सीएम योगी का एएमयू में आना नए संबंधों का इशारा Aligarh news

संकट की घड़ी में सरकार द्वारा एएमयू की मदद करना अच्छा कदम है।

कोरोना ने हर किसी को दर्द दिया है। एएमयू भी इससे अछूता नहीं रहा। कई काबिल प्राेफेसर हम से छीन लिए। संकट की घड़ी में सरकार द्वारा एएमयू की मदद करना अच्छा कदम है। ऐसे कार्यों के लिए इतिहास में झांकने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

Anil KushwahaSun, 16 May 2021 10:23 AM (IST)

अलीगढ़, जेएनएन । कोरोना ने हर किसी को दर्द दिया है। एएमयू भी इससे  अछूता नहीं रहा। कई काबिल प्राेफेसर हम से छीन लिए। संकट की घड़ी में सरकार द्वारा एएमयू की मदद करना अच्छा कदम है। ऐसे कार्यों के लिए इतिहास में झांकने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। वैसे भी सर सैयद के इस इदारे से भाजपा के संबंध ठीक नहीं रहे हैं। जब किसी नेता के कैंपस में बुलाने की बात होती है तो विराेध के स्वर पहले खड़े हो जाते हैं।  नेताओं की बयानबाजी भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है। कोरोना संकट में ही सही सीएम योगी का एएमयू में आना नए संबंधों की ओर इशारा तो करता ही है। आरएसएस पहले से ही इसके पक्ष में रही है। संघ नेता इंद्रेश के यूनिवर्सिटी के तमाम प्रोफेसरों से अच्छे संबंध हैं। उन्होंने भी जेएन मेडिकल कालेज को आक्सीजन के कंसंट्रेटर भेजे हैं। एएमयू के प्रति ये झुकाव अच्छा ही है।   

संबंध ताे बनाने ही होंगे

ताली एक हाथ से नहीं बजती। सरकार अगर एएमयू की ओर बढ़ रही है तो इंतजामिया को भी एक कदम आगे आना चाहिए। इससे दाेनों का ही फायदा है। केंद्र व राज्य में सरकार किसी की भी हो यूनिवर्सिटी का हित ही देखा जाना चाहिए।  संबंध अच्छे होने से बजट से लेकर तमाम अन्य फायदे ही हो सकते हैं। एएमयू में सीएम ये संदेश दिया भी। उन्होंने कहा कि सांसद से संबंध अच्छे होंगे तो केंद्र से संबंध बनेंगे। विधायकों से संबंध अच्छे होंगे तो राज्य सरकारों से संबंध मजबूत होंगे। इंतजामिया व छात्र नेताओं को भी ये बात समझनी होगी। ये भी सही है कि अपने मान सम्मान से समझौता भी नहीं किया जा सकता।  लेकिन जहां चाह, वहां से राह भी निकलती है। ये दोनों ओर से ही संभव है। यूनिवर्सिटी पर सवाल उठाने वालों को पीएम मोदी एएमयू को मिनी इंडिया कहकर जवाब दे भी चुके हैं।   

मजबूत तैयारी जरूरी 

कोरोनो की  दस्तक का देश ने जिस हिम्मत से मुकाबला किया था उसकी दुनिया भर में तारीफ हुई थी। काफी हद तक हम इस जानलेवा वायरस को मात देने में कामयाब हुए थे। लेकिन दूसरी लहर को लेकर  फिक्रमंद नहीं हुए। लापरवाही इस कदर की कि नाक से मास्क उतार दिए और शारीरिक दूरी का पालन करना भूल गए।  अस्पतालों में संसाधन तक नहीं बढ़ा पाए। नतीजा ये रहा कि इस अदृश्य दुश्मन ने इंसान को ऐसा घेरे में लिया कि हर तरफ चीख पुकार मचवा दी। कितने परिवार बिखर गए। कितनी माताओं का सिंदूर मिट गया। अभी भी हम कोरोना से जूझ रहे हैं। तीसरी लहर की संभावना भी जताई जा रही है। इस लहर से बच्चों को बचाने के लिए हमारे पास मौका है। इसकी मजबूती से तैयार करनी ही होगी।  आक्सीजन संकट को पूरी तरह खत्म करने के साथ अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में संसाधन बढ़ान होंगे। 

अब ऐसी चूक न करें 

अपने देश में बनी कोरोना वैक्सीन  का महत्व दुनिया जानती है। सरकार ने कई देशों को वैक्सीन की आपूर्ति की भी। है।  कोरोना की दूसरी लहर में भी यह वैक्सीन रामवाण साबित हुई। जिन लोगों ने वैक्सीन लगवाई और संक्रमित हुए वो ठीक भी जल्दी हुए। ऐसे तमाम उदाहरण आपको मिल भी जाएंगे। इसके बाद भी बड़ी संख्या में लोग वैक्सीन लगवाने में चूक कर गए। 18 से अधिक आयु वर्ग के लोगों को भी वैक्सीन लगवाई जा रही है। सरकारी अस्पतालों में ये मुफ्त लगाई जा रही है। अब ये चूक न करें। कोरोना से जंग में वैक्सीन बहुत जरूरी है। खास कर वो लोग वैक्सीन जरूर लगवाएं जो अफवाहों के शिकार हुए। दूसरे लोगों की बातों में आकर वैक्सीन लगवाने से रह गए। नेताओं के राजनीतिक बयान हो सकते हैं, लेकिन आपको तो अपनी और अपने परिवार की चिंता करनी ही पड़ेगी।  इसके लिए मुखिया को ही आगे आना होगा।

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