Coronavirus Alert in Aligarh : घरेलू नुस्खे भी हैं बड़े काम के...इन्हें एक बार आजमाइए तो जनाब

खांसी-जुकाम, पेट दर्द आदि पर दादी-नानी परेशान नहीं हुआ करती थीं।

पहले बच्चों को खांसी-जुकाम पेट दर्द आदि पर दादी-नानी परेशान नहीं हुआ करती थीं। वो झट से रसोई में जाती थीं और रामबाण दवा लेकर आती थीं। हींग सरसो का तेल हल्दी काली मिर्च दालचीनी आदि तमाम से वो दवा बना लिया करती थीं।

Sandeep Kumar SaxenaFri, 07 May 2021 05:23 PM (IST)

अलीगढ़, जेएनएन। आज से 40-50 साल पहले बच्चों को खांसी-जुकाम, पेट दर्द आदि पर दादी-नानी परेशान नहीं हुआ करती थीं। वो झट से रसोई में जाती थीं और रामबाण दवा लेकर आती थीं। हींग, सरसो का तेल, हल्दी, काली मिर्च, दालचीनी आदि तमाम से वो दवा बना लिया करती थीं। उल्टी-दस्त का तो उनके पास चुटकियों में इलाज रहता था। कोरोना के समय एहतियातन एक बार फिर कुछ लोग इन नुस्खे  को आजमाने लगे हैं। वह रसोई में रखे मसालों के प्रयोग से अपने आपको ठीक रख रहे हैं। आप भी जानिए, इनके लाभ के बारे में...

ऐसे भगाएं तमाम बीमारियां

आयुर्वेदाचार्य डा. उपेंद्र सिंह कहना है कि योग-प्राणायाम से शरीर स्वस्थ्य रहता है। साथ ही रसोई में तमाम चीजें होती हैं, जिससे आप स्वस्थ्य रह सकते हैं। उन्होंने बताया कि बचपन में दादी-नानी इसी से इलाज किया करती थीं। मगर, हम उसे भूलते चले गए। रसोई में रखी तमाम चीजों के उपयोग के बारे में हम नहीं जानते हैं। उन्होंने बताया कि पहले जूड़ी-बूटियों से इलाज हुआ करता था, इससे लोग स्वस्थ्य रहते थे। यदि इस समय गले में खरास हो, खांसी-जुकाम हो तो काली मिर्च को पीसकर उसे शहद में मिलाकर लेना चाहिए। इसके अलावा लौंग, दालचीनी, अदरक, पीपल आदि को पीसकर इसे एक लीटर पानी में अच्छे से उबाल लेना चाहिए। फिर उसे ठंडा करके छान लेना चाहिए। इसके बाद उसे छानकर बहुत आसानी से पीना चाहिए। इस समय सुबह और शाम यदि इस तरह काढ़ा बनाकर पीएंगे निश्चित आपको आराम मिलेगा। डा. उपेंद्र ने बताया कि आजवाइन का पानी भी पीने से पेट को बहुत फायदा मिलता है। गुनगुने पानी में आजवाइन को डालकर उबाल लें और उसके बाद आराम से पीएं। खान-पान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। सुबह आठ बजे तक अच्छे से नाश्ता करना चाहिए। इसमें फल, अंकुरित चने, सोयाबीन, रमाश को भीगोकर प्रतिदिन खाने से पाचन क्रिया ठीक रहती है। इससे आपका शरीर भी स्वस्थ्य रहता है। 

रसोई में सेहत का है उपहार 

विकास नगर निवासी राजेश यादव ने बताया कि उन्हें कोरोना के लक्षण थे। खांसी-जुकाम के साथ भीषण बुखार में था। ऐसे में आयुर्वेद के उपचार ने उन्हें स्वस्थ्य कर दिया। राजेश यादव ने बताया कि उन्होंने भी काली मिर्च, लौंग, दालचीन, अदरक का काढ़ा बनाया। उसे एक हफ्ते तक लगातार सुबह-शाम लिया। साथ ही प्रतिदिन शाम को दूध-हल्दी लेते रहें, इससे वह पूरी तरह से स्वस्थ्य हो गए। राजेश यादव ने बताया कि गांव में बचपन में बुखार आदि होने पर यही दिया जाता था। 

कड़ी मेहनत करें, शुद्ध हवा लें 

योग गुरु योगेंद्र आर्य ने कहा कि आज हम आधुनिकता की दौड़ में मेहनत से दूर भागने लगे। हर हाथ में रिमोट आ गया है। बटन दबाते ही हर चीज आन हो जाती है। घर में रखी टीवी, दरवाजे, गाड़ी, कूलर-पंखे, पानी की टंकी आदि सभी चीजें रिमोट से चालू हो जाती है, इसका परिणाम यह हो चला है कि लोग उठकर कोई काम भी नहीं करना चाहते हैं, धूप में पसीना बहाना तो दूर की बात हो गई है। इससे उनका शरीर शिथिल हो जाता है। चलने-फिरने में दिक्कत होने लगती है। रक्त का संचार भी बेहत नहीं होता है। इसलिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। स्वयं से काम करने चाहिए। रिमोट और लिफ्ट के भरोसे नहीं रहना चाहिए। घरों की सीढ़ियां खुद चढ़नी चाहिए। धूप में कड़ी मेहनत करनी चाहिए। सुबह और शाम शुद्ध हवा लेनी चाहिए। योगेंद्र कार्य कहते हैं कि आप कभी नहीं बीमार पड़ेंगे।

 

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