नशा छुड़ाने के लिए कारगर साबित हो रही काउंसलिंग, जानिए कैसे Aligarh News

नशे के लिए तंबाकू के सेवन ने हजारों लोगों की जिंदगियां प्रभावित कर रखी हैं।

नशे के लिए तंबाकू के सेवन ने हजारों लोगों की जिंदगियां प्रभावित कर रखी हैं। तंबाकू के सेवन से कैंसर की चपेट में आकर तमाम लोग काल के ग्रास में चले गए या फिर दयनीय जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं। तंबाकू की लत छुड़ाने के लिए सरकार भी गंभीर है।

Sandeep kumar SaxenaWed, 24 Feb 2021 02:19 PM (IST)

अलीगढ़, जेएनएन। नशे के लिए तंबाकू के सेवन ने हजारों लोगों की जिंदगियां प्रभावित कर रखी हैं। तंबाकू के सेवन से कैंसर की चपेट में आकर तमाम लोग काल के ग्रास में चले गए या फिर दयनीय जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं। तंबाकू की लत छुड़ाने के लिए सरकार भी गंभीर है। विशेषज्ञों की मानें तो समुचित परामर्श, सामाजिक सहयोग और मजबूत इच्छाशक्ति से ऐसे लोगों को बचाया जा सकता है। काउंसलिंग इसमें काफी कारगर साबित हो रही है। लोगों को डि-एडिक्शन प्रकिया में निकोटिन च्यूइंगम अथवा निकोटिन पैचस (निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी-एनआरटी) के अस्थाई उपयोग की जरूरत हो सकती है।  स्वास्थ्य विभाग के मानसिक रोग विभाग की अोर से इसकी कवायद शुरू हुई है। 

सलाह के लिए टोल फ्री नंबर 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर भानु प्रताप सिंह ने कहा कि जनपद को तंबाकू मुक्त बनाने का हम सभी को संकल्प लेना चाहिए । इसके लिए प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ जन जागरूकता की आवश्यकता है। जिले में जिला तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ गठित है । तंबाकू नियंत्रण एक्ट 2003 का जिले में प्रभावी अनुपालन कराया जायेगा । तंबाकू छोड़ने की इच्छा रखने वाले लोगों की काउंसलिंग के लिए 1800112356 टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है, जिसमें सोमवार का दिन छोड़कर प्रत्येक दिन प्रातः 10 बजे से शाम छह बजे तक सलाह मशवरा किया जा सकता है । उन्होंने कहा कि 18 साल से कम आयु का कोई व्यक्ति तंबाकू उत्पाद  बेच नहीं सकता ‌‌। यदि वह पकड़ा जाता है तो तंबाकू बेचने वाले व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई का प्राविधान है। 

पुर्तगाली लेकर आए भारत 

डिप्टी सीएमओ डा. खानचंद बताते हैं कि कोरोना काल में तंबाकू सेवन करने वाले लोगों को सर्वाधिक सुरक्षा की आवश्यकता महसूस की गई। तंबाकू सेवन करने वाले व्यक्ति का कैंसर से पीड़ित होने पर इलाज देश में तंबाकू के सेवन का कोई इतिहास नहीं मिलता है । इसे मात्र 400 साल पहले पुर्तगाली भारत में लेकर आते थे ।

इच्छाशक्ति दिखाएं तो मुक्ति संभव 

मानसिक स्वास्थ्य विभाग की साइकोथैरेपिस्ट डा. अंशू सोम ने कहा कि मरीज जितना मानसिक रूप से प्रसन्न ओर मजबूत होगा वह सकारात्मक योगदानों के लिए उतना ही तैयार होगा । उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति पहचान सकता है कि कैंसर के निदान ने उन्हें जीवन में वास्तव में क्या मायने रखता है, जैसे कि उदाहरण के तौर पर स्तन कैंसर से बचे लोगों के साथ किए गए अनुसंधान प्राथमिक ने दिखाया है । कैंसर के निदान जैसे अत्यधिक तनावपूर्ण अनुभवों को लाभ की पहचान बढ़ाने के लिए रिकार्ड करके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।

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