाथरस : सरकार का सबको बिजली, हर दम बिजली का दावा फाइलों तक सीमित रह गया है। रोस्टर के हिसाब से शहर के रिहायशी इलाकों व उद्योगों को बिजली नहीं मिल रही है। इससे उद्योग चलाने में 20-25 फीसद की लागत बढ़ गई है। यानी कि जनरेटर चलाने में महंगा डीजल उद्यमियों के मुनाफा खा रहा है। शहर और औद्योगिक आस्थानों को 24 घंटे बिजली देने के आदेश हैं। ताज ट्रिपोजियम जोन में आने के कारण निर्बाध आपूर्ति जरूरी है। हालात यह है कि चार से छह घंटे तक की कटौती हो रही है। बिजली कटौती की वजह लोकल फाल्ट के अलावा ग्रिड से कम बिजली मिलना भी बताया जा रहा है। इसके कारण स्थिति है कि लगातार पांच घंटे बिजली नहीं मिल रही है। ट्रिपिंग होने से मशीनें बीच में बंद हो जाती है।

ये है दिक्कतें

 जब मशीन बंद हो जाती है तो पैकिंग व अन्य कार्य में बाधा आती है। इससे प्लास्टिक के सामान के निर्याण व पैकिंग के काम में टेंपरेचर का फर्क पड़ता है। दोबारा चलाने में उतना टेंपरेचर आने में समय लगता है। इससे सामान बिगड़ जाता है। जनरेटर से उतना उत्पादन नहीं हो पाता है। कभी-कभी दिन में बिजली न मिलने से रात में मशीनें चलानी पड़ती है। इससे कर्मचारियों को ड्यूटी करने में दिक्कत आती है।

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